प्रॉपर्टी 10 लाख से ज्यादा, आधे ही चुका रहे टैक्स:भोपाल में 3 महीने होगी प्रॉपर्टी की जांच

Updated on 04-04-2025 01:12 PM

भोपाल में अब ऐसी प्रॉपर्टी की पहचान होगी, जिसका टैक्स नगर निगम को नहीं चुकाया जा रहा। 3 महीने के अंदर सभी जोन और वार्ड प्रभारी सर्वे करेंगे। फिर निगम कमिश्नर हरेंद्र नारायण को रिपोर्ट सौंपेंगे। इसे लेकर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने आसंदी से निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि यह निगम का हक है।

बता दें कि भोपाल में निगम ने प्रॉपर्टी टैक्स पर 10% की बढ़ोतरी हुई है। यह टैक्स का बोझ 5.62 लाख उपभोक्ताओं पर पड़ा है। उदाहरण के तौर पर समझे कि एक हजार स्क्वायर फीट के फ्लैट में अभी सालाना 3200 रुपए टैक्स लग रहा है तो अब यह 3500 रुपए से ज्यादा चुकाना होगा, लेकिन लाखों प्रॉपर्टी ऐसी भी हैं, जिनका टैक्स नहीं दिया जा रहा, या फिर उनकी वैल्यू टैक्स स्लैब में कम है। इन्हें ही अब ढूंढा जाएगा।

ऐसे समझे सर्वे का आधार

  • निगम के मुताबिक, भोपाल में कर योग्य 10 लाख से ज्यादा प्रॉपर्टी है, लेकिन टैक्स चुका रहे सिर्फ 5.62 लाख। यानी, आधी प्रॉपर्टी का टैक्स नहीं चुकाया जा रहा।
  • सर्वे में पता लगाया जाएगा कि किसी मकान की पुराने क्षेत्रफल के हिसाब से टैक्स वसूली हो रही है, जबकि कुछ सालों में इसका क्षेत्रफल बढ़ गया।
  • मैदान में उतरेगा अमला निगम को इस बार प्रॉपर्टी टैक्स के रूप में कम राशि मिली है। इस वजह से अब राजस्व अमला एक बार फिर मैदान में उतरेगा और प्रॉपर्टी की जांच करेगा।

    345 संस्थाओं को 25 हजार से 2 लाख रुपए तक निगम के बजट में कुल 345 सामाजिक या धार्मिक संस्थाओं को अनुदान के रूप में 25 हजार से 2 लाख रुपए तक सालाना दिए जाने का प्रावधान किया गया है। इन्हें बेवजह राशि देने का मुद्दा कांग्रेस पार्षदों ने भी उठाया। कहा कि जनता के टैक्स से निगम का संचालन होता है और यही पैसा संस्थाओं को बांटा जा रहा है। इसे तुरंत रोका जाए। जांच की जाए कि संस्था सक्रिय है या निष्क्रिय? निगम अध्यक्ष सूर्यवंशी ने आसंदी से जांच करने का भरोसा दिलाया।

    जनप्रतिनिधियों की हो गई बल्ले-बल्ले, निधि दोगुनी हुई भोपाल नगर निगम के बजट में जल, प्रॉपर्टी और ठोस एवं अपशिष्ट पर टैक्स बढ़ाने के साथ कुछ ऐसे फैसले भी लिए गए, जिन्होंने सबको चौंका दिया। शहर सरकार ने जनता पर टैक्स का बोझ डाला है तो दूसरी तरफ जनप्रतिनिधि यानी, पार्षद, एमआईसी मेंबर, अध्यक्ष और महापौर की सालाना निधि दोगुनी कर दी गई है। जैसे- पार्षद की निधि पहले 25 लाख रुपए थी, जो अब 50 लाख रुपए हो गई। महापौर की 5 की जगह 10 करोड़ रुपए निधि की गई है।

    बसें है नहीं, स्मार्ट पास किसे देंगे? महापौर मालती राय ने सिटी बसों के लिए महापौर स्मार्ट पास शुरू करने की घोषणा की हे, लेकिन भोपाल में पब्लिक ट्रांसपोर्ट की स्थिति ठीक नहीं है। वर्तमान में 100 बसें भी सड़कों पर नहीं दौड़ रही है, जबकि नौ महीने पहले तक इनकी संख्या 368 तक पहुंच गई थी। ऐसे में महापौर स्मार्ट पास किस काम का? यह सोचने का विषय है।



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