नई दिल्ली: रूस में भारत की सरकारी तेल कंपनियों के 60 करोड़ डॉलर यानी करीब 49,84,23,00,000 रुपये फंसे हैं। ऑयल इंडिया (Oil India), इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (Indian Oil Corporation), बीपीसीएल (BPCL) और ओएनजीसी (ONGC) ने रूस में कई तेल और गैस परियोजनाओं में निवेश किया है। इससे उन्हें समय-समय पर डिविडेंड मिलता है। लेकिन फरवरी, 2022 के बाद से वे डिविडेंड का पैसा भारत ट्रांसफर नही कर पा रही हैं। इसकी वजह यह है कि यूक्रेन युद्ध के कारण पश्चिमी देशों ने रूस पर कई तरह की बैंकिंग पाबंदियां लगाई हैं। रूस को स्विफ्ट (SWIFT) से बाहर कर दिया गया है। इस कारण पैसा भारत ट्रांसफर नहीं हो पा रहा है। भारतीय कंपनियां अब इन पैसों से रूसी तेल खरीदने के विकल्प पर विचार कर रही है। साथ ही इन पैसों को स्वदेश लाने के लिए लीगल और डिप्लोमैटिक तरीके भी अपनाए जा रहे हैं।
ऑयल इंडिया के रूस में 1.5 करोड़ डॉलर पड़े हैं। इसी तरह इंडियन ऑयल और बीपीसीएल के भी इतने ही पैसे रूस में अटके हैं। ऑयल इंडिया के चेयरमैन रंजीत रथ ने कहा कि कंपनी रूस में फंसे अपने पैसों के ट्रांसफर के लिए कानूनी, बैंकिंग और राजनयिक तरीकों का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा कि यह एक टेम्पररी समस्या है और कंपनी रूस में अपने निवेश को लेकर पॉजिटिव सोच रखती है। ओपेक प्लस (OPEC+) देशों ने कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती का फैसला किया है। इससे वे ऑयल फील्ड भी प्रभावित हुए हैं जिनमें ऑयल इंडिया का निवेश है।
तेल एक साल के टॉप पर
इस बीच ओपेक प्लस देशों के तेल उत्पादन में कटौती के फैसले से कच्चे तेल की कीमत 93 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई। यह इसका एक साल का उच्चतम स्तर है। ब्रेंट क्रूड गुरुवार को क्रूड की कीमत 1.7 डॉलर की तेजी के साथ 93.7 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। यह पिछले साल नंवबर के बाद इसका उच्चतम स्तर है। यूएस वेस्ट टेक्सस भी 10 महीने के टॉप पहुंच गया। बुधवार को इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने कहा कि सऊदी अरब और रूस ने तेल उत्पादन में कटौती को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। भारत में पिछले साल मई से पेट्रोल और डीजल की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ है।