इथेनॉल हरित ऊर्जा है, जिससे कुल मिला कर पर्यावरण में प्रदूषण घटता है। इसकी आणविक संरचना में ऑक्सीजन की उपस्थिति के कारण इसका दहन बहुत साफ तरीके से होता है। पेट्रोल की तुलना में यह 20% कम हाइड्रोकार्बन और कार्बन मोनोऑक्साइड का उत्सर्जन करता है।
सरकार का अनुमान है कि देश को 2025-26 तक 20% ब्लेंडिंग का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए लगभग 1,000 करोड़ लीटर इथेनॉल की आवश्यकता होगी। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के अनुसार वर्तमान क्षमता इसके आधे से भी कम, केवल 440 करोड़ लीटर है। उत्तर प्रदेश पहले से ही देश का सबसे बड़ा इथेनॉल उत्पादक राज्य है, जो लगभग 200 करोड़ लीटर उत्पादन करता है। यह पूरे देश के उत्पादन के आधे से कुछ ही कम है। पांच साल पहले यहां इसका केवल 1/5 हिस्से का ही उत्पादन (24 करोड़ लीटर) होता था।
