आरक्षित बर्थ से यात्री का सामान चाेरी होना रेलवे की लापरवाही, देना होगा हर्जाना

Updated on 14-11-2023 12:47 PM

 भोपाल कोई भी यात्री सीटें इसलिए आरक्षित कराता है,ताकि सुरक्षित यात्रा कर सके। एक यात्री ने सुरक्षा सुविधा को प्राथमिकता देते हुए एसी प्रथम श्रेणी में सीटें आरक्षित करवाई थी, क्योंकि वे अपनी पत्नी के साथ रिश्तेदार के यहां शादी में जा रहे थे और उन्हें कीमती कपड़े और गहने भी ले जाने थे। एसी कोच से यात्री का सामान चोरी हो गया, लेकिन रेलवे ने इसे अपनी जिम्मेदारी नहीं मानी। राज्य उपभोक्ता आयोग ने निर्णय सुनाया कि यात्री के सामान की सुरक्षा करना रेलवे की जिम्मेदारी है और वह इससे बच नहीं सकता।

इंदौर निवासी कन्हैयालाल साधवानी ने जिला उपभोक्ता आयोग में याचिका लगाई थी कि वे आठ फरवरी 2016 को अहमदाबाद में रिश्तेदार की शादी में शामिल होने के लिए ट्रेन नंबर 9310 (शांति एक्सप्रेस) के फर्स्ट एसी कोच 38 और 39 पर यात्रा कर रहे थे। उनके पास सामान के साथ हरे रंग का बैग था,जिसमें कीमती सामान और गहने थे। बैग उन्होंने बर्थ के नीचे रखा हुआ था। जब अगले दिन सुबह करीब 6.45 बजे जब ट्रेन स्टेशन पहुंची तो वे वाशरूम चले गए और जब वापस आए तो उन्हें उनके सामान में से हरे रंग का बैग नहीं था।उन्होंने शिकायत की थी कि बैग में रखे करीब आठ लाख रुपये के कीमती गहने और अन्य सामान चोरी हो गए। उन्होंने अहमदाबाद रेलवे पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई थी, लेकिन समान नहीं मिला। जिला आयोग ने उपभोक्ता के पक्ष में सुनाया और मानसिक क्षतिपूर्ति सहित करीब साढ़े आठ लाख रुपये का हर्जाना लगाया। रेलवे ने राज्य उपभोक्ता अायोग में इस निर्णय के खिलाफ अपील लगा दी।राज्य आयोग ने जिला आयोग के निर्णय को सही ठहराया।

एसी कोच में कोई भी अनाधिकृत व्यक्ति नहीं बैठ सकता है

रेलवे ने तर्क रखा कि यदि सामान बुक नहीं किया गया है तो रेलवे प्रशासन किसी भी नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं है। साथ ही यात्रियों को अपने सामान की देखभाल करने की आवश्यकता स्वयं है, क्योंकि इसके लिए बर्थ के नीचे मजबूत लोहे के छल्ले उपलब्ध कराए गए हैं।इस तर्क को आयोग ने खारिज कर दिया।वहीं उपभोक्ता का कहना था कि दो यात्री उसी कोच में बर्थ संख्या 41 और 42 पर यात्रा कर रहे थे और गोधरा रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से उतर गए और हो सकता है कि उन्होंने बैग चुरा लिया हो। आयोग ने कहा कि दोनों व्यक्ति अनाधिकृत रूप से यात्रा कर रहे थे और वह भी बिना टिकट के और यात्री का सामान चोरी होना यह सेवा में कमी के दायरे में आएगा।

सीट चाहे एसी में हो या स्लीपर में, आरक्षित है तो हर्जाना मिलेगा

उपभोक्ता मामलों के अधिवक्ता अशोक रुमी श्रीवास्तव ने बताया कि, इस मामले में भले ही सीटें प्रथम श्रेणी में थी, लेकिन यात्री की सीट चाहे, द्वितीय, तृतीय वातानुकूलित श्रेणी या शयनयान में यदि सीट आरक्षित है तो सामान चोरी होने पर यात्री रेलवे से हर्जाना मांग सकता है और यह निर्णय नजीर है कि उसे हर्जाना मिलेगा।


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