चीन ने J-16 से F-22, F-35 स्टील्थ विमानों को लॉक करने का किया दावा, इंडो-पैसिफिक में तहलका, अमेरिका अब क्या करेगा?

Updated on 07-10-2025 01:16 PM
बीजिंग: चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स और सरकारी न्यूज चैनल CCTV ने दावा किया है कि उसने अमेरिका के दोनों स्टील्थ फाइटर जेट F-22 और F-35 को लॉक कर लिया था। ये बहुत सनसनीखेज दावा है, जिसने दुनिया भर के डिफेंस एक्सपर्ट्स को चौंका दिया है। CCTV की तरफ से दिखाए गये एक डॉक्टूमेंट्री में दावा किया गया है कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के एक पायलट ने दो विदेशी स्टील्थ फाइटर जेट को लॉक किया था, जो संभवत: एफ-35 और एफ-22 हो सकते हैं। वीडियो में पायलट कह रहा है कि उसने दोनों विमानों को लॉक कर लिया था और उसे पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ये घटना पिछले साल चीन के तटीय इलाके में हुई थी। 3 अक्टूबर को सीसीटीवी ने इस मामले को लेकर रिपोर्ट जारी किया है। जिसमें दावा किया गया है कि ये अपनी तरह का पहला मामला है और उस घटना के बाद से चीन के तटीय इलाके के पास फिर कोई स्टील्थ फाइटर जेट को नहीं देखा गया है। चीन के इस दावे ने डिफेंस की दुनिया में एक्सपर्ट्स को हैरान कर दिया है, क्योंकि चीनी J-16 फाइटर जेट, तकनीकी लिहाज से एक 4.5-जनरेशन फाइटर जेट है, जबकि F-22 और F-35 दुनिया के सबसे एडवांस पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर माने जाते हैं।
क्या J-16 से चीन ने अमेरिकी स्टील्थ जेट को लॉक किया?
आपको बता दें कि J-16 फाइटर जेट को चीन के शेनयांग एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन ने डेवलप किया है और ये रूसी Su-27 से प्रेरित एक मल्टीरोल स्ट्राइक फाइटर है। इसमें अत्याधुनिक AESA रडार, इंफ्रारेड सर्च एंड ट्रैक (IRST) सिस्टम और एडवांस फायर कंट्रोल तकनीक शामिल हैं, जो 200–250 किमी तक के लक्ष्यों को ट्रैक करने की क्षमता रखता है। सीसीटीवी की रिपोर्ट में पायलट ली चाओ ने कहते नजर आ रहे हैं कि "जब दोनों विदेशी जेट्स ने हमारे सामने उड़ान भर रहे थे तो हमने उन्होंने चेतावनी दी, लेकिन वे और करीब आए। मैंने अपने विमान को ऊपर खींचा और एक बैरल रोल किया। उस समय मेरा कॉकपिट उनके विमान से सिर्फ 10–15 मीटर की दूरी पर था।" एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतनी ज्यादा करीब होने के बाद एक चौथी पीढ़ी के विमान के लिए भी स्टील्थ जेट को लॉक करना संभव है
एक्सपर्ट्स का मानना है कि काफी ज्यादा करीब होने की स्थिति में रडार सिग्नल और इंफ्रारेड सेंसर दोनों ज्यादा प्रभावी हो जाते हैं। यानी तकनीकी रूप से ऐसा होना असंभव नहीं कहा जा सकता है, लेकिन "दो स्टील्थ जेट्स को एक साथ लॉक करने" का देवा पर एक्सपर्ट्स के गले नहीं उतर रहा है। अमेरिका ने 22 रैप्टर और F-35 लाइटनिंग II, दोनों को इंडो-पैसिफिक में तैनात कर रखा है। F-22 रैप्टर को कडेना एबी (ओकिनावा, जापान), ओसान एबी (दक्षिण कोरिया), एंडरसन एएफबी (गुआम), कुनसन एबी (दक्षिण कोरिया) और फिलीपींस को तैनात रखा गया है और ये सभी अलग-अलग समय पर तैनात किए गए हैं। इसी तरह, F-35 लाइटनिंग II को भी जापान, दक्षिण कोरिया, गुआम और हिंद-प्रशांत थिएटर कमांड में तैनात किया गया है
चीन का दावा साइकोलॉजिकल वॉरफेयर का हिस्सा?
यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट में कई एक्सपर्ट्स ने इसे साइकोलॉजिकल वॉरफेयर का हिस्सा बताया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि चीन ऐसे दावे अतीत में भी कर चुका है। चीन पहले अपने J-20, J-15 और J-16 से विदेशी विमानों को भगाने की बात कर चुका है। चीन ने अपने दावों को लेकर कोई सबूत नहीं दिया है। इसके अलावा अमेरिकी वायुसेना के F-22 और F-35 जेट्स नियमित रूप से जापान, दक्षिण कोरिया, गुआम और फिलीपींस में तैनात रहते हैं, और उनके पायलटों की तरफ से ऐसे किसी भी घटना का जिक्र नही किया ग या। इसीलिए कुछ विश्लेषक मानते हैं कि यह दावा चीन की घरेलू ऑडियंस को खुश करने के लिए है।
इंडो-पैसिफिक में चीन की शक्ति को चुनौती?
टेक्नोलॉजी के लिहाज से देखा जाए तो चीनी J-16 की AESA रडार और IRST सिस्टम किसी स्टील्थ फाइटर को करीब की दूरी यानि विदिन विजुअल रेंज पर लॉक करने में सक्षम हो सकती है, खासकर उक्त अगर वह विमान साइड या रियर ऐंगल से दिखाई दे। लेकिन F-22 और F-35 जैसी मशीनें अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और कम रडार सिग्नेचर से लैस हैं, इसीलिए इन्हें लॉक करना अत्यंत मुश्किल माना जाताहै । कई पश्चिमी सैन्य विश्लेषक मानते हैं कि चीन का यह दावा तकनीकी रूप से संभव तो है, लेकिन अत्यंत मुश्किल है। लेकिन अगर चीन का दावा सही है और वाकई चीनी स्टील्थ फाइटर जेट्स लॉक किए गये हैं तो इसका मतलब है कि ये अमेरिका के लिए बहुत बड़ा झटका है। ऐसे में इंडो-पैसिफिक में अमेरिका के लिए चीन को रोकना अत्यंत मुश्किल हो सकता है।

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