नॉमिनी है मां तो पत्नी-बच्चों को भी नहीं मिलेगा एक पैसे का क्लेम , जान लीजिए NCDRC का आर्डर

Updated on 01-08-2023 01:45 PM
नई दिल्ली: किसी भी व्यक्ति के इस जहां में नहीं रहने पर उसके जीवनसाथी और बच्चों का पूरा अधिकार उनकी संपत्ति पर होता है। लेकिन यह बात बीमा पॉलिसी (Insurance Policy) पर लागू नहीं होता। यदि किसी व्यक्ति ने अपनी जीवन बीमा की पॉलिसी में नॉमिनी के कॉलम में मां या किसी अन्य व्यक्ति का नाम दे दिया है तो उसका क्लेम मां या उसी व्यक्ति को ही मिलेगा। भले ही क्लेम पत्नी और बच्चों की तरफ से क्यों नहीं किया गया हो। यह फैसला राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग (NATIONAL CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, NEW DELHI) का है।
क्या है मामला
यह मामला राज्य उपभोक्ता फोरम, चंडीगढ़ का है। वहां से आए फैसले के खिलाफ भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) ने एनसीडीआरसी (NCDRC), दिल्ली में रिवीजन पिटिशन दायर किया था। मामला स्वर्गीय अमरदीप सिंह से जुड़ा है। उन्होंने अपने जीवन काल में एलआईसी से तीन इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी। उस समय उनकी शादी भी नहीं हुई थी। इसलिए नॉमिनी के कॉलम में मां का नाम दिया था। बाद में उनकी शादी हुई और बच्चे भी हुए। लेकिन उन्होंने नॉमिनी चेंज नहीं किया। जब उनका निधन हुआ तो एलआईसी ने नियमानुसार नॉमिनी यानी कि मृतक की मां को क्लेम का भुगतान कर दिया। हालांकि, मृतक की पत्नी ने एलआईसी को कहा था उनके कानूनी वारिश यानी की पत्नी और नाबालिग बच्चे मौजूद हैं। इसलिए क्लेम के भुगतान में उनका भी यान रखा जाए। पर एलआईसी ने मां को ही शत प्रतिशत राशि का भुगतान कर दिया।

पत्नी पहुंचा उपभोक्ता फोरम


एलआईसी के इस कार्रवाई से खफा मृतक की पत्नी और बच्चों ने जिला उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया। जिला फोरम ने सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए 15 नवंबर 2019 को अपना फैसला सुनाया। इस फैसले में कहा गया कि तीनो पॉलिसी का कुल क्लेम 15,09,180 रुपये का है। इसे तीन हिस्सों में बांटा जाए। मतलब कि मृतक की मां, पत्नी और बच्चे को 5,03,060 रुपये की रकम बराबर-बराबर मिले। एलआईसी को 9 फीसदी सालाना ब्याज का भी भुगतान करने को कहा गया। इसके साथ ही एलआईसी मृतक की पत्नी को मानसिक परेशानी के हर्जाने के रूप में 20 हजार रुपये और मुकद्मे के खर्चे के लिए 10 हजार रुपये का भी भुगतान करे।

एलआईसी पहुंची स्टेट कमिशन
जिला उपभोक्ता फोरम के फैसले के खिलाफ एलआईसी चंडीगढ़ के स्टेट फोरम में वाद दायर किया। वहां भी सभी तथ्यों को ध्यान से सुना गया। लेकिन वहां भी फैसला मृतक की पत्नी और बच्चों के हक में भी आया। मृतक की मां को तो कुछ पैसे देने का आदेश हुआ ही, लेकिन साथ में पत्नी और बच्चों का भी ध्यान रखने को कहा गया।

राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया गया
इसके बाद एलआईसी ने NATIONAL CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, NEW DELHI का दरवाजा खटखटाया। वहां डॉ इन्द्रजीत सिंह की अध्यक्षता वाली पीठ ने सभी तथ्यों पर गौर कर 19 जुलाई 2023 को अपना आर्डर सुनाया। इसमें कहा गया कि बीमा पॉलिसी लेने के बाद मृतक की शादी हुई। उसके बाद भी नॉमिनी का नाम नहीं बदला गए। ऐसे में एलआईसी ने विद्यमान नियमों के आधार पर सही व्यक्ति को क्लेम का भुगतान किया है। इसके साथ ही उन्होंने जिला उपभोक्ता फोरम और स्टेट कमिशन के फैसले को खारिज कर दिया।

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