आयरन एज से जुड़ा है इजरायल का इतिहास, भारत के एक साल बाद बना देश, फिलीस्‍तीन विवाद की पूरी कहानी

Updated on 18-10-2023 01:21 PM
इस महीने, 7 अक्टूबर को हमास ने इजरायल में बड़े हमले को अंजाम दिया। इसके बाद इजरायल की सेना ने गाजा पट्टी में बमबारी की। दुनियाभर में इस संघर्ष की चर्चा है। इजरायल और फिलीस्तीन पड़ोसी हैं और दोनों के बीच लंबे समय से संघर्ष चल रहा है। ये इजरायल के बनने से पहले ही शुरू हो चुका था। इजरायल को आधिकारिक तौर पर 1948 में एक स्वतंत्र देश घोषित किया गया। लेकिन इससे पहले से ही इजरायल का फिलिस्तीनियों और अपने अरब पड़ोसियों के साथ संघर्ष है। आइए जानते हैं इजरायल का इतिहास क्या है और क्यों इसकी फिलीस्तीन और दूसरे पड़ोसियों से दुश्मनी है।

इजरायल को देश के तौर पर मान्यता


यहूदियों की अलग देश इजरायल की मांग पर 29 नवंबर, 1947 को संयुक्त राष्ट्र ने फिलिस्तीन को बांटते हुए एक अलग यहूदी देश बनाने के लिए वोटिंग कराई थी। इसका अरब देशों ने विरोध किया और इसके नतीजे में इस क्षेत्र में युद्ध शुरू हो गया। आठ महीने तक चले युद्ध के बाद इजरायल के बनने का रास्ता साफ हो गया। यहूदी एजेंसी के प्रमुख डेविड बेन-गुरियन ने 14 मई, 1948 को इजरायल की स्थापना की घोषणा की। इसके तुरंत बाद ही तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी एस ट्रूमैन ने भी इजरायल को देश के तौर पर मान्यता दे दी।

इजरायल को देश के तौर पर मान्यता


यहूदियों की अलग देश इजरायल की मांग पर 29 नवंबर, 1947 को संयुक्त राष्ट्र ने फिलिस्तीन को बांटते हुए एक अलग यहूदी देश बनाने के लिए वोटिंग कराई थी। इसका अरब देशों ने विरोध किया और इसके नतीजे में इस क्षेत्र में युद्ध शुरू हो गया। आठ महीने तक चले युद्ध के बाद इजरायल के बनने का रास्ता साफ हो गया। यहूदी एजेंसी के प्रमुख डेविड बेन-गुरियन ने 14 मई, 1948 को इजरायल की स्थापना की घोषणा की। इसके तुरंत बाद ही तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी एस ट्रूमैन ने भी इजरायल को देश के तौर पर मान्यता दे दी।

इजरायल का 1948 से पहले का इतिहास


इजरायल को भले ही 1948 में राष्ट्र बनाया गया था लेकिन इसका इतिहास बहुत पुराना है, ये आयरन एज से जुड़ा है। ऐसा माना जाता है कि हिब्रू बाइबिल में इजरायल की उत्पत्ति का उल्लेख है। इसी क्षेत्र में अब्राहम के जन्म होने का दावा किया जाता है। जिनको यहूदी और इस्लाम की शुरुआत करने वाले दो पैगंबरों इसहाक और इस्माइल का पिता माना जाता है। इजरायल शब्द अब्राहम के पोते जैकब से लिया गया है, जिनको हिब्रू बाइबल में इजरायल नाम दिया गया। ऐसा माना जाता है कि मिस्रवासियों ने कनान में बसने से पहले सैकड़ों वर्षों तक इब्राहिम के वंशजों को गुलाम बनाया था। यही क्षेत्र इस समय इजरायल है।

इतिहासकारों का कहना है कि इस क्षेत्र पर 1000 ईसा पूर्व के आसपास राजा डेविड का शासन था। उनके बेटे राजा सोलोमन ने प्राचीन यरूशलेम में पहला पवित्र मंदिर बनवाया। 931 ईसा पूर्व में इसे दो राज्यों में विभाजित करने के बाद इजरायल और यहूदा राज्यों की स्थापना के भी कुछ रिकॉर्ड मिलते हैं।

कैसे खत्म हुआ क्षेत्र पर अरबों का शासन


इजराल के क्षेत्र पर करीब 722 ईसा पूर्व में अश्शूरियों ने आक्रमण किया और इसके उत्तरी साम्राज्य को नष्ट कर दिया। इसके बाद बेबीलोनियों ने यरूशलेम को जीतते हुए 568 ईसा पूर्व में पहले मंदिर को नष्ट कर दिया। इसके बाद यहां अलग-अलग राजाओं ने यहां शासन किया। इनमें खासतौर से अरबों के अलावा यूनानी, रोमन, सेल्जुक तुर्क, मिस्त्र,मामेलुकेस शामिल हैं। ओटोमन ने भी यहां लंबे समय तक शासन किया।


ऑटोमन साम्राज्य का खत्म होना


इस समय जो इजरायल है, उस पर 1517 से 1917 तक ओटोमन साम्राज्य का शासन रहा। इनका इजरायल के अलावा पश्चिम एशिया के अधिकांश हिस्सों पर भी शासन था। 1918 में ऑटोमन साम्राज्य के पतन और पहले विश्व युद्ध के खत्म होने के बाद पश्चिम एशिया की जमीनी स्थिति बदल गई। ओटोमन साम्राज्य का पतन के बाद ग्रेट ब्रिटेन ने इस क्षेत्र को अपने नियंत्रण में ले लिया और 1947 में इजरायल के स्वतंत्र देश बनने तक फिलिस्तीन पर नियंत्रण रखा।

इजरायल का सालों से चल रहा संघर्ष


इस रीजन में यहूदियों और अरब मुसलमानों के बीच तनाव सैकड़ों सालें है, जो आज भी जारी है। इतिहासकारों का कहना है कि इस क्षेत्र में दो समूह बसे हुए थे और प्राचीन काल से ही इसे धार्मिक तौर पर पवित्र मानते थे। यरूशलम को मुस्लिम और यहूदी दोनों ही पवित्र मानते हैं। इसमें टेंपल माउंट है, जिसमें वेस्टर्न वॉल, डोम ऑफ द रॉक और अल-अक्सा मस्जिद हैं। जो इजरायल-फिलीस्तीन के बीच विवाद की बड़ी वजह हैं। दोनों मुल्क अपना-अपना हक इस क्षेत्र पर जताते रहे हैं। इसकी वजह से लगातार एक बड़ा हिस्सा, खासतौर से गाजा पट्टी तनाव का सामना करती रहती है।


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