पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम:कमिश्नर के पावर आधे, भोपाल-इंदौर में 4 साल बाद भी सिस्टम अधूरा

Updated on 11-12-2025 01:00 PM

देश के करीब 70 शहरों में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू है, लेकिन भोपाल और इंदौर में इसकी संरचना अब भी सीमित अधिकारों के दायरे में बंधी हुई है। देश के सभी 70 शहरों में कमिश्नर्स को समान अधिकार देने के लिए केंद्र सरकार को अब सिस्टम को सशक्त और री-डिजाइन करने की जरूरत महसूस हुई है।

मप्र के इन दोनों शहरों में लागू कमिश्नरी महज 7 प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के अधिकारों के इर्द-गिर्द बनाई गई है। इन दोनों जिलों के कमिश्नर न तो किसी बदमाश के खिलाफ नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (एनएसए) के तहत कार्रवाई कर सकते हैं और न ही उन्हें आर्म्स लाइसेंस देने या निरस्त करने के अधिकार हैं। यहां तक कि फील्ड के डीसीपी (एसपी स्तर) को एक पेन खरीदने के लिए भी कमिश्नर ऑफिस को पत्र लिखना पड़ता है।

अन्य शहरों में विस्तृत अधिकार इसके उलट अहमदाबाद में डीसीपी के पास अलग क्राइम ब्रांच भी है, जिसे लोकल क्राइम ब्रांच (एलसीबी) कहा जाता है। इसके अलावा जिले में एक डीसीपी क्राइम ब्रांच भी हैं। बता दें कि नेशनल पुलिस एकेडमी (एनपीए) बतौर नोडल एजेंसी सभी कमिश्नर्स को समान अधिकार देने पर काम कर रही है। इसके लिए भोपाल-इंदौर पुलिस कमिश्नर्स को अधिकारों की रिपोर्ट जल्द ही उन्हें उपलब्ध करवानी है।

सीआरपीसी की धारा और जिला बदर करने के अधिकार

भोपाल-इंदौर में कमिश्नर सिस्टम लागू होने के दौरान पुलिस को सीआरपीसी की धारा 107-116, 144, 151 एवं 110 और जिला बदर करने के अधिकार हैं। इसके अलावा धरना-प्रदर्शन की अनुमति, शर्तों का उल्लंघन करने वालों पर भी पुलिस कार्रवाई कर सकती है। नए कानून लागू होने के बाद सीआरपीसी अब बीएनएसएस में तब्दील कर दी गई है।

भोपाल-इंदौर पुलिस कमिश्नर्स लाइसेंस अथॉरिटी नहीं हैं... 

आबकारी लाइसेंस व लिकर लाइसेंस देने व रद्द करने की अनुमति। {फायर आर्म्स जारी करने व रद्द करने की शक्ति। {अपराधी को रासुका में निरुद्ध करने की शक्ति।

कानपुर में अध्ययन, फिर भी नहीं मिले अधिकार...

 दिसंबर 2021 में कमिश्नर सिस्टम लागू होने के बाद भोपाल पुलिस की 5 सदस्यीय टीम सिस्टम की बारीकियां समझने कानपुर गई थी। लौटकर टीम ने एक प्रेजेंटेशन तत्कालीन सीपी को दिखाया। इसका एक विजिट नोट पुलिस मुख्यालय को भी भेजा गया था। इसके बाद भी पुलिस की गई मांग पूरी नहीं हुई।

धारा 133 और 145 की जरूरत इस प्रेजेंटेशन में सीआरपीसी की धारा 133 (बीएनएसएस 152) और 145 (बीएनएसएस 164) का भी जिक्र किया गया था। कानपुर पुलिस को इन दोनों धाराओं के तहत कार्रवाई के अधिकार हैं। धारा 133 यानी पब्लिक न्यूसेंस के तहत कानपुर पुलिस स्थायी और अस्थायी अतिक्रमण पर कार्रवाई कर सकती है।

ये अधिकार इसलिए भी जरूरी हैं, क्योंकि राजधानी में अवैध गुमठियों का कारोबार धड़ल्ले से जारी है। सबसे ज्यादा अवैध गुमठियां एमपी नगर, न्यू मार्केट, दस नंबर, कोलार, नेहरू नगर, जवाहर चौक, बावड़िया कला और बागसेवनिया क्षेत्रों में हैं। ऐसे ही धारा 145 में उन्हें कब्जे के निर्धारण के अधिकार मिल जाते हैं।


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