एक महीने में 1,950 करोड़ की दवा! दिसंबर में टूट गए बिक्री के सारे रेकॉर्ड, जान लीजिए वजह

Updated on 12-01-2026 12:40 PM
नई दिल्ली: देश के शहरों में बढ़ रही प्रदूषण का असर सीधे-सीधे मेडिकल बिलों में नजर आ रहे है। टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक दिसंबर 2025 में सांस से जुड़ी दवाइयों जैसे एलर्जी और अस्थमा की दवाओं की बिक्री 1,950 करोड़ रुपये के पार चली गई। यह अब तक का सबसे बड़ा मासिक आंकड़ा है जो प्रदूषण से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते खतरे का संकेत दे रहा है। मार्केट रिसर्च फर्म Pharmarack के आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर 2025 में इन दवाओं की बिक्री दिसंबर 2024 की तुलना में 10% और दिसंबर 2023 की तुलना में 18% ज्यादा रही। इससे साफ है कि सांस से जुड़ी बीमारियों का प्रकोप हर साल बढ़ रहा है।

अक्टूबर से दिसंबर के दौरान प्रदूषण सबसे ज्यादा होता है। इस तिमाही के दौरान दवाओं की बिक्री 2024 की तुलना में 14% और 2023 की तुलना में 8% ज्यादा रही। इस तिमाही में सांस से जुड़ी बीमारियों की दवाओं की कुल बिक्री 5,620 करोड़ रुपये से ज्यादा रही। यह पिछली तिमाही से 17% ज्यादा है। इसमें से करीब 3,500 करोड़ रुपये सिर्फ अस्थमा और COPD (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) की दवाओं से आए। COPD एक ऐसी बीमारी है जिसमें सांस लेने में बहुत दिक्कत होती है।

सबसे ज्यादा बिकने वाली दवा

सर्दी के महीनों में अस्थमा और सांस की दूसरी समस्याओं के लिए इस्तेमाल होने वाली दवा Foracort भी सबसे ज्यादा बिकने वाली दवाओं में से एक रही। दिसंबर में यह दूसरी सबसे ज्यादा बिकने वाली दवा थी। इसकी बिक्री 90 करोड़ रुपये रही। सबसे ज्यादा बिकने वाली दवा वजन घटाने वाली 'Mounjaro' थी। कुल मिलाकर भारत में दवाओं का बाजार सालाना 2.4 लाख करोड़ रुपये का है।डॉक्टरों का कहना है कि हवा में प्रदूषण के कणों के संपर्क में आने से अस्थमा और सांस की बीमारियां बढ़ सकती हैं। यह गंभीर समस्याओं जैसे COPD का कारण भी बन सकती हैं। गुरुग्राम में पारस हेल्थ के ENT विभाग के हेड अमिताभ मलिक ने बताया कि हवा में धूल और कणों के बढ़ने से एलर्जिक राइनाइटिस और ब्रोंकाइटिस के मरीजों की संख्या रोजाना OPD में करीब 60% तक बढ़ जाती है। मास्क और एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल, खासकर कमजोर लोगों के लिए बहुत मददगार होता है। इलाज के लिए स्टेरॉयड इनहेलर और एंटी-एलर्जिक दवाएं सबसे जरूरी हैं।

प्रदूषण की समस्या

इन महीनों में इस्तेमाल होने वाली दूसरी आम दवाएं Augmentin और Paracetamol हैं। GSK Pharma India के एक अधिकारी ने बताया कि अक्टूबर से फरवरी का समय आमतौर पर सांस की बीमारियों के मौसम से जुड़ा होता है। इस वजह से इन महीनों में इन दवाओं की मांग बढ़ जाती है। यह ट्रेंड देश के अलग-अलग हिस्सों में भी देखा जा रहा है। उत्तर और दक्षिण भारत में बिक्री लगभग बराबर है।

Pharmarack ने अपनी नवंबर की रिपोर्ट में कहा कि कई इलाकों में महीने-दर-महीने डबल-डिजिट ग्रोथ देखी गई है। इससे पता चलता है कि सर्दियों में होने वाली बीमारियां अब सिर्फ मौसमी नहीं हैं, बल्कि सर्दियों में बढ़ता प्रदूषण एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बन गया है।

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