H-1B वीजा प्रोग्राम पर एलन मस्क का बड़ा बयान, भारतीयों की दिल खोलकर तारीफ, ट्रंप को लगेगी मिर्ची!

Updated on 01-12-2025 02:39 PM
वॉशिंगटन: अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने H1-B वर्कर वीजा प्रोग्राम पर लगातार सख्त रुख दिखाया है। इसमें वीजा की फीस कई गुना बढ़ाना समेत कई कदम शामिल है। इन फैसलों ने खासतौर से भारतीयों को प्रभावित किया है। एक तरफ ट्रंप प्रशासन का रुख भारतीयों को लेकर सख्त है तो वहीं अरबपति एलन मस्क ने भारत के लोगों की जमकर तारीफ की है। मस्क ने ट्रंप प्रशासन के उलट भारतीयों की अमेरिका के विकास में सहयोग के लिए जमकर तारीफ करते हुए वीजा प्रोग्राम को जारी रखने की बात कही है।

टेस्ला सीईओ एलन मस्क ने H-1B वीजा का समर्थन करते हुए कहा कि भारतीय प्रवासियों से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बहुत फायदा हुआ है। अमेरिका को भारत के कामगारों की आज पहले से कहीं ज्यादा जरूरत है। मस्क ने माना कि आउटसोर्सिंग कंपनियां वीजा प्रणाली का दुरुपयोग करती हैं। इस पर उन्होंने कहा कि इस कमी को दूर किया जाना चाहिए ना कि वीजा को ही रोक देना चाहिए।

कंपनियों को टैलेंट की तलाश

एक पॉडकास्ट में एलन मस्क ने हालिया दिनों में H1-B वीजा पर उठे सवालों पर कहा कि कंपनियों में हमेशा प्रतिभाशाली लोगों की तलाश रहती है। वे विशेष भूमिकाओं को भरने के लिए संघर्ष करती हैं। H-1B वर्कर वीजा वैश्विक प्रतिभा को अपनी कंपनियों में लाने का अहम जरिया रहा है। ऐसे में इसके महत्व को कम नहीं आंका जा सकता है।एलन मस्क ने आगे कहा, 'मैं इस विचार का कतई समर्थन नहीं कर सकता कि हमें H-1B कार्यक्रम पूरी तरह से बंद कर देना चाहिए। कुछ समूहों की ओर से की जा रही ये मांग ठीक नहीं है। इन बातों में जरूर सच्चाई है कि इस वीजा कार्यक्रम में कुछ गड़बड़ी हैं। इसके लिए हमें पूरा प्रोग्राम बंद करने की बजाय सिस्टम के दुरुपयोग को रोकना चाहिए।

क्या है H1b वीजा

H-1B वीजा अमेरिकी कंपनियों को विदेशी पेशेवरों को काम पर रखने की अनुमति देता है। इस वीजा को हासिल करने में भारतीयों का दबदबा है। 2024 में अमेरिका से जो H1B वीजा जारी हुए, उनमें से 71 प्रतिशत भारतीयों को मिले। ट्रंप ने इस साल के शुरू में राष्ट्रपति बनने के बाद से इस कार्यक्रम के नियमों को कड़ा कर दिया है।

ट्रंप प्रशासन ने नए H-1B आवेदन के लिए फीस बढ़ाकर 100,000 डॉलर कर दी है। ट्रंप प्रशासन की ओर से कई दफा ये कहा गया है कि इस वीजा के चलते देश के लोगों की नौकरियां विदेशियों को मिल रही हैं। हालांकि ट्रंप ने भी बीते महीने से माना था कि अमेरिका विदेशी प्रतिभाओं को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं कर सकता।

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