7 महीने में ईरान ने 14 लाख अफगानी जबरन निकाले:मारा-पीटा, पैसे छीने

Updated on 18-07-2025 01:59 PM

ईरान में जनवरी से अब तक 14 लाख से ज्यादा अफगानों को जबरन निकाल दिया गया है। संयुक्त राष्ट्र (UN) की शरणार्थी एजेंसी के मुताबिक ईरान और अफगानिस्तान की सीमा पर हर दिन करीब 20 हजार अफगान शरणार्थी जबरन वापस भेजे जा रहे हैं।

ये सिलसिला पिछले महीने ईरान-इजराइल के बीच 12 दिन के युद्ध के बाद तेजी से बढ़ा। ईरान ने 24 जून से 9 जुलाई के बीच, यानी महज 16 दिनों में 5 लाख से ज्यादा अफगान नागरिकों को देश से बाहर कर दिया।

ईरान ने मार्च 2025 में ऐलान किया था कि अवैध रूप से रह रहे अफगान प्रवासी 6 जुलाई तक देश छोड़ दें, नहीं तो उन्हें जबरन निकला जाएगा। ईरानी अधिकारियों ने दावा किया कि अफगानी इजराइल और अमेरिका के लिए जासूसी, आतंकी हमले और ड्रोन बनाने में शामिल हैं।

कई अफगानों ने मीडिया को बताया की उनके साथ मार-पीट की गई और पैसे भी छीन लिए गए। वहीं, कई नाबालिग बच्चों को बिना बड़ों के ही अफगानिस्तान भेज दिया गया।

शरणार्थी बोले- हमें कूड़े की तरह फेंक दिया गया

न्यूयॉर्क टाइम्स को लोगों ने बताया कि उनके पास न तो पर्याप्त सामान है और न ही भविष्य की कोई उम्मीद। 42 साल तक ईरान में मजदूरी करने वाले मोहम्मद अखुंदजादा ने कहा, "मैंने 42 साल तक ईरान में मेहनत की, मेरे घुटने टूट गए और अब मुझे क्या मिला?"

ईरान से निर्वासित हुए एक अफगान शरणार्थी बशीर ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि अधिकारियों ने उससे 17 हजार रुपए मांगे। फिर दो दिन डिटेंशन सेंटर में रखा। इस दौरान न खाना दिया गया और न ही पानी। बशीर के मुताबिक अधिकारी उसे गालियां देते थे।

एक दूसरे युवक ने बताया कि उसके पिता को जासूसी के आरोप में पकड़कर कैद कर दिया गया। उन्हें खाना-पानी नहीं दिया गया और बाद में डिटेन करके अफगानिस्तान भेज दिया।

द गार्जियन से बात करते हुए एक अफगान महिला ने बताया कि, ईरानी अधिकारी रात में आए। उन्होंने बच्चों के कपड़े तक नहीं लेने दिए। हमें कूड़े की तरह फेंक दिया। रास्ते में बैंक कार्ड से पैसे निकाल लिए। पानी की बोतल के 80 रुपए और सैंडविच के 170 रूपए वसूले।

ईरान में अफगानों के खिलाफ नस्लीय हमले बढ़े

इजराइल के साथ युद्ध के बाद ईरान में अफगानों के खिलाफ नस्लीय हमले बढ़ गए हैं। कई अफगानों ने बताया कि उन्हें गालियां दी गईं, चाकू से हमले हुए और उनकी मजदूरी तक छीन ली गई।

बैंकों, स्कूलों, अस्पतालों और दुकानों ने भी अफगानों को सेवा देने से मना कर दिया है। एब्राहिम कादेरी ने मीडिया को बताया कि वो तेहरान में एक कार्डबोर्ड फैक्ट्री में काम करते थे, वहां कुछ लोगों ने उन्हें गंदा अफगान कहकर पीटा और चाकू से घायल कर दिया।

उनकी मां गुल दास्ता फजिली ने कहा कि चार अस्पतालों ने उनके बेटे का इलाज करने से इनकार कर दिया, क्योंकि वह अफगान था। 35 साल की फराह, जो तेहरान में कंप्यूटर इंजीनियर हैं, ने बताया कि पड़ोस के युवकों ने उन पर और उनके 4 साल के बेटे पर हमला किया।

बिना मां-बाप के नाबालिगों को निकाल रहा ईरान

ईरान से निकाले गए लोगों में सैकड़ों नाबालिग बच्चे हैं, जिनमें कई अनाथ और अकेले हैं। UN के अनुसार, हर हफ्ते सैकड़ों बच्चों को बिना अभिभावकों के सीमा पर पाया जा रहा है।

अफगानिस्तान के पश्चिमी सीमा पर इस्लाम कला नामक शहर में एक भीड़भाड़ वाला प्रोसेसिंग सेंटर है, जहां निकाले गए लोगों को रखा जा रहा है।

इन शरणार्थियों की वापसी से अफगानिस्तान की पहले से खराब अर्थव्यवस्था और बिगड़ रही है। ईरान में रहने वाले अफगान अपने परिवारों को पैसा भेजते थे, जो अब बंद हो गया है।

अफगानिस्तान की 4.1 करोड़ आबादी में से आधी से ज्यादा पहले ही मानवीय सहायता पर निर्भर है। बेरोजगारी, आवास और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी ने हालात को और गंभीर बना दिया है।

इस्लाम कला में हर दिन 20,000 से 25,000 लोग सीमा पार कर रहे हैं। अफगान अधिकारियों और संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियां मदद करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन संसाधनों की भारी कमी है।

लोग घंटों कतार में खड़े होकर रजिस्ट्रेशन और कुछ आपातकालीन नकद सहायता ले रहे हैं।



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