
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी, न्यायिक सदस्य डॉ. ए. सेंथिल वेल ने की। भोपाल के पर्यावरणविद् नितिन सक्सेना ने 6 मई को शिकायत दर्ज कराई थी। मामले में एनजीटी ने एक पुराने मामले में निर्धारित सिद्धांतों के अनुरूप अधिकरण के स्वतः संज्ञान संबंधी अधिकार क्षेत्र के प्रयोग के लिए किया।
शिकायत में यह कहा
शिकायत में आरोप लगाया गया कि भोपाल में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में ई-वेस्ट उत्पन्न होता है। जिसमें से केवल सीमित मात्रा का ही वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण एवं निस्तारण किया जा रहा है। शेष ई-वेस्ट के अनधिकृत कबाड़ कारोबारियों और अनौपचारिक रीसाइक्लिंग इकाइयों के माध्यम से निस्तारण/प्रसंस्करण किया जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक कचरे को खुले में जलाने अथवा अवैज्ञानिक तरीके से तोड़ने से सीसा, पारा, कैडमियम और क्रोमियम जैसी हानिकारक धातुओं एवं पदार्थों का उत्सर्जन हो सकता है। इससे वायु, मिट्टी, भू-जल प्रभावित होने और जनस्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
वायु गुणवत्ता में गिरावट भी हो रही
आवेदक सक्सेना ने वायु गुणवत्ता में गिरावट, मिट्टी एवं भूजल प्रदूषण, संभावित स्वास्थ्य प्रभावों, अनधिकृत ई-वेस्ट प्रसंस्करण इकाइयों और भोपाल में स्थापित ई-वेस्ट क्लिनिक के वर्तमान में प्रभावी रूप से संचालित नहीं होने सहित कई मुद्दे अधिकरण के समक्ष उठाए। साथ ही उच्च स्तरीय संयुक्त जांच समिति गठित करने, अनधिकृत ई-वेस्ट प्रसंस्करण इकाइयों की पहचान कर कार्रवाई करने, ई-वेस्ट क्लिनिक को पुनः प्रभावी रूप से संचालित करने, पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का आकलन एवं वसूली करने, संग्रहण केंद्र एवं अधिकृत री-साइक्लरों की व्यवस्था करने, जनजागरूकता अभियान चलाने की भी मांग की।
तकनीकी समस्या के कारण अगली सुनवाई के लिए स्थगन
एनजीटी की सुनवाई के दौरान आवेदक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित हुए, लेकिन उनकी ओर से तकनीकी ऑडियो समस्या के कारण पीठ उनसे संवाद नहीं कर सकी। इस वजह से अगली सुनवाई के लिए तारीख निर्धारित की गई।
भोपाल स्थित केंद्रीय क्षेत्रीय पीठ में होगी सुनवाई
एनजीटी की नई दिल्ली बैंच ने माना कि मामले की सुनवाई का क्षेत्राधिकारी NGT की केंद्रीय क्षेत्रीय पीठ भोपाल के क्षेत्राधिकार में आता है। इसलिए वहां पर इसे सूचीबद्ध करने को कहा गया। मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को भोपाल बैंच में ही होगी।