हमीदिया अस्पताल में बड़ा हादसा टला:परिजन खुद स्ट्रेचर पर मरीज को 11वीं मंजिल तक ले गया, ढलान पर बिगड़ा संतुलन

Updated on 23-06-2025 01:05 PM

हमीदिया अस्पताल से एक चिंताजनक वीडियो सामने आया है। इसमें एक हृदय रोगी को उसका अकेला परिजन स्ट्रेचर पर धक्का देता हुआ पुरानी कैथलैब से नए भवन की 11वीं मंजिल तक ले जाता दिख रहा है।

रास्ते में अमृत फार्मेसी के पास ढलान पर परिजन का संतुलन बिगड़ गया, लेकिन उसने खुद को संभालते हुए मरीज को गिरने से बचा लिया। समय रहते संभल जाने से बड़ा हादसा टल गया। वीडियो से अस्पताल में स्टाफ की कमी और सुरक्षा व्यवस्था की खामियां उजागर हो रही हैं।

प्रबंधन के दावों की खुली पोल यह स्थिति तब है जब अस्पताल प्रबंधन ने पुरानी कैथलैब से वार्ड तक मरीजों को लाने-ले जाने के लिए एम्बुलेंस सुविधा देने का दावा किया था। लेकिन, हकीकत में न तो एम्बुलेंस मिल रही है और न ही मरीजों को ले जाने के लिए कोई सपोर्ट स्टाफ। यह समस्या किसी एक मरीज की नहीं, बल्कि हर महीने कैथलैब में प्रोसीजर के लिए आने वाले 300 से 400 हृदय रोगियों की है।

धूप-बारिश में स्ट्रेचर पर मरीज

फिलहाल पुरानी कैथलैब ट्रॉमा बिल्डिंग के पीछे चल रही है। इसके सामने का जर्जर भवन तोड़ा जा रहा है।

प्रोसीजर के बाद मरीजों को स्ट्रेचर या व्हीलचेयर पर परिजन धक्का देकर पुरानी कैथलैब से पुरानी फार्मेसी तक चढ़ाई पार कराते हैं।

इसके बाद अमृत फार्मेसी और फिर नए भवन तक ले जाना होता है। बीच में एक सीधी ढलान भी है, जो बारिश में फिसलन भरी हो जाती है। इससे हादसे का खतरा बना रहता है।

करीब आधा किलोमीटर के इस रास्ते में एक ओर निर्माण कार्य चल रहा है, जिससे भारी वाहन आते-जाते रहते हैं।

पूरे रास्ते में धूप और बारिश से बचने का कोई इंतजाम नहीं है, जिससे मरीजों और परिजनों को काफी परेशानी होती है।

7 करोड़ की नई कैथलैब का लंबा इंतजार हमीदिया अस्पताल में हृदय रोगियों की इन समस्याओं को खत्म करने के लिए 7 करोड़ 17 लाख रुपए की लागत से मॉडर्न नई कैथलैब मशीन लगाने की स्वीकृति दी गई थी। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने मशीन को जल्द नए भवन की तीसरी मंजिल पर शुरू करने के निर्देश भी दिए थे। लेकिन, करीब पांच महीने बीत जाने के बाद भी अब तक नई कैथलैब के लिए आवश्यक मशीन और उपकरण नहीं आए हैं, जिससे मरीजों की परेशानी बरकरार है।

क्या है कैथलैब

कैथलैब एक खास लैब होती है, जहां हृदय से जुड़ी जांच और सर्जरी की जाती है। यहां एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी, पेसमेकर लगाने जैसे काम होते हैं। यह आधुनिक तकनीक से लैस होती है, जिससे शरीर के अंदर साफ दिखाई देता है और संक्रमण का खतरा कम होता है।

जल्द शुरू होगी नई कैथ लैब मामले में अस्पताल के अधीक्षक डॉ. सुनीत टंडन का कहना है कि अस्पताल में पर्याप्त स्टाफ है। इस मामले की जांच कराई जाएगी। जिसकी भी लापरवाही होगी, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। कई बार परिजन भी जल्दी में स्टाफ के आने का इंतजार किए बगैर चले जाते हैं। वहीं, नई कैथलैब जल्द शुरू होगी। जो कि इस समस्या का स्थायी समाधान होगा।



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