तुर्की पर अफगानिस्तान, कतर पर भड़का पाकिस्तान... इंस्ताबुल वार्ता नाकाम होने की इनसाइड स्टोरी, ISI-तालिबान क्यों भिड़े?

Updated on 08-11-2025 01:09 PM
इंस्ताबुल: तुर्की के इंस्ताबुल में अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच हुई वार्ता नाकाम हो गई है। इस बैठक के नाकाम होने को लेकर कुछ बड़ी वजहें सामने आई हैं, जिनमें से एक बड़ी वजह पाकिस्तान का वो आरोप है, जिसमें उसका मानना है कि कतर, तालिबान का पक्ष ले रहा था। अफगान आई ने खुलासा किया है कि बैठक के दौरान अफगानिस्तान के तालिबान अधिकारियों ने पाकिस्तान पर अफगानिस्तान को अस्थिर करने और इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत (ISKP) के आतंकवादियों की घुसपैठ को आसान बनाने के लिए शरणार्थियों के निष्कासन और व्यापारिक मार्गों को 'हथियार' बनाने का आरोप लगाया है।

मामले से परिचित राजनयिक और सुरक्षा सूत्रों के हवाले से 'अफगाई आई' ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल असीम मलिक ने किया, जबकि अफगान पक्ष का प्रतिनिधित्व जनरल डायरेक्टरेट ऑफ इंटेलिजेंस (GDI) के प्रमुख माौलवी अब्दुलहक वसीक ने कर रहे थे। यह काबुल और इस्लामाबाद के बीच बातचीत का तीसरा दौर था, जो इस्तांबुल में बंद दरवाजों के पीछे आयोजित किया गया था और कतर और तुर्की के अधिकारी मध्यस्थता कर रहे थे। बैठक के दौरान दोनों ही देशों के अधिकारियों के बीच गहरा अविश्वास देखा गया और सूत्रों ने कहा कि बैठक शुरू होने के कुछ ही समय बाद ये वार्ता टूट गई। इस दौरान दोनों ही पक्षों ने एक दूसरे पर 'बदनीयती' का आरोप लगाया।
तालिबान ने शरणार्थियों को हथियार बनाने का लगाया आरोप
तालिबान के प्रतिनिधियों ने पाकिस्तान पर अफगानिस्तान के शरणार्थी संकट को हथियार की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। काबुल का कहना है कि पाकिस्तान की, अफगान शरणार्थियों को देश से बाहर निकालने का फैसला एक सुनियोजित रणनीति है, ताकि अफगानिस्तान को अस्थिर किया जा सके। इसकी आड़ में अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत (ISKP) के आतंकियों को भेजा जा सके। अफगान अधिकारियों ने दावा किया कि कई ISKP सदस्य पाकिस्तान से निर्वासित शरणार्थियों के भेष में अफगान सीमा पार कर रहे हैं। इस दौरान तालिबान के अधिकारियों ने मध्यस्थों के सामने ही पाकिस्तानी अधिकारियों के सामने सबूत रख दिए, जिससे पाकिस्तान के अधिकारी पहले असहज हुए और बाद में तिलमिला गये
इसके बाद तालिबान ने पाकिस्तान पर आर्थिक युद्ध छेड़ने का भी आरोप लगाया। काबुल का कहना है कि तोर्खम और स्पिन बोल्डक जैसे व्यापारिक मार्गों को बार-बार बंद कर पाकिस्तान अफगान अर्थव्यवस्था पर दबाव बना रहा है। जिससे आम लोगों को भारी नुकसान होता है। एक अफगान वार्ताकार ने कहा, “हर बार जब पाकिस्तान दबाव डालना चाहता है, वह सीमाएं बंद कर देता है। वे जानते हैं कि अफगानिस्तान लैंडलॉक्ड है और यह जानबूझकर की गई बदमाशी है।”
इसके अलावा बैठक में अफगान प्रतिनिधियों ने अमेरिकी ड्रोन उड़ानों के मुद्दे को भी उठाया। तालिबान ने आरोप लगाते हुए कहा कि ये उड़ानें पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र से होकर अफगानिस्तान में निगरानी कर रही हैं। काबुल ने इसे “राष्ट्रीय संप्रभुता का उल्लंघन” बताया और इस्लामाबाद से अमेरिकी सहयोग खत्म करने की मांग की। इसके अलावा, अफगान पक्ष ने दावा किया कि ISKP के नेटवर्क पाकिस्तान के बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में सक्रिय हैं, जिन पर कार्रवाई नहीं की जा रही। काबुल ने चेतावनी दी कि इन नेटवर्कों की अनदेखी पूरे क्षेत्र की सुरक्षा को खतरे में डाल सकती है।

