इन्फोसिस की मुश्किलें बढ़ी, अमेरिका में दर्ज हुआ मुकदमा, जानिए क्या है मामला
Updated on
24-08-2024 05:44 PM
नई दिल्ली: देश की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी इन्फोसिस की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। अमेरिकी की दिग्गज सॉफ्टवेयर कंपनी कॉग्निजेंट ने इन्फोसिस के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि इन्फोसिस ने उसकी हेल्थ टेक सब्सिडियरी ट्राइजेटो से संबंधित जानकारी चुराई है। शिकायत के मुताबिक इन्फोसिस ने ट्राइजेटो के साथ किए गए समझौतों की आड़ में उसकी प्रोप्राइटरी सॉफ्टवेयर ऑफरिंग और संबंधित तकनीकी दस्तावेजों को एक्सेस किया। इन समझौतों का मकसद इन्फोसिस को कुछ ऐसे क्लाइंट्स के लिए काम पूरा करने की अनुमति देना था जो ट्राइजेटो के ग्राहक भी थे। कॉग्निजेंट ने साल 2014 में 2.7 अरब डॉलर में हेल्थकेयर टेक फर्म ट्राइजेटो को खरीदा था।
ट्राइजेटो ने जूरी ट्रायल की मांग की है। साथ ही उसका कहना है कि इन्फोसिस और उसके सहयोगियों को ट्राइजेटो की ट्रेड सीक्रेट इनफॉरमेशन का इस्तेमाल करने से रोका जाए। इसके अतिरिक्त ट्राइजेटो ने मुआवजे की भी मांग की है जिसकी रकम ट्रायल में तय की जाएगी। कंपनी ने अपनी शिकायत में कहा है कि इन्फोसिस ने एग्रीमेंट्स का उल्लंघन करते हुए ट्राइजेटो के ट्रेड सीक्रेट्स का दुरुपयोग किया है। कंपनी ने अपने फायदे के लिए ट्राइजेटो की गोपनीय जानकारी चुराई है। इससे ट्राइजेटो को गंभीर और अपूरणीय क्षति हुई है। इस बारे में कॉग्निजेंट को भेजे गए ईमेल का प्रेस में जाने तक कोई जवाब नहीं आया।
कंपनी ने क्या कहा
इस बीच इन्फोसिस ने कहा कि उसे इस मुकदमे की जानकारी है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि हम सभी आरोपों से इनकार करते हैं और अदालत में अपनी स्थिति का बचाव करेंगे। पिछले एक दशक में, इन्फोसिस ने ट्राइजेटो के साथ कम से कम सात एनडीएए पर हस्ताक्षर किए हैं। इनमें ट्राइजेटो को अपनी गोपनीय जानकारी का एकमात्र ऑनर माना गया है। पिछले सत्र में कंपनी का शेयर बीएसई पर 0.94% गिरावट के साथ 1862.35 रुपये पर बंद हुआ।
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