बिना वजह थाने में बैठाया, सरकार को हाईकोर्ट का नोटिस:जबलपुर में 12वीं पास कैब ड्राइवर खुद कर रहा पैरवी

Updated on 14-05-2024 11:31 AM

बिना कसूर 52 साल के कैब ड्राइवर को पुलिस उठा लाई। मारपीट की। 24 घंटे बाद यह कहकर छोड़ दिया कि अधिकारियों का आदेश था। कैब ड्राइवर ने अपना जुर्म जानने के लिए थाना प्रभारी, एसपी से लेकर सीएम तक गुहार लगाई। आखिरकार हाई कोर्ट में याचिका लगा दी। अब कोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार के गृह सचिव, एसपी, थाना प्रभारी और मामले से जुड़े तीनों सब इंस्पेक्टर को नोटिस देकर जवाब मांगा है।

ड्राइवर ने बताया- पुलिस ने थाने में लाकर किया टाॅर्चर

अजीत सिंह ने बताया, ‘मैं गोरखपुर थाना क्षेत्र के आदर्श नगर में रहता हूं। 20 जून 2023 की बात है। सुबह करीब 7 बजे घर पर था। थाने में पदस्थ तत्कालीन एसआई कौशल किशोर समाधिया, ब्रजभान सिंह, गणेश तोमर और अन्य पुलिसकर्मी घर पहुंचे। कहा- दो मिनट के लिए बाहर चलो, कुछ काम है। फिर बिना वारंट दिखाए थाने लेकर आ गए।

थोड़ी देर बाद परिवार वाले थाने पहुंचे। पूछा- किस जुर्म में थाने लाए हैं लेकिन कुछ नहीं बताया गया। वहां मौजूद तत्कालीन थाना प्रभारी अरविंद चाैबे से भी मैंने अपना अपराध पूछा, लेकिन जवाब नहीं मिला। हर बार कोने में बैठा दिया गया। भाई के साथ गाली-गलौज भी की गई। मेरे साथ मारपीट की। टॉर्चर किया गया। रातभर थाने में रखा।

अगले दिन 21 जून की सुबह 9 बजे बिना बताए छोड़ भी दिया। इस दौरान पुलिस ने न कोई लिखा-पढ़ी की और न ही मामला दर्ज किया। दूसरे दिन भी वजह पूछी लेकिन पुलिस अधिकारियों ने चुप्पी साध ली। बस, इतना कहा कि ऊपर से आदेश था।’

SP से लेकर सीएम तक शिकायत, नतीजा सिफर

अजीत कुमार ने दो दिन बाद गोरखपुर थाने में आवेदन देकर कार्रवाई की वजह पूछी। जवाब नहीं मिलने पर तत्कालीन एसपी सौरभ कुमार सुमन, आईजी उमेश जोगा और कलेक्टर तुषार कांत विद्यार्थी से भी शिकायत की लेकिन कुछ नहीं हुआ। परेशान होकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा। वहां से भी जवाब नहीं मिला।

आखिरकार 29 अप्रैल 2024 को हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी। अजीत कुमार ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है, ‘घटना की वजह से मानसिक क्षति पहुंची है। प्रतिष्ठा भी खराब हुई है इसलिए 5 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए।’

हाई कोर्ट में लगाई याचिका, खुद कर रहे जिरह

अजीत सिंह ने कोर्ट में सुनवाई के लिए कोई वकील नहीं किया है। वे खुद ही अपने केस की पैरवी कर रहे हैं। अजीत कहते हैं, ‘मेरी परेशानी मैं बेहतर तरीके से समझता हूं। मैं वकील को बताऊंगा, उसमें समय जाएगा। जब वे कोर्ट को बताएंगे तो उसमें फीलिंग्स नहीं आएगी। दूसरी तरफ मेरे पास इतने पैसे भी नहीं हैं, इसलिए वकील नहीं किया।’

अजीत ने बताया कि उनके खिलाफ आबकारी, मारपीट और अन्य केस दर्ज थे। सभी मामलों में खात्मा लग चुका है। बस एक केस हाई कोर्ट में विचाराधीन है।



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