
भोपाल। अब गर्भवती महिलाओं को सोनोग्राफी के लिए सरकारी अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। अगर सरकारी अस्पताल में सोनोग्राफी मशीन खराब है या डॉक्टर उपलब्ध नहीं है तो उनकी सोनोग्राफी निजी सेंटरों में बिल्कुल मुफ्त कराई जाएगी। इसका पूरा खर्च सरकार उठाएगी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत इसके नए निर्देश जारी किए हैं।
इस व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल और कैशलेस कर दिया गया है ताकि पारदर्शिता बनी रहे और गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे। सरकारी अस्पताल के स्त्री रोग विशेषज्ञ, पीजीएमओ या मेडिकल ऑफिसर ओपीडी में जांच के बाद सोनोग्राफी की सलाह देंगे।
इसके बाद महिला के मोबाइल पर एसएमएस के जरिए ई-वाउचर भेजा जाएगा। इस ई-वाउचर से महिला सात दिनों के भीतर किसी भी अधिकृत निजी सोनोग्राफी सेंटर पर जाकर मुफ्त जांच करवा सकेगी। आपातकाल में जरूरत होने पर एक गर्भवती की अधिकतम दो बार तक सोनोग्राफी कराई जा सकेगी। यह सुविधा खासकर उन जिला अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों के लिए है जहां सरकारी सोनोलाजिस्ट नहीं हैं या वे लंबे अवकाश पर हैं। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत चिन्हित सभी स्वास्थ्य संस्थाओं से भी रेफर किया जा सकेगा।
निजी सेंटरों में होने वाली हर सोनोग्राफी की रिपोर्ट और मरीज की जानकारी ओडीके ऐप के जरिए सीधे ऑनलाइन अपलोड की जाएगी। इससे रिपोर्ट में हेराफेरी नहीं हो सकेगी। भुगतान के लिए सुमन यूएसजी पोर्टल बनाया गया है। निजी सेंटर संचालक को अपना बैंक अकाउंट, आईएफएससी कोड और मोबाइल नंबर पोर्टल पर दर्ज कराना होगा। जांच के बाद सेंटर ई-वाउचर बनाएगा, जिसे अस्पताल अप्रूव करेगा। अप्रूवल के बाद 500 रुपये प्रति केस का भुगतान सीधे सेंटर के खाते में स्पर्श पोर्टल के जरिए कर दिया जाएगा।
गर्भावस्था के दौरान समय पर सोनोग्राफी से मां और बच्चे को होने वाले खतरे और बीमारियों की पहचान शुरुआती दौर में ही हो जाएगी। इससे समय पर इलाज मिलेगा और मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी आएगी। यह योजना पूरे प्रदेश में लागू है। इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए सीएमएचओ कार्यालय भोपाल ने निजी सोनोलाजिस्टों को प्रशिक्षण दिया। उन्हें ई-वाउचर बनाना, रिकार्ड रखना और भुगतान प्रक्रिया की जानकारी दी गई।