म्यूचुअल फंड के इनवेस्टरों के लिए खुशखबरी, अब लगेगी इस प्रैक्टिस पर लगाम

Updated on 01-03-2023 09:05 PM
नई दिल्ली: शेयर बाजार के रेगुलेटर SEBI ने इनवेस्टर्स से टोटल एक्सपेंश रेश्यो की वसूली के तरीके में बदलाव करने का प्रस्ताव दिया है। Mutual Fund यूनिटहोल्डर से यह रकम सालाना फी के तौर पर चार्ज करते हैं। इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस फैसले के पीछे SEBI का मकसद ग्राहकों को Mutual Fund में निवेश को लेकर गलत सलाह से बचाना है। इसमें सूत्र के हवाले से कहा गया है कि कैपिटल मार्केट रेगुलेटर यानी SEBI Mutual Funds को इक्विटी या डेट जैसी स्कीम कैटिगरी के एक्सपेंस रेश्यो को एक बराबर रखने के लिए कह सकता है।

इनवेस्टर्स को क्या होगा फायदा


यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो म्यूचुअल फंड इनवेस्टर्स को फायदा होगा। यदि यह प्रस्ताव मान लिए जाता है तो देश के सभी फंड हाउसों को अपने सभी इक्विटी फंडों के लिए एक जैसा एक्सपेंस रेश्यो चार्ज करना होगा। ऐसे में, अगर कोई Mutual Fund 10 स्कीमों में इक्विटी एसेट के तहत 50,000 करोड़ रुपये मैनज करता है, तो उन सभी का एक्सपेंस रेश्यो एक बराबर होना चाहिए। फिलहाल, Mutual Funds के पास योजना के अनुसार इस शुल्क को तय करने की छूट है।

सेबी की नजर में आया


दरअसल, SEBI की नजर में आया है कि हाल के वर्षों में इक्विटी New Fund Offerings (NFOs) में इन्वेस्टमेंट की एक बड़ी रकम मौजूदा स्कीमों से निकाली गई थी। रेगुलेटर को यह आशंका है कि काफी सारे Mutual Fund ब्रोकर और डिस्ट्रीब्यूटर ज्यादा कमीशन पाने के लालच में निवेशकों को मौजूद Mutual Fund से पैसे निकालकर नई स्कीमों में पैसा लगाने का दबाव बनाते हैं। इस संबंध में SEBI ने सवालों का जवाब नहीं दिया।

मिससेलिंग पर भी कसेगा शिकंजा


SEBI के ताजे प्रस्ताव के पीछे की सोच व्यापक है। सेबी का मानना है कि यदि सभी इक्विटी स्कीमों के लिए एक्सपेंस रेश्यो को एक बराबर कर दिया जाता है, तो यह डिस्ट्रीब्यूटर और ब्रोकरों को बेवजह ग्राहकों का पैसा कई सारे स्कीमों या नई स्कीमों में लगवाने से रोकेगा। इस प्रकार मिस सेलिंग पर शिकंजा कसा जा सकेगा। इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक पिछले साल व्यापक स्तर पर इंडस्ट्री के एसेट अंडर मैनेजमेंट की 20 फीसदी से अधिक रकम महंगे NFO में लगाई गई।

अभी क्या हो रहा है


फिलहाल, Mutual Fund प्रॉडक्ट के हिसाब से एक्सेंस रेश्यो चार्ज करते हैं जिसमें मैनेजमेंट फी, मार्केटिंग फी और डिस्ट्रीब्यूटर कमिशन सहित दूसरे खर्च शामिल होते हैं। इक्विटी के भीतर, यह लार्ज-कैप, फ्लेक्सी-कैप और मिड-कैप जैसी स्कीम कैटिगरी के लिए अलग-अलग है। इसके अलावा, एक्सपेंस रेश्यो फंड के आकार और प्रकार जैसे दूसरे फैक्टर पर भी निर्भर करता है। पुराने इक्विटी मनी के लिए ट्रेल फी करीब 0.25% है, जबकि हाल के NFO के मामले में, यह 1.5% तक था। Mutual Fund निवेश को बनाए रखने के बदले जो कमिशन देते हैं उसे ट्रेल कमिशन कहा जाता है।

अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 20 June 2026
मुंबई: भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) में इस बार तगड़ी वाली गिरावट देखी गई है। एक ही सप्ताह के दौरान विदेशी मुद्रा भंडार से करीब 10 अरब डॉलर…
 20 June 2026
नई दिल्ली: थर्मल पावर प्लांट से निकली राख ( Fly Ash ) कभी पावर प्लांट के लिए सर दर्द का सबब था। लेकिन जबसे इसका उपयोग सड़क बनाने, सीमेंट या…
 20 June 2026
नई दिल्‍ली: साफ-सुथरी ऊर्जा की ओर दुनिया का झुकाव अब एक ज्‍यादा मुश्किल और अनिश्चित दौर में पहुंच रहा है। जियोपॉलिटिकल टेंशन, सप्लाई चेन में रुकावटें और एनर्जी सिक्‍योरिटी की…
 20 June 2026
नई दिल्ली: स्मार्टफोन और पैसेंजर वीकल्स की लगातार बढ़ती कीमतों के कारण बड़ी संख्या में भारतीय कंस्यूमर्स अब रीफर्बिश्ड और सेकंड हैंड सामानों की ओर रुख कर रहे हैं। मोबाइल…
 19 June 2026
नई दिल्ली: एंप्लॉयीज प्रॉविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (EPFO) के 7 करोड़ से अधिक सदस्य UPI और ATM के जरिए अपने पीएफ अकाउंट से फंड निकाल सकेंगे। सरकारी सूत्रों ने गुरुवार को…
 19 June 2026
नई दिल्ली: नेचुरल गैस (एलएनजी) एक्‍सपोर्ट में अमेरिका ने अपनी पकड़ मजबूत की है। पश्चिम एशिया के बीच संकट के दौर में उसे ऐसा करने का मौका मिला। ग्‍लोबल मार्केट…
 19 June 2026
 पश्चिम एशिया में युद्ध पर फिलहाल विराम है। लेकिन युद्ध की वजह से हुए नकुसान की भरपायी के लिए ईरान ने होर्मुज पर टोल वसूलने का संकेत दिया है। इससे…
 19 June 2026
नई दिल्ली: कोरोना महामारी के बाद भारत व्हिस्की की बिक्री में आई उछाल अब धीमी पड़ती दिख रही है। देश में विदेशी व्हिस्की की बिक्री की ग्रोथ 2025 में लगातार…
 16 June 2026
नई दिल्ली: हाल में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय बाजार से काफी पैसा निकाला है। इससे रुपये पर दबाव बढ़ा है और उसमें गिरावट आई है। इस बीच आरबीआई ने…
Advt.