SpiceJet के चेयरमैन अजय सिंह पर तिहड़ जेल जाने का खतरा, सुप्रीम कोर्ट ने दिया अल्टीमेटम

Updated on 11-09-2023 02:35 PM
नई दिल्ली: स्पाइसजेट (SpiceJet) एयरलाइन के चेयरमैन अजय सिंह (Ajay Singh) की मुश्किलें बढ़ गई हैं। क्रेडिट सुइस (Credit Suisse) को भुगतान के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख दिखाया है। कोर्ट ने अजय सिंह को पेमेंट का आखिरी मौका देते हुए कहा है कि अगर उन्होंने 22 सितंबर तक क्रेडिट सुइस को पांच लाख डॉलर की किस्त का भुगतान नहीं किया तो उन्हें तिहाड़ जेल जाने के लिए तैयार रहना चाहिए। साथ ही उन्हें 10 लाख डॉलर की डिफॉल्ट अमाउंट का भी भुगतान करने को कहा गया है। क्रेडिट सुइस और स्पाइसजेट के बीच 2015 से कानूनी विवाद चल रहा है। क्रेडिट सुइस ने एयरलाइन पर 2.4 करोड़ डॉलर के बकाये का दावा किया है। इस मामले में मद्रास हाई कोर्ट ने 2021 में कंपनी को बंद करने का आदेश दिया था। लेकिन अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया था और दोनों पक्षों को इसका समाधान निकालने के लिए कहा था।

पिछले साल अगस्त में दोनों पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वे मामले को निपटाने के लिए सहमत हो गए हैं। लेकिन इसी साल मार्च में क्रेडिट सुइस ने स्पाइसजेट के एमडी अजय सिंह के खिलाफ अवमानना का मामला दायर किया था। कंपनी सेक्रेटरी और एयरलाइन का कहना था कि कंपनी सेटलमेंट की शर्तों के मुताबिक अपने बकाये का भुगतान करने में नाकाम रही है। 14 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने अजय सिंह के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी किया। कोर्ट ने कहा, 'हमें सख्त कदम उठाना होगा। अगर आप शट डाउन करते हैं तो हमें परवाह नहीं है। अब बहुत तो उन्हें तिहाड़ जेल भेज दिया जाएगा। साथ ही कोर्ट ने उन्हें हर सुनवाई पर मौजूद रहने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी।

स्पाइसजेट का इतिहास

स्पाइसजेट की शुरुआत 1984 में हुई थी। उद्योगपति एस के मोदी ने भारत में प्राइवेट टैक्सी की शुरुआत की। 1993 में इसका नाम एमजी एक्सप्रेस रखा गया लेकिन अगले ही साल यानी 1994 इसका नाम ModiLuft कर दिया गया। साल 2004 में अजय सिंह ने इसका अधिग्रहण कर लिया और इनका नाम रखा स्पाइसजेट। उस जमाने में हवाई जहाज का टिकट बहुत महंगा होता था लेकिन स्पाइसजेट ने कम कीमत पर लोगों को हवाई सफर का मौका दिया। साल 2010 में सन ग्रुप के मारन बंधुओं ने इसमें 37.7 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी। बाद में उन्होंने कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 58.46 फीसदी कर ली। लेकिन कंपनी की वित्तीय स्थिति खराब होने के बाद जनवरी 2015 में उन्होंने अपनी पूरी हिस्सेदारी अजय सिंह को बेच दी।

लेकिन पिछले कुछ समय से स्पाइसजेट की हालत खराब हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अजय सिंह कंपनी में 24 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के लिए खरीदार की तलाश में हैं। उनकी स्पाइसजेट में कुल 60 फीसदी हिस्सेदारी है। स्पाइसजेट कोरोना महामारी से पहले वित्तीय समस्या से जूझ रही थी। फंड की कमी के कारण कंपनी के कामकाज पर भी असर हुआ है। विमानों की मरम्मत और रखरखाव के लिए कंपनी के पास फंड नहीं है। हाल में कंपनी के विमानों में तकनीकी गड़बड़ी के कई मामले सामने आए हैं। डीजीसीए ने स्पाइसजेट के आधे विमानों के उड़ने पर रोक लगा दी थी।

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