मौत का सौदागर, ईरान... पाकिस्तानी परमाणु वैज्ञानिक AQ खान ने बेचा न्यूक्लियर ब्लूप्रिंट, CIA एजेंट 'मैड डॉग' का बड़ा खुलासा

Updated on 24-11-2025 02:13 PM
वॉशिंगटन: अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के पूर्व अधिकारी जेम्स लॉलर ने पाकिस्तान के परमाणु जनक एक्यू खान को लेकर कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं। जेम्स लॉलर अमेरिका के वो अधिकारी हैं, जिन्हें पाकिस्तान और अब्दुल कदीर खान (एक्यू खान) के न्यूक्लियर स्मगलिंग नेटवर्क को खत्म करने का क्रेडिट किया जाता है। उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए पाकिस्तान के खिलाफ चलाए गये अपने सीक्रेट ऑपरेशन को लेकर सनसनीखेज खुलासे किए हैं। उन्होंने खुलासा किया है कि आखिर कैसे उन्हें "मैड डॉग" निकनेम दिया गया और उन्होंने एक्यू खान को "मर्चेंट ऑफ डेथ" यानि 'मौत का सौदागर' कहना क्यों शुरू कर दिया।

CIA के काउंटर-प्रोलिफरेशन डिवीजन के पूर्व प्रमुख ने समाचार एजेंसी ANI के साथ एक इंटरव्यू में पाकिस्तानी वैज्ञानिक से जुड़े ग्लोबल न्यूक्लियर ट्रैफिकिंग नेटवर्क को उजागर करने और उन्हें नाकाम करने में अपनी भूमिका के बारे में विस्तार से बताया है। उन्होंने खुलासा करते हुए कहा कि अमेरिका कई सालों तक यह समझ ही नहीं पाया कि असल में पाकिस्तान के लिए परमाणु बम बनाने के बाद एक्यू खान असल में परमाणु ब्लूप्रिंट की तस्करी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक्यू खान कुछ देशों को न्यूक्लियर ब्लूप्रिंट, उससे कुछ बेहद संवेदनशील तकनीक और कुछ पुर्जे अन्य देशों को बेच रहे थे।
पाकिस्तानी वैज्ञानिक पर सनसनीखेज खुलासा
सीआईए के पूर्व अधिकारी लॉयलर ने खुलासा करते हुए कहा कि पाकिस्तान सेना के कई जनरल और नेता, असल में AQ खान के पेरोल पर थे। हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि पाकिस्तान की सरकार की ये आधिकारिक नीति नहीं थी। लॉयलर ने खुलासा करते हुए समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि उनका काउंटर-प्रोलिफरेशन करियर यूरोप में एक ऐसे देश से शुरू हुआ, जहां वे परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश करने वाले देशों द्वारा मांगी जाने वाली कई तकनीकों का पीछा कर रहे थे। 1994 में CIA मुख्यालय लौटने के बाद उन्हें यूरोप डिविजन के काउंटर-प्रोलिफरेशन ऑफिस का नेतृत्व सौंपा गया और इसके बाद उन्हें ईरान के परमाणु कार्यक्रम में सेंध लगाने का काम दिया गया।लॉयलर ने कहा कि उन्होंने इस नेटवर्क का भांडाफोड़ करने के लिए खुद अपनी नकली कंपनी बनाई और ऐसे लोगों से कॉन्टेक्ट करना शुरू किया, जो तकनीक और परमाणु पुर्जे बेचने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने एएनआई को बताया कि अमेरिका में 9/11 हमले के बाद एक्यू खान के नेटवर्क को पकड़ने के लिए तेजी से कोशिशें शुरू हो गई, क्योंकि एक्यू खान के नेटवर्क में लीबिया भी शामिल था और लीबिया में आतंकवादी तेजी से विस्तार कर रहे थे और सरकार का उन्हें समर्थन हासिल था। लीबिया बम की डिजाइन खरीदने की कोशिश कर रहा था। लॉयलर ने BBC China नाम के एक जहाज को रोकने का जिक्र किया जिसमें "लाखों परमाणु पुर्जे" मौजूद थे। बाद में जब अमेरिकी प्रतिनिधियों ने जब्त सामग्री लीबियाई अधिकारियों के सामने रखी तो उस वक्त कमरे में सन्नाटा छा गया।
ईरान और लीबिया तक परमाणु तस्करी
अमेरिका के प्रेशर के बाज लीबिया ने अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से नष्ट कर दिया। लेकिन एक्यू खान का नेटवर्क ईरान को P1-P2 सेंट्रीफ्यूज तकनीक, मिसाइल सिस्टम और चीन का परमाणु बम ब्लूप्रिंट सौंप चुका था। लॉयलर ने हालांकि इस बात को माना कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ जिस हद तक की सख्ती उसके न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर बरती है, उतना पाकिस्तान के खिलाफ नहीं, क्योंकि अमेरिका को पाकिस्तान से अफगानिस्तान युद्ध में मदद चाहिए थी। लेकिन अमेरिका का पाकिस्तान को लेकर आंखें मूंदना, आज बहुत महंगा सौदा साबित हो रहा है।

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