दुबई एयरशो में गरजा भारत का तेजस जेट, ब्रह्मोस के साथ धमाकेदार एंट्री, मुस्लिम देशों में धाक जमा पाएंगे? पाकिस्‍तान की नजर

Updated on 18-11-2025 02:17 PM
दुबई: भारत ने ब्रह्मोस मिसाइलों से लैस तेजस लड़ाकू विमानों को दुबई एयरशो-2025 में उतार दिया है। भारत की कोशिश अपने डिफेंस एक्सपोर्ट को उड़ान देने की है। दुबई एयरशो में ब्रह्मोस और तेजस को भेजने का भारत का मकसद ना सिर्फ संयुक्त अरब अमीरात के साथ अपने संबंधों को और गहरा करना है, बल्कि भारत खुद को खाड़ी, एशियाई और अफ्रीकी रक्षा बाजारों में एक उभरते आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करना चाहता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, डीआरडीओ और निजी फर्मों और स्टार्ट-अप्स के समूह के साथ भारतीय वायु सेना की सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम और एलसीए तेजस लड़ाकू विमान दुबई एयरशो में अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करेगें। जिससे यह संकेत मिलता है कि नई दिल्ली, दुबई एयरशो को काफी गंभीरता से ले रहा है। ब्रह्मोस मिसाइल ने पाकिस्तान के खिलाफ अपनी जबरदस्त क्षमता का प्रदर्शन किया था। जिससे ब्रह्मोस अब युद्ध में साबित हो चुकी मिसाइल बन चुकी है।
दुबई एयरशो से खाड़ी के बाजार में कर पाएंगे एंट्री?
दुबई एयरशो खाड़ी, अफ्रीका और दक्षिण एशिया के चौराहे पर स्थित है। इस एयरशो में अलग अलग देशों के एक हजार से ज्यादा ऑब्जर्वर्स, डिफेंस एक्सपर्ट्स और सीनियर प्रतिनिधिमंडल आते हैं। भारत कई वर्षों के रिकॉर्ड रक्षा निर्यात और दशक के अंत तक इसे लगभग दोगुना करने के आधिकारिक लक्ष्य के साथ यहां पहुंचा है। भारत की नीति मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड पर आधारित है। इसके अलावा भारत और यूएई ने आर्थिक साझेदारी, समुद्री सुरक्षा, एयरोस्पेस और टेक्नोलॉजी में बढ़ते सहयोग के साथ अपने संबंध काफी गहरे कर लिए हैं। इसीलिए दुबई एयरशो, अफ्रीका और दक्षिण एशिया को जोड़ने वाला भारत के लिए सबसे बड़ा एयरोस्पेस मंच बन गया है। भारत के लिए न सिर्फ संभावित खरीदारों से जुड़ने का अवसर है, बल्कि भारत को पश्चिमी आपूर्तिकर्ताओं के विकल्प के रूप में उभरती शक्ति के रूप में स्थापित करने का मौका भी देता है।तेजस फाइटर जेट को मिल पाएगा कोई ग्राहक?
दुबई एयरशो में भारत का सबसे प्रमुख आकर्षण LCA Tejas Mk 1A है, जिसे भारत ने एक कॉम्पैक्ट 4.5-जनरेशन मल्टीरोल फाइटर के रूप में पेश किया है। GE F404 इंजन से संचालित यह सिंगल इंजन जेट करीब Mach 1.8 की स्पीड, 16,000 मीटर से ज्यादा सर्विस सीलिंग और डेल्टा-विंग डिजाइन की वजह से उच्च गतिशीलता प्रदान करता है। इसमें नौ हार्डप्वाइंट पर 5 टन से ज्यादा हथियार उठाने की क्षमता है, जो इसे हल्के लेकिन घातक प्लेटफॉर्म की श्रेणी में मजबूती से स्थापित करती है।
AESA रडार, स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट, BVR मिसाइलें और कम ऑपरेटिंग लागत इसे उन देशों के लिए आकर्षक विकल्प बनाते हैं जो भारी ट्विन-इंजन फाइटर खरीदने में सक्षम नहीं हैं। मलेशिया, अर्जेंटीना और मिस्र जैसे देशों ने पहले भी रुचि दिखाई है, जबकि खाड़ी, दक्षिण–पूर्व एशिया और अफ्रीका में इसे पॉइंट-डिफेंस फाइटर और लीड-इन ट्रेनर के रूप में मजबूत संभावनाएं हैं। हालांकि, इंजन डिलीवरी को लेकर अमेरिका पर निर्भरता भारत की निर्यात संभावनाओं को झटका देता है।
ब्रह्मोस... पूरी दुनिया जानती है पाकिस्तान का हाल
ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल क्या कर सकती है, ये पाकिस्तान से बेहतर भला और कौन समझ सकता है। BrahMos सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल भारत–रूस संयुक्त उत्पादन का सबसे सफल मॉडल बन चुकी है। Mach 2.8–3 की स्पीड, sea-skimming क्षमता, 290 किमी के आसपास की निर्यात रेंज और 200–300 किलोग्राम के वारहेड के साथ ब्रह्मोस मिसाइल, किसी भी देश को समुंदर और तटीय सुरक्षा को जबरदस्त बढ़त देती है। दुनिया में अभी ऐसा एयर डिफेंस सिस्टम नहीं बना है जो ब्रह्नोस मिसाइल को ट्रैक और इंटरसेप्ट कर ले। चाहे वो देश अमेरिका हो या चीन, वो ब्रह्नोस को नहीं रोक सकते हैं। इसीलिए फिलीपींस ने भारत से खरीदकर इसे दक्षिण चीन सागर में चीन के खिलाफ तैनात कर दिया है।
इसीलिए फिलीपींस को किया गया ब्रह्मोस निर्यात, और उसकी सफल डिलीवरी से भारत ने साबित कर दिया है कि जटिल मिसाइल सिस्टम का उत्पादन, आपूर्ति और समर्थन करने की क्षमता अब भारत के पास है। यही वजह है कि वियतनाम, इंडोनेशिया और खाड़ी देश ब्रह्मोस मिसाइल को लेकर गहरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। तेजस, अस्त्र BVR मिसाइल, सरफेस टू एयर मिसाइल, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम, नेत्र AEW&C, TAPAS UAV और HTT–40 ट्रेनर जैसे प्लेटफॉर्म मिलकर यह दिखाते हैं कि भारत अब सिर्फ एकल हथियार नहीं, बल्कि संपूर्ण एयर-डिफेंस और कमांड–कंट्रोल इकोसिस्टम निर्यात करने में सक्षम है।

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