दुनियाभर की चिप फैक्ट्रियों पर क्या ताला लगवाना चाहता है चीन ड्रैगन की साजिश को समझिए

Updated on 22-09-2023 01:58 PM
नई दिल्ली : चीन भले ही रियल एस्टेट संकट, घटती डिमांड और बेतहाशा बढ़े हुए कर्ज से जुझ रहा हो, लेकिन फिर भी वह अपनी कुटिल नीतियों से बाज नहीं आ रहा है। आइए जानते हैं कि मामला क्या है। दुनियाभर में सेमीकंडक्टर (Semiconductors) की अच्छी-खासी डिमांड है। जैसे-जैसे तकनीक बढ़ रही है, चिप्स की मांग में इजाफा हो रहा है। चिप निर्माण में काम आने वाले मटेरियल्स के चीन में अकूत भंडार है। चीन दुनिया को इन खनिजों की सप्लाई रोक रहा है। जिससे दुनिया के दूसरे देशों को सेमीकंडक्टर मैन्यूफैक्चरिंग में दिक्कत हो। सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए जरूरी दो दुर्लभ खनिजों का चीनी निर्यात अगस्त में जीरो हो गया है। इससे एक महीने पहले बीजिंग ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए विदेशों में इन खनीजों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था।

चीन करता है सबसे अधिक उत्पादन


चिप बनाने में जरूरी ये दो महत्वपूर्ण खनीज गैलियम और जर्मेनियम हैं। क्रिटिकल रॉ मटेरियल्स अलायंस के अनुसार, चीन दुनिया के गैलियम का करीब 80% और जर्मेनियम का करीब 60% उत्पादन करता है। लेकिन उसने पिछले महीने वैश्विक बाजारों में ये दोनों ही खनीज नहीं बेचे हैं। बुधवार को जारी हुए चीनी कस्टम आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। जुलाई में चीन ने 5.15 मीट्रिक टन फोर्ज्ड गैलियम प्रोडक्ट और 8.1 मीट्रिक टन फोर्ज्ड जर्मेनियम प्रोडक्ट निर्यात किये थे। पिछले महीने निर्यात में कमी के बारे में पूछे जाने पर चीन के वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता He Yadong ने बताया कि विभाग को कंपनियों से दो सामग्रियों के निर्यात के लिए आवेदन प्राप्त हुए हैं। उन्होंने विस्तार से बताए बिना कहा कि कुछ आवेदनों को मंजूरी दे दी गई थी।

अमेरिका से ले रहा बदला


ये प्रतिबंध चीन की अमेरिकी निर्यात नियंत्रणों का बदला लेने की इच्छा के संकेत हैं। चीन अपनी इकॉनोमिक ग्रोथ से जुड़ी चिंताओं के बावजूद ऐसा कर रहा है। शायद यही कारण है कि चीन को लेकर अमेरिका के तेवर पिछले कुछ समय से ढीले पड़े हैं।

संकट में है दुनिया की दूसरी बड़ी इकॉनमी


चीन की आर्थिक स्थिति की बात करें, तो यह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इकॉनमी कमजोर घरेलू मांग और हाउसिंग संकट से जूझ रही है। पिछले महीने, देश के निर्यात में 3 साल से अधिक समय की सबसे बड़ी गिरावट आई थी। इससे चीनी इकॉनमी की रिकवरी को एक नया झटका लगा है।

निर्यात पर प्रतिबंध लगाना एक दोधारी तलवार


विश्लेषकों का कहना है कि निर्यात पर प्रतिबंध लगाना एक दोधारी तलवार है, जो चीनी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकती है। साथ ही यह देश के बाहर सप्लाई चेन में बदलाव को तेज कर सकती है। चीन इन दो तत्वों के उत्पादन में इंडस्ट्री लीडर हो सकता है, लेकिन वैकल्पिक प्रोड्यूसर्स भी हैं। साथ ही दोनों प्रोडक्ट्स के विकल्प भी उपलब्ध हैं। यूरेशिया ग्रुप के विश्लेषकों ने जुलाई में एक शोध रिपोर्ट में यह बात कही थी।

चीन को ही हो रहा नुकसान


चीन द्वारा इन दो उत्पादों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाते ही इसका असर उसके घरेलू बाजार पर पड़ने लगा है। चीन में गैलियम की कीमतें गिर गई हैं, क्योंकि निर्यात कंट्रोल के कारण इन्वेंट्री जमा हो गई है। शंघाई मेटल मार्केट से मिली जानकारी के अनुसार, गुरुवार को गैलियम का स्पॉट प्राइस 1,900 युआन (260 डॉलर) प्रति मीट्रिक टन था, जो जुलाई की शुरुआत से लगभग 20% कम था।

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