भारत में सैकड़ों साल से रह रहे यहूदियों को वापस ले जाने के लिए दुनिया का सबसे बड़ा इमिग्रेशन अभियान चलाएगा इजरायल, जानें प्लान

Updated on 27-11-2025 01:26 PM
तेल अवीव: इजरायल की बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार ने उत्तर-पूर्वी भारत में रहने वाले करीब 5800 यहूदी जनजाति के लोगों को वापस ले जाने के फैसले को मंजूरी दे दी है। अगले पांच सालों में बेनी मेनाशे कम्युनिटी के बचे हुए 5,800 सदस्यों को इजरायल ले जाने के प्लान को मंजूरी दे दी गई है। कई सौ साल पहले ये जनजाति उस समय यहूदियों के खिलाफ किए गये अत्याचार और नरसंहार के बाद इजरायल से भाग गई थी और अब उन्हें फिर से इजरायल ले जाया जा रहा है। इजरायर सरकार ने रविवार को इमिग्रेशन फैसले को मंजूरी दे दी है और ये यहूदी कम्युनिटी के लिए अब तक का सबसे बड़ा और सबसे ऑर्गनाइज्ड इमिग्रेशन प्लान है।

इजराइली यहूदी एजेंसी ने कहा है कि इस कदम का मकसद 2030 तक बेनी मेनाशे का अलियाह पूरा करना है। एजेंसी ने एक बयान में कहा है कि "इस ऐतिहासिक फैसले से 2030 तक समुदाय के लगभग 5,800 सदस्य इजरायल आ जाएंगे, जिनमें 2026 में पहले ही मंजूर किए गए 1,200 सदस्य शामिल हैं।"
भारतीय यहूदियों को इजरायल ले जाएंगे पीएम नेतन्याहू
ऐसा पहली बार हो रहा है कि यहूदी एजेंसी इस पूरी प्रक्रिया की देखभाल करेगी। जिसमें उनकी पात्रता के लिए इंटरव्यू, इजरायल के चीफ रैबीनेट और कन्वर्जन अथॉरिटी के साथ कोऑर्डिनेशन, उन्हें इजरायल ले जाने के लिए फ्लाइट्स का इंतजाम और उनके आने के बाद उनके लिए रहने की पूरी व्यवस्था करना शामिल है। इस प्लान पर करीब 90 मिलियन शेकेल, यानि करीब 27 मिलियन डॉलर खर्च होंगे, जिसमें फ्लाइट्स, कन्वर्जन क्लास, रहने की जगह, हिब्रू भाषा की शिक्षा और दूसरी तरह के मदद शामिल है। इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए इजरायल के इमिग्रेशन और इंटीग्रेशन मंत्री ओफिर सोफर ने कैबिनेट में प्रस्ताव रखा था। अब जल्द ही रब्बियों का एक बड़ा दल भारत की यात्रा करेगा, जहां वे पहले चरण में करीब 3,000 ऐसे सदस्यों के साक्षात्कार करेंगे, जिनके नजदीकी परिजन पहले से इजरायल में रह रहे हैं।आपको बता दें कि इससे पहले भी इस समुदाय के करीब 1200 सदस्यों को वेस्ट बैंक में बसाया गया था, लेकिन अब जिन लोगों को इजरायल ले जाया जाएगा, उन्हें उत्तरी इजरायल में बसाया जाएगा। उन्हें खास तौर पर नोफ हागालिल (नाजरेथ के पास) बसाया जाएगा। ज्यूइश एजेंसी ने इस फैसले को राष्ट्रीय महत्व वाला कदम बताया और कहा कि इजरायल सरकार और एजेंसी की साझा ज़िम्मेदारी से यह अभियान ज्यादा प्रभावी होगा। इस आव्रजन प्रक्रिया में कई संस्थाएं शामिल होंगी, जिनमें मंत्रालय, जनसंख्या और आव्रजन प्राधिकरण और विदेश मंत्रालय प्रमुख हैं। इसका मकसद इस पूरे कार्यक्रम को कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर अच्छे से चलाना है।
2700 साल से भारत में रह रहा ये समुदाय
आपको बता दें कि बेनी मेनाशे समुदाय की जड़ें मेनाशे के पुराने कबीले से जुड़ी हैं, जिन्हें करीब 2700 साल पहले उनके देश से बाहर निकाल दिया गया। उस वक्त 10 कबीलों को पूरी तरह से बाहर निकाल दिया गया था जो दुनिया के अलग अलग हिस्सों में बस गये। हालांकि कई सदियां गुजरने के बाद उनकी पहचान पर सवाल उठने लगे। उनकी यहूदी पहचान पर लंबे समय से बहस होती रही है। जैसे पश्तूनों को लेकर भी कहा जाता है कि वो इजरायल से भगाये गये उन्हीं 10 कबीलों में से एक हैं। पश्तूनों की कई परंपरा उनसे मिलती हैं, लेकिन पश्तून अब अपनी नई पहचान के साथ रहते हैं। वहीं, बेनी मेनाशे समुदाय के करीब 2,500 सदस्य पहले से ही इजरायल में रहते हैं और रिपोर्ट्स के मुताबिक उनके कई युवा इजरायल डिफेस फोर्स की लड़ाकू यूनिट्स में काम करते हैं।

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