गौतम अडानी के पास कैश है तो डीबी पावर क्यों नहीं खरीद पाए?

Updated on 16-02-2023 06:58 PM
नई दिल्ली: गौतम अडानी (Gautam Adani) तेजी से अपना कारोबार फैला रहे थे। उनका ग्रुप एक के बाद एक बड़े सौदे कर रहा था। ग्रुप के शेयर रॉकेट की स्पीड से बढ़ रहे थे। अडानी ग्रुप (Adani Group) मार्केट कैप के हिसाब से भारत का सबसे बड़ा कारोबारी घराना बन गया था। अडानी दुनिया के अमीरों की लिस्ट में दूसरे नंबर पर पहुंच गए थे। दावा किया जा रहा था कि ग्रुप के पास कैश की कोई कमी नहीं है। जिस पर हाथ रख दें उसका झोली में गिरना तय है। लेकिन 24 जनवरी को आई एक रिपोर्ट ने सब गुड़गोबर कर दिया। ग्रुप का मार्केट कैप 100 अरब डॉलर से कम आ चुका है। अडानी अमीरों की लिस्ट में 24वें नंबर पर फिसल गए हैं। निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए गौतम अडानी को कई जतन करने पड़ रहे हैं। ग्रुप का कहना है कि उसके पास पैसों की कोई कमी नहीं है। इस बीच खबर आई है कि अडानी ग्रुप ने डीबी पावर (DB Power) को खरीदने का प्लान छोड़ दिया है। सवाल यह है कि जब अडानी ग्रुप के पास पैसों की कोई कमी नहीं है तो फिर उसने इस डील से पीछा क्यों छुड़ाया।

अडानी ग्रुप ने डीबी पावर को 7,017 करोड़ रुपये में खरीदने के लिए पिछले साल 18 अगस्त को एक डील की थी। यह इलेक्ट्रिसिटी सेक्टर में अडानी ग्रुप की दूसरी सबसे बड़ी मर्जर एंड एक्विजिशन डील थी। समझौते के तहत यह डील 31 अक्टूबर, 2022 तक पूरी होनी थी। तब अडानी ग्रुप ने दावा किया था कि उसके पास कैपिटल एक्सपेंडीचर के लिए पर्याप्त कैश है और यह डील समय पर पूरी होगी। लेकिन कई बार इसकी डेडलाइन को बढ़ाया गया था। इसकी फाइनल क्लोजिंग डेट 15 फरवरी थी लेकिन अडानी ग्रुप इस डील को पूरा नहीं कर पाया।

क्यों किया ऐसा फैसला


24 जनवरी को अमेरिकी शॉर्ट सेलिंग फर्म Hindenburg Research की रिपोर्ट आने के बाद अडानी ग्रुप के शेयरों में कोहराम मचा है। ग्रुप के मार्केट कैप में 120 अरब डॉलर से अधिक गिरावट आई है। कई कंपनियों के शेयर 52 हफ्ते के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई है। ग्रुप को अपनी फ्लैगशिप कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज (Adani Enterprises) का एफपीओ (FPO) वापस लेना पड़ा। शेयरों में भारी बिकवाली के कारण ग्रुप ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। अडानी ग्रुप पहले आक्रामक तरीके से अपना विस्तार कर रहा था लेकिन अब इस पर ब्रेक लग गया है।
निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए ग्रुप अपनी फाइनेंशियल कंडीशन को दुरुस्त करने पर जोर लगा रहा है। अडानी ग्रुप अपना कर्ज कम कर रहा है, गिरवी रखे शेयरों को छुड़ा रहा है और कैश बढ़ा रहा है। डीबी पावर की डील से किनारा करना भी इसी रणनीति का हिस्सा है। अडानी पावर की कुल स्थापित क्षमता 13.6 गीगावाट है। कंपनी के सात राज्यों में सात थर्मल प्लांट हैं। साथ ही 40 मेगावाट का एक सोलर प्लांट भी है। 30 सितंबर 2022 के आंकड़ों के मुताबिक कंपनी पर कुल 36,031 करोड़ रुपये का कर्ज है।

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