एक और पान सिंह तोमर! गुदड़ी के लाल ने किया रांची में कमाल, आंधी की तरह दौड़ता है, जीता मेडल

Updated on 27-05-2026 12:59 PM
 (भोपाल): 1950 और 1960 के दशक में भारतीय सेना के जवान पान सिंह तोमर ने ट्रैक एंड फील्ड इवेंट में अपनी छाप छोड़ी थी। उन्होंने 1958 के एशियन गेम्स में भी हिस्सा लिया था। सेना से रिटायर होने के बाद परिस्थिति ऐसी बनी की वह चंबल में डकैतों के गिरोह का प्रमुख बन गए। उसी चंबल क्षेत्र से एक नया एथलीट उबर रहा है। मुरैना से गरीबी, संघर्ष और खेल के जरिए जिंदगी बदलने की एक ऐसी ही कहानी सामने आई है।

विनोद सिंह ने सिल्वर मेडल जीता

मुरैना पहले भी कई खिलाड़ियों को जन्म दे चुका है। अब एक और लंबी दूरी का रनर दिया है जिसकी कहानी संघर्ष से सफलता तक पहुंचने की मिसाल है। 21 साल के विनोद सिंह ने रांची में आयोजित एथलेटिक्स फेडरेशन कप 2026 की 5000 मीटर रेस में सिल्वर मेडल अपने नाम किया। पान सिंह की तरह विनोद की खेल यात्रा भी एक व्यावहारिक जरूरत से शुरू हुई- बेहतर भोजन और पहचान पाने की चाह।

आर्मी में भर्ती के लिए दौड़ते थे विनोद

पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे विनोद पिछले साल भारतीय नौसेना में पेटी ऑफिसर के रूप में भर्ती हुए। वह मुरैना के एक किसान परिवार से आते हैं। उनके पिता के पास दो से ढाई बीघा जमीन ही है। परिवार का पालन पोषण करने के लिए उन्हें दूसरों के खेतों में भी काम करना पड़ता है। विनोद का लक्ष्य सेना में भर्ती होना और इसी वजह से वह हर दिन दौड़ने जाते थे। दो साल पहले उन्होंने अपने ट्रैक बदलते हुए मध्य प्रदेश एथलेटिक्स एकेडमी में एंट्री ली। जहां अनुशासित प्रशिक्षण और संतुलित आहार ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी।विनोद ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा- एकेडमी से जुड़ने के बाद मेरी जिंदगी पूरी तरह बदल गई। यहां बेहतर डाइट और खेल पर पूरा ध्यान देने का मौका मिला। पिछले दो वर्षों में मैंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीते हैं। लोग मेरी यात्रा की तुलना पान सिंह तोमर से करते हैं, क्योंकि मैंने खेलों में उसी मकसद के साथ कदम रखा था जो पान सिंह का था। एथलेटिक्स ने मुझे बेहतर भोजन, फोकस और भविष्य दिया।

कोच भी विनोश से काफी इम्प्रेस

1950 और 1960 के दशक में पान सिंह तोमर ने स्टीपलचेज में 7 बार नेशनल चैंपियन बने थे। इतनी उपलब्धियों के बाद उनका डकैत बनना काफी हद तक आर्थिक दबावों का परिणाम था। कुछ उसी तरह की परिस्थितियां विनोद के जीवन में भी थीं। सीमित संसाधन और खेल के जरिए सम्मान पाने की चाह। लेकिन पान सिंह की दुखद कहानी के उलट विनोद का भविष्य खेल के मैदान में ही दिखाई देता है।मध्य प्रदेश अकादमी के कोचों ने विनोद की अनुशासित ट्रेनिंग और मेहनत को उनकी सफलता का कारण बताया। उनके कोच संदीप सिंह ने कहा, 'वह अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए पूरी तरह समर्पित हैं। भविष्य में उनसे और कई उपलब्धियों की उम्मीद है।'

अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 01 August 2026
नई दिल्ली: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की पुरुष जेवलिन थ्रो प्रतियोगिता में सभी की नजरें भारत के नीरज चोपड़ा और पाकिस्तान के अरशद नदीम पर थी। भारत ने शानदार प्रदर्शन करते…
 01 August 2026
नई दिल्ली: वर्ल्ड कप 2027 में भारतीय टीम कैसी होगी? हर क्रिकेट फैन के जहन में इस समय यही सवाल कौंध रहा है। पिछली बार ट्रॉफी से एक कदम पीछे…
 01 August 2026
टेस्ट क्रिकेट में अभी तक तीन गेंदबाजों के नाम पारी में ही 10 विकेट लेने का रिकॉर्ड है। इसमें जिमी लेकर के अलावा अनिल कुंबले और एजाज पटेल शामिल हैं।…
 01 August 2026
नई दिल्ली: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का 9वां दिन भारत के लिए शानदार रहा। देश की झोली में एक ही दिन में दो गोल्ड समेत कुल 6 मेडल आए। डेकाथलॉन स्पर्धा…
 31 July 2026
नई दिल्ली: भारतीय हॉकी टीम अगले महीने शुरू होने वाले हॉकी विश्व कप में एक बड़े बदलाव के साथ मैदान पर उतरेगी। पहली बार ऐसा होगा जब भारतीय पुरुष और…
 31 July 2026
नई दिल्ली: पाकिस्तानी टीम को टेस्ट सीरीज के पहले मुकाबले में वेस्टइंडीज के खिलाफ करारी हार मिली थी। इस मैच में पाकिस्तान की पहली पारी में शान मसूद ने शतक…
 31 July 2026
नई दिल्ली: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में हर दिन भारत के खाते में कोई न कोई मेडल आ रहा है। 30 जुलाई तक तीन गोल्ड समेत भारत 17 मेडल जीत चुका…
 31 July 2026
भारत के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने वाले हर खिलाड़ी का सपना कप्तानी करना होता है। अगर टेस्ट में कप्तानी मिल जाए तो सोने पर सुहागे जैसा है। भारत 94 साल…
 31 July 2026
ग्लास्गो: पाकिस्तान के भाला फेंक खिलाड़ी अरशद नदीम कॉमनवेल्थ गेम्स के फाइनल में पहुंच गए हैं। क्वालिफायर में नदीम ने 78.63 मीटर का थ्रो किया। इससे उन्हें फाइनल में जगह…
Advt.