विभागीय कार्यक्रम में सामने आई समस्या:मप्र की 23 हजार पंचायतों के 70 हजार विकास कार्य नियमों में उलझे

Updated on 04-12-2025 12:11 PM

मप्र की 23 हजार से अधिक पंचायतों में करीब 70 हजार विकास कार्य नियमों में उलझकर रह गए हैं। करीब दस दिन पहले भोपाल में आयोजित एक विभागीय कार्यक्रम के बाद यह जानकारी सामने आई। इसमें सरपंचों ने बताया कि सरकार की तरफ से 5वें और 15वें वित्त आयोग के तहत जो रा​शि दी जाती है, उसे कहां खर्च करना है, यह​ फिक्स करके रखा है।

ऐसे में जो काम पहले जरूरी हैं, उन्हें करना मुश्किल हो गया है। ऐसे पूरे प्रदेश में करीब 70 हजार विकास कार्य शामिल हैं। इनमें छोटी पुलिया, गांव में सीसी रोड, तालाब और स्टॉप डेम शामिल हैं। पंचायतों में अभी तीन तरह की रोक लगी है।

पहली यह कि निर्माण के दौरान पंचायत में किसी भी तरह की मिट्‌टी, मुरम या रेत उठाने की अनुमति नहीं है। सरपंचों ने इसकी अनुमति मांगी है। वहीं 15वें वित्त आयोग में प्राप्त राशि में जो टायट यानी किसी काम विशेष के लिए राशि फिक्स कर दी है, उससे दूसरे काम कराने की अनुमति भी मांगी है।

इसका मुख्य कारण है ज्यादातर पंचायतों में जल जीवन मिशन का काम चल रहा है और आयोग से मिली राशि में भी नल-जल के लिए राशि दी जा रही है। इसकी वजह से यह या तो लैप्स होती है या फिर इसे नल-जल में जबरिया काम करना दिखाकर खर्च कर दिया जाता है।

जिला पंचायत और जनपद पंचायत अध्यक्ष भी खफा

मप्र के सभी 55 जिला पंचायत और 313 जनपद पंचायत अध्यक्ष भी बदलावों से खफा है। इनका कहना है कि बेहतर होगा कि मप्र में त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था खत्म करके सिर्फ सरपंच के चुनाव कराएं जाएं। यह बात हाल ही में तब निकलकर आई, जब पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने तीन दिवसीय "आत्मनिर्भर पंचायत-समृद्ध मध्य प्रदेश' कार्यक्रम आयोजित किया।

इस कार्यक्रम के बाद सभी जिला पंचायत अध्यक्षों और जनपद पंचायत अध्यक्षों की ऑनलाइन मीटिंग हुई, जिसमें यह लोग लंबा विरोध अभियान चलाने का मन बना चुके हैं। जिला पंचायत संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष अरविंद धाकड़ से बात की तो उन्होंने बताया कि बेहतर हाेगा कि सरकार त्रिस्तरीय पंचायती व्यवस्था को खत्म करके अब सिर्फ पंचायत चुनाव कराएं।

उन्होंने बताया कि पहले हमसे जिला पंचायत सीईओ, जनपद में जनपद पंचायत सीईओ की सीआर लिखने का अधिकार छीना। अब बजट भी सीधे पंचायत में देना शुरू कर दिया। हमारे पास तो अपने क्षेत्र में काम कराने के लिए नाम मात्र का भी फंड नहीं है।

सीएम हेल्पलाइन की बाहरी शिकायतों पर रोक की मांग

सरपंचों ने विभाग से मांग की है कि उनकी पंचायतों में बाहरी लोगों द्वारा सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से की जाने वाली शिकायतों पर रोक लगाई जाए। उन्होंने लिखा है कि ग्राम पंचायत का कोई व्यक्ति यदि शिकायत करता है तो कोई परेशानी नहीं, लेकिन बाहरी व्यक्ति की शिकायत बंद होनी चाहिए। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार ऐसी करीब 50 हजार से अधिक शिकायत हैं, जो पंचायत से बाहर के व्यक्ति ने की है। जानकारी मिली है कि तीनों मांगों पर विभाग में जल्दी निर्णय लिया जाएगा।



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