ल्‍यारी के 'धुरंधर' टॉप कॉप चौधरी असलम की कहानी उनके शार्गिद की जुबानी, कई बार हुए सस्‍पेंड, बम धमाके में मौत

Updated on 12-12-2025 01:29 PM
आदित्य धर की 'धुरंधर' ने सिर्फ बॉक्स ऑफिस के दिन बदल दिए हैं, बल्कि बॉलीवुड में भी एक गजब लहर ले आई है। और तो और इसके कलाकारों की दमदार एक्टिंग की भी खूब तारीफ हो रही है। रणवीर सिंह और अक्षय खन्ना ने तो गर्दा उड़ा ही रखा है, पर एक और एक्टर हैं, जिनकी खूब तारीफ हो रही है, और ये हैं संजय दत्त। उन्होंने फिल्म में कड़क पुलिसवाले चौधरी असलम का रोल प्ले किया है। उनका किरदार असल जिंदगी के चौधरी असलम से प्रेरित है। फिल्म में असलम इतना खूंखार है कि उससे पूरा कराची और ल्यारी खौफ खाता है। क्या आप जानते हैं कि असल जिंदगी में जो चौधरी असलम थे, वो कैसे थे और कौन थे?

चौधरी असलम कराची पुलिस के सबसे खूंखार और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट थे। वह एक तरह से ल्यारी के 'धुरंधर' थे। उन्होंने अपने करियर में 100 से ज्यादा एनकाउंटर किए। वह पाकिस्तान की एंटी टेरिरिजम यूनिट में एएसपी के तौर पर कार्यरत थे। साल 2014 में एक आत्मघाती बम धमाके में चौधरी असलम की मौत हो गई थी।

सिंध पुलिस के DIG ने बताया चौधरी असलम संग पहली मुलाकात का किस्सा

लेखक और सिंध पुलिस के उप महानिरीक्षक (DIG) उमर शाहिद हामिद ने 'डिजी टेल्स' के साथ हाल ही में हुई बातचीत में चौधरी असलम के बारे में विस्तार से बताया। वह उन्हें अपना गुरु मानते थे। उमर शाहिद ने चौधरी असलम के साथ कई हाई-प्रोफाइल मामलों में मिलकर काम किया था। उमर शाहिद ने चौधरी असलम के साथ अपनी पहली मुलाकात का किस्सा सुनाते हुए उसे किसी क्राइम-एक्शन फिल्म के सीन जैसा बताया।

'पिस्टल मेज पर रखी, मेरे पिता के हत्यारे को गिरफ्तार करने की कहानी सुनाने लगे'

वह बोले, 'असलम के बारे में जो बात मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित करती है, और मुझे लगता है कि वो सिनेमाई दृष्टि से भी एक बेहतरीन कहानी का किरदार हैं, वो ये है कि वो हमेशा से ही एक असाधारण व्यक्तित्व वाले इंसान थे। उनसे मेरी पहली मुलाकात जब हुई, तो वह सफेद सलवार कमीज पहनकर आए। एक ग्लॉक पिस्टल निकाली, उसे मेज पर रखा और मेरे पिता के हत्यारे को गिरफ्तार करने की कहानी सुनाने लगे।'

बताया चौधरी असलम के सामने क्या-क्या थीं चुनौतियां

उमर शाहिद ने आगे कहा, 'असलम दिल से एक क्राइम फाइटर थे। मुझे पता है कि उनके बारे में और उनके काम करने के तरीके को लेकर खूब विवाद होता रहा है। इस बात पर भी विवाद रहा है कि वह एक अच्छे पुलिस अधिकारी थे या नहीं। इस बारे में बहुत बहस हुई है, और मैं इनमें से किसी का भी बचाव नहीं कर रहा हूं। लेकिन मैं इतना जरूर कहूंगा- 1990 के दशक में एक पुलिस अधिकारी के लिए कानून-व्यवस्था और अपराध के सबसे बड़े खतरों, जैसे कि उस समय के एमक्यूएम (मुत्तहिदा कौमी आंदोलन) की उग्रवादी शाखा, और फिर 2000 के दशक की शुरुआत में ल्यारी गैंग के बीच संघर्ष, रहमान डकैत या अरशद पप्पू जैसे खूंखार गिरोहों से निपटना, और कई पुलिस अधिकारियों की तरह किसी एक पक्ष का साथ न देना, बल्कि सभी पक्षों से एक साथ लड़ना, कई मोर्चों पर युद्ध लड़ना, एक चुनौती थी।'

