मोहम्मद यूनुस में दुनिया ने संत देखा, शैतानी चेहरा नहीं... बांग्लादेश के पूर्व खुफिया अधिकारी का बड़ा दावा, किया अरबों का हेरफेर

Updated on 09-12-2025 01:20 PM
ढाका: बांग्लादेश के पूर्व इंटेलिजेंस ऑफिसर और डिप्लोमैट अमीनुल हक पोलाश ने देश की अंतरिम सरकार के हेड मोहम्मद यूनुस के बारे में कई खुलासे किए हैं। पोलाश ने नोबेल पुरस्कार विजेता यूनुस के पीछे छिपे पावर स्ट्रक्चर, वित्तीय हेरफेर और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं पर बात की है। शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद निर्वासन का सामना कर रहे पोलाश का कहना है कि यूनुस अपना जो भोला चेहरा दुनिया को दिखाते हैं, असल में वह उससे एकदम अलग हैं।

अमीनुल हक पोलाश ने News18 के साथ बातचीत में बांग्लादेश की राष्ट्रीय सुरक्षा प्रणाली के अंदरूनी रहस्यों पर अपने अनुभवों को साझा करते हुए मोहम्मद यूनुस का एक ऐसा पहलू दिखाया है, जिसे दुनिया ने पहले कभी नहीं देखा है। पोलाश ने बताया कि उन्होंने एक दशक तक राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश सेवा में काम किया। इस दौरान जब उनकी जांच यूनुस के नेटवर्क की वित्तीय जड़ों को छूने लगी तो वह चौंक गए।

निर्वासन मेरी मजबूरी थी

पोलाश ने कहा, 'यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने सत्ता संभाली तो पता चला कि मेरे लिए 'गायब कर दो' जैसे शब्दों का इस्तेमाल हो रहा है।इसके बाद भारत में उनके राजनयिक पद से अचानक वापसी का आदेश आया। मेरे लिए ढाका लौटना लौटना मौत की तरफ जाने जैसा होता। ऐसे में निर्वासन ही खुद को बचाने का विकल्प था।'पोलाश ने यूनुस के माइक्रो-क्रेडिट के आविष्कार के दावे को चुनौती देने वाले दस्तावेजों के बारे में बताया। ये दस्तावेज दिखाते हैं कि यूनुस ने माइक्रो-क्रेडिट का आविष्कार नहीं किया। उन्होंने इसे चुराया और इसका नाम बदलते हुए असली निर्माताओं का नाम हटा दिया। यह फोर्ड फाउंडेशन के फंडिंग वाला प्रोजेक्ट था, जिसे युवा शोधकर्ताओं- स्वपन अदनान, नासिरुद्दीन और एच आई लतीफी ने डिजाइन किया था।

यूनुस नायक नहीं

पोलाश ने आगे कहा, 'दुनिया यूनुस को एक नायक और संत के रूप में देखती है। वहीं मैंने उनका एक दूसरा ही रूप देखा है। उन्होंने ग्रामीण बैंक के नाम पर कई संस्थाएं बनाकर बड़े पैमाने पर पैसे का हेरफेर किया। उन्होंने दान के तौर पर अरबों लिए और इसका गलत इस्तेमाल किया। दरअसल यूनुस का ये पूरा नेटवर्क गरीबी उन्मूलन के नाम पर कॉर्पोरेट इंजीनियरिंग थी।'
पोलाश ने दावा किया कि यूनुस ने अपनी 100 करोड़ रुपए की संपत्ति को उन ट्रस्टों में स्थानांतरित कर दिया, जिन्हें वे व्यक्तिगत रूप से नियंत्रित करते थे। हालांकि इस ट्रांसफर को कर्ज के रूप में लेबल किया। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि ऋण पर उस तरह से कर नहीं लगता जैसे संपत्ति हस्तांतरण पर लगता है। यह सब कागजी कार्रवाई में मौजूद है।

खुद अपने मुकदमे लिए वापस

पोलाश ने बताया है कि अगस्त 2024 में अंतरिम सरकार का कार्यभार संभालने के बाद यूनुस के खिलाफ चल रहे मामलों को बंद कर दिया गया। भ्रष्टाचार निरोधक आयोग ने उनके खिलाफ अपना प्रमुख मामला वापस ले लिया। इसके अलावा पांच और मामले गायब हो गए। अपने खिलाफ मुकदमे यूनुस ने खुद ही खत्म कर दिए।

यूनुस के शासन में परिवारवाद पर पोलाश ने कहा कि उन्होंने अपने करीबियों को पद बांटे हैं। उन्होंने अपने भतीजे अपूर्व जहांगीर को सरकार में उप प्रेस सचिव बनाया है। उनकी लंबे समय से सहयोगी रही लामिया मोर्शेद को एसडीजी और दूसरे उच्च पद मिले है। सभी प्रमुख पदों पर यूनुस के वफादारों को चुपचाप नियुक्ति मिली है।

दुनिया ने झूठा चेहरा देखा

पोलाश का कहना है कि पश्चिम यह नहीं देख रहा है। इसका कारण यह है कि दुनिया एक कहानी पर फिदा हो गई कि एक सौम्य प्रोफेसर ग्रामीण महिलाओं के लिए काम करता है। यह कहानी सभी को अच्छा महसूस कराती है। हालांकि सच इसके उलट है और इसके सारे सबूत मौजूद है। इसे एक दिन दुनिया जरूर देखेगी।


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