
ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि खाद्य विभाग जिसे संदिग्ध मानकर जब्त कर रहा है, उसमें से कितना पहले ही आपकी रसोई और मिठाई की दुकानों तक पहुंच चुका है?
जानकारी के अनुसार त्योहार आते ही मिठाई, घी, पनीर और मावे की मांग बढ़ जाती है और इसी के साथ मिलावटखोरों का खेल भी तेज होने की आशंका रहती है। भोपाल में खाद्य सुरक्षा विभाग की हालिया कार्रवाई ने इस आशंका को और गंभीर बना दिया है।
अलग-अलग कार्रवाइयों में करीब 25 क्विंटल घी जब्त किया गया, जिसकी कीमत करीब 14 लाख रुपये बताई गई। इसके अलावा पटेल नगर स्थित श्रीराम डिस्ट्रीब्यूटर्स से करीब 2,095 किलो/लीटर संदिग्ध घी जब्त किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत 12.66 लाख रुपये है।
करोंद के प्रोस्पेरिटी टेक से करीब 938 किलो घी जब्त हुआ। इसकी कीमत करीब 5.50 लाख रुपये बताई गई। यहां खाद्य लाइसेंस भी नहीं मिला। वहीं भानपुर स्थित नर्मदा सेल्स कारपोरेशन से करीब 1,500 किलो घी जब्त किया गया। अलग-अलग ब्रांड के 10 नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। अब विभाग निर्माता से लेकर सुपर स्टॉकिस्ट, डिस्ट्रीब्यूटर और रिटेलर तक पूरी सप्लाई चेन की जांच कर रहा है।
मंगलवारा स्थित आनंद मावा भंडार से लिए गए नमूनों की प्रयोगशाला रिपोर्ट ने भी गंभीर सवाल खड़े किए। रिपोर्ट के आधार पर पाम ऑयल अथवा अन्य वनस्पति वसा की मिलावट की प्रबल संभावना बताई गई। मावे के नमूने असुरक्षित पाए जाने के बाद प्रतिष्ठान का खाद्य पंजीयन तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
खाद्य विभाग लगातार संदिग्ध घी, मावा और पनीर के नमूने लेकर प्रयोगशाला भेज रहा है, लेकिन असली सवाल उपभोक्ताओं की सुरक्षा का है। रिपोर्ट आने तक उसी बैच का माल बाजार में पहुंच चुका हो तो उसकी निगरानी कौन करेगा?
रक्षाबंधन पर मिठाई और दुग्ध उत्पादों की मांग बढ़ने के बीच केवल छापेमारी पर्याप्त नहीं है। मिलावट की जड़ तक पहुंचकर निर्माता से लेकर सप्लायर, डिस्ट्रीब्यूटर और रिटेलर तक पूरी सप्लाई चेन की जांच जरूरी है।