'कई पुलिसवाले पीछे हट गए थे'

'और फिर 2010 के दशक में अपनी मौत तक, जिहादियों से लड़ना, चाहे वह लश्कर-ए-झांगवी हो या पाकिस्तानी तालिबान, इतने सारे मोर्चे खोलना... सिर्फ इसलिए कि सरकार ने कहा, 'देखो, तुम्हें इन लोगों से लड़ना होगा, कोई और नहीं है।' मैं कई पुलिस अधिकारियों को जानता हूं, जो इस बोझ को उठाने के लिए पीछे हट गए।' उमर शाहिद ने उन्होंने आगे कहा कि असलम किसी भी पार्टी के प्रति पक्षपाती नहीं थे। वह अपराध और अपराधियों को एक ही नजर से देखते थे। वह बोले, 'मैं कई पुलिस अधिकारियों को जानता हूं, जो कहते थे कि अगर हम जिहादियों के खिलाफ काम करेंगे, तो हम एमक्यूएम या ल्यारी गैंग के खिलाफ काम नहीं करेंगे, क्योंकि हम इतने सारे दुश्मन पैदा नहीं कर सकते। लेकिन उन्होंने इस मूलभूत सिद्धांत पर कभी सवाल नहीं उठाया, क्योंकि उनका मानना था कि शहर के नागरिकों को शांति या सुरक्षा दिलाने का यही एकमात्र तरीका है। उन्हें इस बात का पक्का यकीन था कि ये लोग कानून तोड़ रहे हैं।'

असलम के खिलाफ हुई एफआईआर, सस्पेंड और प्रेशर भी

उमर शाहिद ने स्वीकार किया कि असलम के कुछ तरीके बहुत ही एक्स्ट्रीम थे, लेकिन वह हालातों की वजह से ऐसे थे। उमर बोले, 'असलम ने उन सभी मोर्चों पर काम किया, जो विशेष थे। जब आप इस तरह के दबाव में दिन-रात जीते हैं...कभी-कभी सरकार आपको बताती है कि आपको ल्यारी को साफ करना है, उसे अपराध मुक्त बनाना है, और फिर आपको उस काम में धकेला जाता है...और फिर आठ या नौ महीने बाद जब सरकार बदल जाती है, तो आपको सस्पेंड कर दिया जाता है। आपके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाती है क्योंकि सरकार अलग है और फिर आपके आसपास के लोगों को निशाना बनाया जाता है।'

असलम की मौत से पहले उनके घर को बम से उड़ाया, परिवार बच गया

उमर शाहिद ने बताया कि इन स्थितियों की वजह से चौधरी असलम की निजी जिंदगी भी उजड़ गई थी। वह बोले, 'असलम की मौत से पहले उनका घर बम से उड़ा दिया गया था, और यह महज किस्मत की बात थी कि उनका परिवार और वह खुद बच गए। तो, जिसकी परिस्थितियां ऐसी थीं, उसके लिए यह सामान्य जीवन नहीं है। और फिर, मैं उन्हें थोड़ी छूट देना चाहूंगा क्योंकि उनके आस-पास के अन्य लोगों ने इस तरह की स्थितियों का खूब फायदा उठाया और अरबपति बन गए। इसलिए, अगर आप असलम की तुलना उन लोगों से करें, तो यह कहना गलत नहीं होगा कि वह भी कोई फरिश्ते नहीं थे। वह हमेशा किसी न किसी रूप में संगठन के दायरे में ही रहे।'

2014 में बम धमाके में हुई मौत

चौधरी असलम की हत्या साल 2014 में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) द्वारा किए गए बम विस्फोट में हुई थी। हाल ही डायलॉग पाकिस्तान के एक पॉडकास्ट में, असलम की विधवा पत्नी नोरीन ने बताया था कि उनके पति संजय दत् को बहुत पसंद करते थे। संजय की 'खलनायक' देखने के बाद से ही वह उनके फैन थे। नोरीन ने विश्वास जताया था कि संजय दत्त असलम के किरदार के साथ न्याय करेंगे।

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