दूसरे देशों को धड़ाधड़ बेची जा रही प्याज, इस कारण अपने ही देश में बढ़ गई कीमत, खुदरा बाजार में 80 रुपये किलो पार

Updated on 11-11-2024 12:32 PM
नई दिल्ली: प्याज की कीमत एक बार फिर से रुलाने लगी है। खुदरा बाजार में इसकी कीमत 80 रुपये किलो पार हो गई है। नई फसल न आने और निर्यात में तेजी के कारण से प्याज की कीमत में तेजी आई है। जानकारों के मुताबिक राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक में खरीफ फसल की गुणवत्ता खराब रही। वहीं पुरानी और महंगी फसल की मांग बढ़ गई। साथ ही निर्यात मांग में भी तेजी आई। इन वजहों के चलते प्याज की कीमत आसमान पर पहुंच गई है।

इकनॉमिक टाइम्स के अनुसार नासिक के पिंपलगांव बाजार में बेहतरीन गुणवत्ता वाले प्याज की अधिकतम कीमत 15 दिन पहले 51 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 70 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। वहीं इसी अवधि के दौरान औसत कीमत 51 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 58 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। बांग्लादेश की ओर से प्याज पर आयात शुल्क हटाने से निर्यात में भी तेजी आई है। व्यापारियों को उम्मीद है कि देश में अन्य जगहों पर नई फसल की आवक शुरू होने के बाद 8-10 दिनों के बाद ही कीमतों में गिरावट आएगी।

पांच साल के उच्चतम स्तर पर पहुंची कीमत


पिछले हफ्ते नासिक के बेंचमार्क लासलगांव बाजार में प्याज की कीमतें पांच साल के उच्चतम स्तर 54 रुपये प्रति किलोग्राम को पार कर गईं। व्यापारियों ने कहा कि ऐसा आपूर्ति की कमी के कारण हुआ, क्योंकि दिवाली के लिए देशभर में कई दिनों तक थोक बाजार बंद रहे। पिछले हफ्ते थोक कीमतों में 30 से 35% की वृद्धि हुई।

आवक हुई काफी कम


बागवानी उत्पाद निर्यातक संघ के उपाध्यक्ष विकास सिंह ने कहा कि आवक कम होने के कारण कीमतें बढ़ रही हैं। पिछले साल की रबी फसल से संग्रहित प्याज तेजी से खत्म हो रहा है।
मार्च/अप्रैल में काटे गए प्याज की कीमतें सबसे अधिक हैं, जबकि सितंबर में भारी बारिश के कारण नई फसल की आवक में देरी हुई है।

निर्यात में तेजी भी बड़ा कारण


बांग्लादेश की ओर से स्थानीय प्याज की कीमतों को कम करने के लिए 15 जनवरी तक प्याज पर आयात शुल्क हटाने से निर्यात में भी उछाल आया है। भारत ने सितंबर में विधानसभा चुनावों से ठीक पहले प्याज पर निर्यात शुल्क को आधा करके 20% कर दिया था, क्योंकि प्याज किसान प्याज के निर्यात पर बैन लगाने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ मतदान करने के लिए एकजुट हुए थे।

व्यापार के अंदरूनी सूत्रों ने कहा कि जब ग्राहक कमी देखते हैं, तो व्यापार चक्र में हर कोई अधिक खरीदता है। एक बार आवक बढ़ने पर, मांग में भी कमी आएगी।

कब सस्ती होगी प्याज?


विकास सिंह के मुताबिक राजस्थान के अलवर जैसे कुछ बाजारों में खरीफ की नई फसल की आवक बढ़ने लगी है। रविवार को आवक एक दिन पहले की तुलना में 40% अधिक थी। जल्द ही महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात में भी आवक बढ़ने की उम्मीद है। इसके बाद प्याज की कीमतों में गिरावट आएगी।

व्यापार जगत के जानकारों का अनुमान है कि नवंबर के अंत तक थोक बाजारों में प्याज की कीमतें 30 रुपये प्रति किलोग्राम के आरामदायक स्तर पर आ जाएंगी।

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