विपक्ष ने पूछा- सहारा ग्रुप के कितने निवेशकों को पैसा वापस मिला? सरकार ने कहा- कोर्ट में जाकर पूछिए

Updated on 05-08-2024 06:17 PM
नई दिल्ली: लोकसभा में आज प्रश्नकाल के दौरान सहारा के बकाए पैसे को लेकर पूछे गए सवाल पर सत्ता पक्ष और विपक्ष में आरोप-प्रत्यारोप के दौर चले। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार तो हाथ जोड़कर खड़ी है कि आइए सारे कागजात लाइए और अपने पैसे ले जाइए। लेकिन कोई आ नहीं रहा है। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि ये लोग बाहर जाकर ये न कहें कि सरकार पैसा नहीं दे रही है। सरकार तो पूरी तरह से तैयार है। इस मामले को सुप्रीम कोर्ट सुपरवाइज कर रही है।
प्रश्नकाल के दौरान सीकर (राजस्थान) से सीपीआई (एम) सांसद अमरा राम ने पूछा था कि सहारा ग्रुप में निवेश करने वाले कितने लोगों को पैसा वापस किया और कितना किया? इसका शुरू में जवाब वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने दिया। पंकज चौधरी ने कहा कि अभी तक 138 करोड़ रुपये वापस किए जा चुके हैं। जवाब से संतुष्ट न होने पर अमरा राम ने फिर से सवाल पूछ लिया। इसके बाद सत्ता और विपक्ष के बीच संसद में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया।
वित्त राज्य मंत्री ने कहा- सरकार की मंशा सही
सांसद अमरा राम के सवाल का जवाब देते हुए वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि साल 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने सहारा ग्रुप को आदेश दिया था कि 3.7 करोड़ निवेशकों की करीब 26 हजार करोड़ रुपये की रकम 15 फीसदी ब्याज के साथ वापस की जाए। बाद ने सेबी ने सहारा इंडिया का अकाउंट खोला जिसमें से 15775 करोड़ रुपये वसूले गए। इसके बाद निवेशकों की रकम वापस करने के लिए कोर्ट की तरफ से एक कमेटी बनाई गई थी। इस कमेटी ने विज्ञापन दिया जिसमें कहा गया था कि निवेशक आएं और अपनी रकम ले जाएं। इसके लिए निवेशकों के आवेदन मंगाए गए थे। पंकज चौकरी ने कहा कि इसके तहत सिर्फ 17526 निवेशकों ने आवेदन किया जिन्हें 138 करोड़ रुपये वापस कर दिए गए थे। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा निवेशकों की रकम वापस देने की है।

बाद में नहीं आए आवेदन
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि बार-बार विज्ञापन देने के बाद भी निवेशकों के अपनी रकम वापस लेने के लिए आवेदन नहीं आए। बाद में सेबी राय मांगने के लिए सुप्रीम कोर्ट गई। सुप्रीम कोर्ट में सेबी ने कहा कि 15775 करोड़ रुपये में से जो रकम निवेशकों को वापस नहीं हुई है, वह सहारा ग्रुप की को-ऑपरेटिव कंपनी में ट्रांसफर कर दी जाए। इस रकम में से कोर्ट ने 5 हजार करोड़ रुपये की रकम ट्रांसफर करने की अनुमति दी थी।

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