मोदी 3.0 के पहले बजट में रोबोट टैक्‍स! निर्मला सीतारमण को एक्‍सपर्ट्स का प्रपोजल

Updated on 21-06-2024 01:13 PM
नई दिल्‍ली: अर्थशास्त्रियों ने बुधवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की। इसमें उन्होंने आने वाले बजट पर चर्चा की। इस दौरान विकास, राजकोषीय नीति, निवेश और निजी क्षेत्र की भागीदारी पर फोकस किया गया। साथ ही खाद्य महंगाई दर और कुल कर्ज को संभालने पर भी बात हुई। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के रोजगार पर असर पर भी चर्चा हुई। विस्थापित श्रमिकों को फिर से कौशल प्रदान करने के लिए 'रोबोट टैक्स' के प्रस्ताव पर भी विचार किया गया।

वित्त मंत्री के साथ हुई चर्चा में कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को शामिल किया गया। इनमें निजी निवेश को बढ़ावा देने के उपाय, रोजगार सृजन, राजकोषीय समझदारी बनाए रखना के साथ कर्ज के स्तर और खाद्य महंगाई का प्रबंधन शामिल था। एक खास विषय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बढ़ता इस्‍तेमाल और रोजगार पर इसके संभावित असर का था। एक अर्थशास्त्री ने 'रोबोट टैक्स' के विचार का सुझाव दिया। इस टैक्स से एआई-आधारित विस्थापन से प्रभावित वर्कर्स के पुनर्वास के लिए धन मिल सकता है।

IMF के पेपर में रोबोट टैक्‍स का ज‍िक्र

'रोबोट टैक्स' की सिफारिश अंतरराष्‍ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के एक पेपर से मेल खाती है। पेपर में यह स्वीकार किया गया है कि एआई समग्र रूप से रोजगार और मजदूरी को बढ़ा सकता है। लेकिन, आईएमएफ ने लंबे समय में अहम नौकरियां जाने की आशंका के प्रति भी आगाह किया। इसने कहा कि यह बदलाव कई वर्कर्स के लिए दर्दनाक होगा। हालांकि, आईएमएफ के पेपर ने 'रोबोट टैक्स' को लागू करने के खिलाफ सलाह दी। लेकिन, इसने श्रम नीतियों और सामाजिक सुरक्षा तंत्रों का पुनर्मूल्यांकन करने की जरूरत पर प्रकाश डाला।आईएमएफ के पेपर में बेरोजगारी बीमा कवरेज के विस्तार और वेतन बीमा पर विचार करने के साथ कौशल और क्षेत्र-आधारित प्रशिक्षण पर अधिक फोकस करने का सुझाव दिया गया है। इसने यह भी सिफारिश की कि देश अपनी वर्तमान कॉर्पोरेट टैक्‍स प्रणालियों की समीक्षा करें कि वे ऑटोमेशन में निवेश को कैसे प्रोत्साहित करती हैं।

गीता गोपीनाथ ने चुनौत‍ियों पर द‍िया था जोर

हाल ही में एक साक्षात्कार में आईएमएफ की पहली उप प्रबंध निदेशक गीता गोपीनाथ ने विकासशील देशों के लिए एआई की ओर से पेश की जाने वाली महत्वपूर्ण चुनौती पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन देशों में अक्सर व्यापक सामाजिक सुरक्षा जाल का अभाव होता है।
उन्होंने कहा, 'अगर आप उन युवाओं के अनुपात को देखें जो न तो स्कूल में हैं, न ही काम कर रहे हैं या किसी भी तरह के प्रशिक्षण में हैं, तो यह संख्या उन्नत अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बहुत अधिक है। जिसका अर्थ है कि परिवर्तन से लाभ उठाने या परिवर्तन के अनुकूल होने की उनकी क्षमता और भी कठिन होने वाली है। ये ऐसे क्षेत्र हैं जहां विकासशील देशों को एक मजबूत डिजिटल ढांचा, अधिक शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदान करने का प्रयास करने में अधिक निवेश करना होगा ताकि वे भी इस तकनीक से लाभान्वित हो सकें।'

हालांकि यह पुष्टि नहीं हुई है कि आगामी बजट में एआई से संबंधित कदम शामिल किए जाएंगे या नहीं। लेकिन, आर्थिक सर्वे में इस तकनीक का उल्लेख किया जा सकता है, जो अगले महीने केंद्रीय बजट से पहले प्रस्तुत किया जाएगा।

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