इजरायल-हमास की वजह से अगर हुआ तीसरा विश्‍व युद्ध तो भारत को होगा बड़ा नुकसान, विशेषज्ञ से समझें

Updated on 23-10-2023 02:28 PM
तेल अवीव: सात अक्‍टूबर को फिलिस्‍तीन के आतंकी संगठन फिलिस्‍तीन ने इजरायल पर अचानक बोल दिया। इस हमले के बीच इजरायल ने बदला लेने की ठान ली है। इजरायल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) ने तब ऐलान कर दिया है कि जब तक हमास के हर आतंकी को मौत के घाट नहीं उतार दिया जाता, वह चैन से नहीं बैठेंगे। दोनों तरफ अब तक करीब 5000 लोगों की मौत हो चुकी है। हालातों को देखने के बाद अब दुनिया में विशेषज्ञों को इस बात का डर सताने लगा है कि कहीं दुनिया तीसरे विश्‍व युद्ध की तरफ तो नहीं बढ़ रही है।

भारत का दोस्‍त इजरायल
अगर यह युद्ध हुआ तो फिर भारत, जो इजरायल का करीबी दोस्‍त है और फिलिस्‍तीन के साथ भी रणनीतिक संबंधों को संतुलित करने में लगा है, उस पर भी असर पड़ सकता है। दुनियाभर के कई देश इजरायल-हमास जंग पर अपना रुख प्रदर्शित करने लगे हैं। इस जंग में कई ऐसी बातें हो रही हैं जो इसे विश्‍व युद्ध में बदलने के लिए काफी हैं। ईरान और लेबनान के आतंकी समूह पहले से ही फिलिस्तीन और हमास को इजरायल के खिलाफ युद्ध जीतने में मदद करने के लिए कदम बढ़ा रहे हैं। अब उम्मीद है कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी अमेरिका और यूके जैसे कई देशों के साथ अपने अच्छे संबंधों का उपयोग करेंगे।

गाजा में बढ़ेंगे घायल
इजरायल के हमलों में गाजा में घायलों की संख्‍या में भी इजाफा होगा, यह तय है। इसकी वजह से कई अरब देश जैसे मिस्र, सीरिया, सऊदी अरब और बाकी देशों की तरफ से भी तीखी प्रतिक्रिया आएगी। इन देशों ने पहले भी फिलिस्तीन का ही समर्थन किया है। अमेरिकी सरकार पहले से ही युद्ध के पीड़ित के तौर पर इजरायल को हथियार और मदद देती आ रही है। लेकिन अरब देशों के इजरायल पर एकजुट होने के बाद इसमें और अधिक भागीदारी दिखाई देने की संभावना है। भारत, जो इजरायल का सदियों पुराना मित्र है, वह भी अपनी सुरक्षा और सेना की पेशकश करके कदम उठाने के लिए तैयार है।

भारतीय सैनिकों पर असर
इजरायल-लेबनान सीमा पर UNIFIL लाइन पर पहले से ही 900 भारतीय सैनिक मौजूद हैं। अगर यह संघर्ष तीसरे विश्व युद्ध में बदल जाता है तो वे आग की सीधी रेखा में होंगे। अगर तृतीय विश्‍व युद्ध की स्थिति होती है। भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगने की उम्मीद है मारा क्योंकि उसे इजरायल के साथ द्विपक्षीय संबंध बनाए रखने के लिए हथियार, भोजन और स्वास्थ्य देखभाल सामग्री भेजनी होगी। इसके अलावा, वैश्विक मुद्रास्फीति और कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा भी भारतीय अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव छोड़ेगी। इसका अर्थ है कि तेल की कीमतें अब तक के उच्चतम स्तर पर होंगी और बुनियादी चीजें भी महंगी होंगी और मुश्किल से मिल सकेंगी।


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