DU के लॉ कोर्स में मनुस्मृति पढ़ाने का सुझाव:एकेडमिक काउंसिल की बैठक में आज चर्चा होगी; फैकल्टी बोली- ये महिलाओं को पीछे ले जाएगा

Updated on 12-07-2024 01:50 PM

दिल्ली यूनिवर्सिटी के LLB छात्रों को मनुस्मृति (लॉज ऑफ मनु) पढ़ाने के प्रस्ताव पर आज चर्चा हो सकती है। इसे एकेडमिक काउंसिल की बैठक में पेश किया जाएगा। शिक्षकों का एक वर्ग इसके खिलाफ है। कुछ फैकल्टी ने कहा कि ये महिलाओं और पिछड़े तबकों को और पीछे ले जाएगा।

लॉ फैकल्टी ने दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) की फैसले लेने वाली सर्वोच्च संस्था से अपने फर्स्ट और थर्ड ईयर के स्टूडेंट्स के सिलेबस में बदलाव करने की इजाजत मांगी है, ताकि उन्हें 'मनुस्मृति' पढ़ाई जा सके। दरअसल न्यायशास्त्र पेपर के सिलेबस में बदलाव LLB के पहले और छठे सेमेस्टर से संबंधित हैं।

मनुस्मृति के पाठ सिलेबस में शामिल किए जा सकते हैं
संशोधनों के अनुसार, मनुस्मृति के दो पाठ- जी एन झा की लिखी 'मनुस्मृति विद द मनुभाश्य ऑफ मेधातिथि' और टी कृषणस्वामी अय्यर द्वारा लिखी- 'कमेंटरी ऑफ मनु स्मृति- स्मृतिचंद्रिका' छात्रों के पढ़ने के लिए प्रस्तावित किए गए हैं।

सोशल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट ने DU के कुलपति को पत्र लिखा
लेफ्ट समर्थित सोशल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (SDTF) ने इस कदम का विरोध किया है। SDTF ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के कुलपति योगेश सिंह को पत्र लिखकर कहा कि यह किताब महिलाओं और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के अधिकारों के प्रति पिछड़े नजरिए को बढ़ावा देती है और प्रगतिशील शिक्षा प्रणाली के खिलाफ है।

SDTF के जनरल सेक्रेटरी एसएस बरवाल और चेयरपर्सन एसके सागर ने इस पत्र में कहा कि छात्रों को सजेस्टिड रीडिंग के तौर पर मनुस्मृति पढ़ने की सलाह देना बेहद आपत्तिजनक है, क्योंकि यह किताब भारत में महिलाओं और अधिकारविहीन समुदायों की प्रगति और शिक्षा के खिलाफ है।

इस पत्र में लिखा है कि मनुस्मृति के कई वर्गों में महिलाओं की शिक्षा और समान अधिकारों के विरोध में बातें लिखी हैं। मनुस्मृति के किसी भी खंड या भाग का परिचय हमारे संविधान की बुनियादी संरचना और सिद्धांतों के खिलाफ है।

SDTF ने इस प्रस्ताव को तुरंत वापस लेने और 12 जुलाई को होने वाली एकेडमिक काउंसिल की बैठक में स्वीकृत न करने की मांग की है। इस पत्र में कुलपति से अनुरोध किया गया है कि कि वे लॉ फैकल्टी और संबंधित स्टाफ सदस्यों को मौजूदा सिलेबस के आधार पर न्यायशास्त्र पेपर पढ़ाते रहने का आदेश जारी करें।

जयराम रमेश बोले- यह RSS की दशकों पुरानी रणनीति को पूरा करने की कोशिश
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इसे लेकर कहा कि RSS दशकों से संविधान और डॉ. अंबेडकर की विरासत पर हमला करता आया है। DU में मनुस्मृति पढ़ाना इन्हीं कोशिशों को पूरा करने के लिए नॉन बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री की सलामी रणनीति का हिस्सा है।

क्या है मनुस्मृति ?
मनुस्मृति एक धार्मिक ग्रंथ है, जिसमें धर्म और राजनीति के बारे में बताया गया है। इसमें में 2694 श्लोक हैं। इसे 12 अध्याय में बांटा गया है। इन 12 अध्यायों में हिंदू संस्कार, श्राद्ध व्यवस्था, आश्रम की व्यवस्था, हिंदू विवाह और महिलाओं के लिए नियम बताए गए हैं। इसमें जाति व्यवस्था को भी बताया गया है।

मनुस्मृति का विरोध क्यों?
मनुस्मृति में कहा गया है कि ब्रह्माजी ने विश्व की रचना की थी। ब्रह्माजी के मुंह से ब्राह्मण शब्द निकला था। इसमें बताया गया था कि ब्राह्मण का मतलब किसी विषय पर अध्ययन करना या यज्ञ करना होता है। वहीं, क्षत्रिय वर्ण ब्रह्माजी की भुजाओं से निकला, जिसका होता है रक्षा करना।

मनुस्मृति में लिखा है कि ब्रह्माजी के पेट से वैश्य वर्ण निकला। मनुस्मृति में बताया गया कि वैश्य का काम समाज का पेट भरना होता है। जैसे सामाजिक कार्य और खेती, किसानी। शूद्र शब्द ब्रह्माजी के पैर से उत्पन्न हुए। बताया गया कि इनका काम स्वच्छता बनाए रखना है।

मनुस्मृति में महिलाओं के नियमों के बारे में भी बताया गया है। इसमें लिखा गया है कि महिलाओं को पिता, पति और पुत्र से अलग अकेले कभी नहीं रहना चाहिए। महिलाओं और पिछड़े वर्ग को लेकर लिखी बातों को लेकर मनुस्मृति का विरोध होता है।



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