पाकिस्तान ने तालिबान के आरोपों को नकारा
पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल ने तालिबान के सभी आरोपों को निराधार बताते हुए वार्ता का एजेंडा सिर्फ टीटीपी के मुद्दे तक सीमित रखना चाहा। इस्लामाबाद का कहना था कि काबुल को अपने क्षेत्र से टीटीपी की गतिविधियों को पूरी तरह खत्म करना चाहिए। लेकिन, अफगान प्रतिनिधियों ने इसे पाकिस्तानी अधिकारियों का तानाशाही रवैया कहा। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी अधिकारियों ने टीटीपी के अलावा किसी भी और मुद्दे पर बात करने से इनकार कर दिया। इस दौरान ऐसा लग रहा था कि पाकिस्तानी अधिकारी, तालिबान के अधिकारियों से बात नहीं कर रहे, बल्कि आदेश दे रहे हैं। इसीलिए ये बैठक बिना किसी नतीजे के नाकाम हो गई।

वहीं, बैठक के नाकाम होने से मध्यस्थ कतर और तुर्की, दोनों पक्षों से नाराज बताए जा रहे हैं। पाकिस्तानी मीडिया में लीक किए गये खबरों में कहा गया है कि कतर, तालिबान का पक्ष ले रहा था। जिसके बारे में कुछ अधिकारियों का मानना है कि "वार्ता से पहले ही पाकिस्तान ने मध्यस्थों पर ही दोष मढ़ दिया था।" कतर ने इस आरोप का सार्वजनिक रूप से जवाब नहीं दिया है। इस बीच, तुर्की के अधिकारियों ने भी इस पर कोई टिप्पणी करने से परहेज किया है, लेकिन अफगान अधिकारी तुर्की के रवैये और उसकी तटस्थता पर सवाल उठा रहे हैं।

अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 19 September 2026
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B नॉन-इमिग्रेंट वीजा प्रोग्राम की निगरानी को सख्त करने वाले एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किए हैं। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि कुछ एम्प्लॉयर्स,…
 19 September 2026
काबुल: अफगान तालिबान ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि अगर उसने अफगानिस्तान के अंदर सैन्य कार्रवाई की तो उसे करारा जवाब मिलेगा। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा…
 19 September 2026
वॉशिंगटन: अमेरिका और डेनमार्क ने ग्रीनलैंड की सुरक्षा को लेकर समझौते का ऐलान किया है। इसके जरिए उस राजनयिक विवाद को सुलझा लेने का दावा किया गया है, जो राष्ट्रपति…
 19 September 2026
वॉशिंगटन: टेक अरबपति ब्रायन जॉनसन लंबे समय से चर्चा में रहे हैं। इसकी वजह उनका एक मुश्किल दिनचर्या का पालन करते हुए बढ़ती उम्र को रोकना और मौत को टालने…
 19 September 2026
बीजिंग: इस साल फरवरी के आखिर में इजरायल-अमेरिका ने ईरान पर हमले शुरू किए थे। इससे पश्चिम एशिया में एक भीषण जंग छिड़ी। इस लड़ाई के कुछ ही हफ्ते बाद…
 19 September 2026
इस्लामाबाद: आज यानी शनिवार 19 सितम्बर को सिंधु जल संधि 66 साल की हो गई है। 19 सितम्बर 1960 को इस संधि पर कराची में हस्ताक्षर हुए थे। भारत और…
 18 September 2026
वॉशिंगटन: अमेरिका का F-16 फाइटर जेट क्रैश हुआ है। गुरुवार को मिशिगन के ग्रामीण इलाके में F-16 हादसे का शिकार हुआ है। हालांकि पायलट समय रहते सुरक्षित बाहर निकलने में…
 18 September 2026
ढाका: लंदन से बांग्लादेश जा रही बिमान बांग्लादेश एयरलाइंस की फ्लाइट में 2 यात्रियों के बीच जमकर मारपीट हो गई। दोनों यात्रियों के बीच सीट को लेकर विवाद हुआ था,…
 18 September 2026
वॉशिंगटन: अमेरिकी एयरफोर्स के 14 अफसर बांग्लादेश पहुंचे हैं। ये अफसर एक विशेष फ्लाइट से ढाका पहुंचे, जिसके बाद इनको वीजा उपलब्ध कराया गया। बांग्लादेशी गृह मंत्रालय की ओर से…
Advt.