श्वानों को लेकर सजग नहीं सरकार, जनता हो रही हमले का शिकार

Updated on 15-01-2024 01:08 PM

भोपाल। मप्र में बीते तीन वर्षों से अवारा पशुओं को लेकर बिल मंत्रिपरिषद की मुहर लगने के लिए अटका हुआ है। पशुओं को लेकर ठोस कानून नहीं होने से नगरीय निकाय भी इनके खिलाफ कार्रवाई में लापरवाही बरत रहे हैं। यही कारण है कि सड़कों में अवारा श्वानों की संख्या बढ़ती जा रही है। अब ये श्वान जनता के लिए खतरनाक होते जा रहे हैं। जिससे शहर में श्वानों की घटनाएं भी बढ़ती जा रही है। बीते एक वर्ष के अंदर भोपाल में ऐसी दो हजार से अधिक घटनाएं हो चुकी हैं, इस दौरान दो मासूमों को जान भी गंवाना पड़ गया। इसके बावजूद सरकार इस कानून को लेकर असंवेदनशील है।

प्रस्तावित विधेयक में ये प्रविधान

बता दें कि नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय द्वारा पालतू पशुओं के संबंध में पालिसी बनाकर अनुमोदन के लिए राज्य सरकार के पास भेजी गई है। इसके तहत अब मप्र में सभी पालतू पशुओं का पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। हर वर्ष इनका नवीनीकरण कराना होगा। तीन बार से अधिक पालतू पशुओं की शिकायत मिलने पर मालिक से नगरीय निकाय बांड भरवाएंगे। यदि इसके बाद भी कुत्ता-बिल्ली या अन्य जानवर किसी को काटते हैं, या नुकसान पहुचाते हैं। तो इन्हें पशु मालिक से छुड़ाकर डाग शेल्टर होम या गौ अभयारण्य भेजा जाएगा। साथ ही इनका पंजीयन भी निरस्त कर दिया जाएगा। यदि ये बिल पास हो जाता है, तो नगरीय निकायों के पास भी अवारा पशुओं के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार होगा। अभी पशु प्रेमी कार्रवाई में रुकावट बनते हैं। जिससे गली और मोहल्लों में श्वानों की संख्या बढ़ रही है और ये रहवासियों को अपना शिकार बना रहे हैं।

पालतू पशुओं का पंजीकरण होगा अनिवार्य

नगरीय निकायों में पालतू श्वानों की पहचान के लिए आवश्यक दस्तावेज़ जमा करना होगा। इसमें उनकी फोटो, जाति, उम्र और अन्य विवरण शामिल होंगे। इसके बाद स्थानीय नगर पालिका कार्यालय या नगर निगम में जाकर पंजीकरण फार्म भरना होगा। इसमें जानवरों की जानकारी जैसे उम्र, रंग, जाति और स्वास्थ्य से संबंधित विवरण भरने होंगे। जानवरों की पहचान के लिए टैग लगाने की योजना भी है।

बिल लागू हो, तो श्वानों का बनेगा स्वास्थ्य रिकार्ड

नए नियम के अनुसार जो भी व्यक्ति शहरी क्षेत्रों में श्वान पालते हैं, उन्हें अपने और उनके पिता का नाम, पता, पशुओं की संख्या, प्रकार, उनके पानी, प्रकाश और मल निष्कासन की व्यवस्था जानकारी प्रदान करनी होगी। इस नियम का मुख्य उद्देश्य यह है कि प्रत्येक पालतू जानवर का स्वास्थ्य रिकार्ड उपलब्ध हो, जिससे उनका स्वास्थ्य और व्यवहार अच्छी तरह से निगरानी किया जा सके। वहीं अवारा श्वानों को शेल्टर होम भेजा जा सके।

पंजीकरण के 150, तो नवीनीकरण का 50 रुपये शुल्क

यदि पंजीकरण तथा आवारा पशुओं का नियंत्रण नियम 2023 लागू होता है, तो श्वान पालकों को 150 रुपये पंजीकरण शुल्क चुकाना होगा। वहीं नवीनीकरण के लिए 50 रुपये हर वर्ष शुल्क देना होगा। इस राशि को उन श्वानों पर खर्च किया जाएगा, जो सड़कों पर अवारा हैं। इनके लिए शेल्टर होम बनाने और आवश्यक सुविधाएं जुटाने में होगा। नए नियम के तहत अगर आपका पालतू श्वान बाहर घूमता पाया गया या किसी को काट लिया तो इसको भी अपराध के रूप में अंकित किया गया है। जिसके लिए भी दंड की राशि देने के साथ ही उस जानवर का पंजीयन निरस्त करने और मालिक से बांड भराने का प्रविधान है।

नगर निगम की टीम ने आठ श्वानों का पकड़ा

बीते 10 जनवरी को मिनाल रेसीडेंसी के पास अवारा श्वानों द्वारा छह माह के मासूम को काटने से मृत्यु हो गई है। इसके बाद नगर निगम द्वारा शहर में अवारा श्वानों को पकड़ने की कार्रवाई तेज कर दी गई है। शनिवार को नगर निगम की टीम ने जहां 52 श्वानों को पकड़ा था, वहीं रविवार को आठ श्वान पकड़े गए हैं।

इनका कहना

यदि बिल लागू हो जाए, तो नगरीय निकायों के पास कार्रवाई के पूरे अधिकार होंगे। अभी श्वान प्रेमी कार्रवाई में बाधा उत्पन्न करते हैं, इसलिए भी प्रशासन लापरवाही बरतता है।

- रितेश पांडे, आनंद नगर

शहर में अवारा श्वानों के लिए शेल्टर होम नहीं है। जिसकी वजह से सड़कों पर श्वानों की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में नगर निगम श्वानों को एक जगह से पकड़कर दूसरे जगह छोड़ देता है।

- नितिन सक्सेना, अशोका गार्डन

शहर में जिस प्रकार श्वान रहवासियों पर हमले कर रहे हैं, ऐसे में सरकार को सख्ती से कानून को लागू करना चाहिए। निकायों की लापरवाही से डाग बाइट की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं।

                                                                                                                - सुयश कुलश्रेष्ठ, एमपी नगर

पंजीकरण तथा आवारा पशुओं का नियंत्रण नियम 2023 बनकर तैयार है। इसे पास कराने के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन के पास भेजा है। मंत्री परिषद की मुहर लगते ही लागू हो जाएगा।

                                                                                                         - भरत यादव, आयुक्त नगरीय प्रशासन

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