फर्जी किसान कर्जमाफी से को-ऑपरेटिव बैंकों की हालत हुई खराब

Updated on 24-12-2025 01:49 PM

डॉ. मोहन यादव सरकार के दो साल पूरे होने के उपलक्ष्य में मंत्रीगण अपने विभागों की उपलब्धियां गिना रहे हैं। इस क्रम में बुधवार को खेल और सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने समन्वय भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। सारंग ने सहकारी बैंकों की खराब आर्थिक स्थिति के लिए कमलनाथ सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि 15 महीने की कांग्रेस की सरकार में फर्जी किसान कर्जमाफी के कारण को-ऑपरेटिव बैंकों की हालत खराब हुई है। हमारी सरकार बैंकों की स्थिति सुधारने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 300 करोड़ रुपए सहकारी बैंकों को दिए हैं।

70% वितरण सहकारिता से, शिकायत शून्य सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में खाद के वितरण में सहकारी क्षेत्र ने लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है, यही वजह है कि खाद से जुड़ी नकारात्मक खबरों में सहकारिता का नाम तक नहीं आता।

70% खाद वितरण सहकारिता के भरोसे

मंत्री सारंग के अनुसार वर्तमान में मध्यप्रदेश में करीब 70 प्रतिशत खाद वितरण सहकारी सेक्टर के माध्यम से किया जा रहा है। प्राथमिक कृषि साख समितियां (PACS), जिला सहकारी बैंक और मार्कफेड नेटवर्क के जरिए किसानों तक समय पर खाद पहुंचाई जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि व्यवस्था कमजोर होती, तो सबसे पहले सहकारिता पर सवाल उठते, लेकिन शिकायतें निजी नेटवर्क से जुड़ी सामने आती हैं, सहकारिता से नहीं। MARKFED का एडवांस स्टोरेज मॉडल

खाद वितरण को सुचारु बनाने में मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) की भूमिका अहम रही है। मार्कफेड ने एडवांस स्टोरेज और प्री-प्लानिंग की व्यवस्था अपनाई है। इससे सीजन में अचानक दबाव नहीं बना। सप्लाई चेन को सरल और तेज किया गया, यही कारण है कि बोवनी और रबी-खरीफ सीजन में किसानों को खाद के लिए भटकना नहीं पड़ा।

2003 बनाम 2025: सप्लाई–खपत में बड़ा बदलाव

मंत्री सारंग ने 2003 और वर्तमान के आंकड़ों की तुलना करते हुए कहा कि 2003 में खाद की आपूर्ति सीमित थी और खपत भी कम थी। आज खेती का रकबा, उत्पादकता और फसल विविधता बढ़ी है। इसके अनुरूप खाद की सप्लाई और खपत—दोनों में बड़ा इजाफा हुआ है। इसके बावजूद, प्रदेश में सिस्टम फेलियर जैसी स्थिति नहीं बनी, जो सहकारी ढांचे की मजबूती को दर्शाता है।

खबरें आती हैं, पर सहकारिता की नहीं

मंत्री सारंग ने मीडिया कवरेज को लेकर अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि खाद वितरण को लेकर जब भी अव्यवस्था या कालाबाजारी की खबरें आती हैं, उनमें एक भी मामला सहकारिता से जुड़ा नहीं होता। यह सहकारी समितियों की पारदर्शिता और जवाबदेही का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि सहकारिता का उद्देश्य मुनाफा नहीं, बल्कि किसान को समय पर और सही दर पर इनपुट उपलब्ध कराना है।

PACS बनेंगे कमर्शियल बैंक जैसे

सहकारिता के भीतर सबसे बड़ा बदलाव डिजिटल और बैंकिंग सिस्टम को लेकर है। अप्रैल से प्रदेश की सभी 4500 PACS 100% कंप्यूटरीकृत होकर कमर्शियल बैंकों जैसी सेवाएं देने लगेंगी। इससे किसानों को लेन-देन, ऋण और भुगतान में पारदर्शिता और गति मिलेगी।

घपले का असर किसान पर नहीं, सिस्टम पर पड़ेगा मंत्री सारंग ने साफ कहा कि सहकारी संस्थाओं में हुए घपलों का असर किसानों पर नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने संकेत दिए कि जल्द ही ‘किसान न्याय योजना’ लाई जाएगी, ताकि यदि किसी कर्मचारी की गलती या घपला हो, तो उसका नुकसान किसान को न झेलना पड़े। यह बयान सहकारिता में जीरो टॉलरेंस और अकाउंटेबिलिटी की दिशा में अहम माना जा रहा है।



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