जिन्ना हाउस को बचा नहीं पाए पाकिस्तानी फौजी, चला सेना का डंडा तो हुए बर्खास्त... लेकिन बच गया हिंसा का असली मास्टरमाइंड!

Updated on 27-06-2023 07:37 PM
इस्लामाबाद : पाकिस्तानी सेना ने उन लोगों को बाहर करने के अपने प्रयास शुरू कर दिए हैं जो 9 मई को सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमला करने वाली भीड़ का सामना नहीं कर पाए। यह स्पष्ट है कि पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर इसका नेतृत्व कर रहे हैं। सोमवार को एक प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान, पाकिस्तानी सेना की मीडिया विंग आईएसपीआर के महानिदेशक मेजर जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने घोषणा की कि एक लेफ्टिनेंट जनरल सहित कई लोगों को दोषी ठहराया गया है और सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करने वाले अन्य लोगों में तीन मेजर जनरल और सात ब्रिगेडियर समेत 15 अधिकारी शामिल हैं।

यह कार्रवाई इस बात की पुष्टि करती है कि आर्मी चीफ सेना को एकजुट करने और गृह युद्ध की संभावनाओं को खत्म करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। यह इस बात का भी संकेत है कि सेना, सिविल सोसाइटी और विदेशी पाकिस्तानियों के बीच पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के नेटवर्क को खत्म करने का अभियान लगातार आगे बढ़ रहा है। यह दिखाता है कि पाक सेना अपनी बात पर अमल कर रही है और 9 मई की घटनाओं के मास्टरमाइंडों के साथ किसी भी समझौते के मूड में नहीं है।

बच गए फैज़ हमीद?

डीजी आईएसपीआर के बयान के अनुसार, दंगों में कथित तौर पर भूमिका निभाने वाले लोगों के परिवारों को भी नहीं बख्शा जा रहा है। इंडियन नैरेटिव डॉट कॉम के मुताबिक विश्लेषक यह कह रहे हैं कि सेना के भीतर सफाई के बावजूद पूरी साजिश के पीछे का सरगना कोई और नहीं बल्कि पूर्व आईएसआई प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) फैज़ हमीद हैं। सूत्रों का कहना है कि सेना में असंतोष तब तक जारी रहने की उम्मीद है जब तक कि जनरल हमीद का कोर्ट मार्शल नहीं किया जाता और उन्हें सजा नहीं दी जाती।

सेना पर लगाए 'फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन' के आरोप

अपने बयान में डीजी आईएसपीआर ने खान और उनके समर्थकों के दावों का खंडन किया कि 9 मई की घटना पीटीआई और उसके नेता को निशाना बनाने के लिए सेना का एक 'फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन' था। मेजर जनरल चौधरी ने कहा कि '9 मई की घटना के लिए सेना और एजेंसियों को जिम्मेदार ठहराने से ज्यादा शर्मनाक कुछ नहीं हो सकता।' उन्होंने पूछा, 'क्या सेना ने अपने खिलाफ साजिश रची या सेना ने पहले से ही अपने एजेंटों को तैनात कर दिया था? क्या हमने अपने शहीदों के स्मारक जला दिये?'

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