अमेरिकी H-1B वीजा रिन्यू कराने आए हजारों भारतीय प्रोफेशनल्‍स पर संकट, अचानक कैंसल हुए अपॉइंटमेंट, भारत में फंसे

Updated on 20-12-2025 01:15 PM
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक फैसले के चलते बड़ी संख्या में भारतीय H-1B वीजा धारक अब भारत में ही फंस गए हैं। इनकी संख्या हजारों में हो सकती है। ये भारतीय इस महीने अपने अमेरिकी वर्क परमिट को रिन्यू कराने के लिए भारत वापस आए थे, लेकिन अमेरिकी दूतावास ने अचानक उनकी अपॉइंटमेंट कैंसिल कर दी। अब इन अपॉइंटमेंट को महीनों बाद के लिए रीशेड्यूल कर दिया है। वॉशिंगटन पोस्ट ने H-1B मामले के स्पेशलिस्ट तीन इमिग्रेशन के हवाले से यह जानकारी दी है। वकीलों ने बताया कि 15 से 26 दिसम्बर के बीच सैकड़ों या शायद हजारों हाई-स्किल्ड वर्कर्स की अपॉइंटमेंट कैंसल कर दी गई।

दिसम्बर का महीना वह समय है जबि कई H-1B धारक वीजा रिन्यूअल का लक्ष्य बनाते हैं, क्योंकि यह समय अमेरिका में छुट्टियों के मौसम का होता है। विदेश विभाग ने वीजा धारकों को भेजे गए मेल में कहा है कि ट्रंप प्रशासन की नई सोशल मीडिया जांच नीति लागू होने के बाद उनके इंटरव्यू में देरी हो रही है। वॉशिंगटन पोस्ट ने इस ईमेल को देखे जाने का दावा किया है। इसमें कहा गया है कि इसका उद्येश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी आवेदक अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा न बने।

H-1b वीजा का भारत बड़ा लाभार्थी

H-1B वीजा कार्यक्रम खास स्किल वाले विदेशी कामगारों को छह साल तक अमेरिका में रहने और काम करने की अनुमति देता है, लेकिन ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान यह विवादों में रहा है। ट्रंप के धुर-दक्षिणपंथी समर्थक इस प्रोग्राम को खत्म करने की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि यह अमेरिकी लोगों की नौकरी छीनता है। हालांकि, सिलिकॉन वैली के टेक एग्जीक्यूटिव ने इसका विरोध किया है और H-1B वर्कर्स को इंडस्टी के लिए जरूरी बताया है। अमेरिकी नागरिकता और इमिग्रेशन सर्विसेज की अप्रैल 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत H-1B प्रोग्राम का सबसे बड़ा लाभार्ती है, जिसमें 71 प्रतिशत वीजा धारक भारतीय हैं।
इमिग्रेशन वकीलों ने वॉशिंगटन पोस्ट को बताया कि अचानक अपॉइंटमेंट कैंसल होने ने लोगों की जिंदगी उलट-पुलट दी है। इसके वीजा खत्म होने वाले वर्कर्स की नौकरी पर खतरा मंडराने लगा है। इमिग्रेशन फर्म रेड्डी न्यूमैन ब्राउन पीसी में पार्टनर एमिली न्यूमैन ने कहा कि उनके कम से कम 100 क्लाइंट भारत में फंसे हुए हैं।

अलग होने को मजबूर हुए परिवार

वकीलों ने कहा कि प्रभावित लोगों में से कई 30 से 40 की उम्र के टेक वर्कर हैं, जो सालों से अमेरिका में रह रहे हैं। कुछ लोग अपने बच्चों के साथ भारत आए थे, उनके सामने मुश्किल है कि उन्हें स्कूल से दूर रखें या अकेले भेज दें। कई लोग अपने परिवारों से पूरी तरह अलग हो गए हैं। भारत में इमिग्रेशन अटॉर्नी वीना विजय अनंत ने कहा कि यह सबसे बड़ी गड़बड़ी है जो हमने देखी है।
अमेरिकी विदेश विभाग ने पोस्ट को बताया कि पहले मामलों को जल्दी प्रोसेस करने पर और प्रतीक्षा समय कम करने पर जोर दिया था, लेकिन अब भारत समेत दुनिया में हमारे दूतावास और कॉन्सुलेट हर वीजा केस की अच्छी तरह से जांच को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं।

ट्रंप के इस नियम ने भारतीयों को फंसाया

जुलाई में विदेश विभाग ने घोषणा की थी कि H1-B धारक और H-4 वीजा पर उनके आश्रित 2 सितम्बर से अपने दस्तावेजों को दूर से या किसी तीसरे देश में रिन्यू नहीं कर पाएंगे। इसके लिए उन्हें अपने देश लौटना होगा। 19 सितम्बर को ट्रंप ने एक आदेश पर हस्ताक्षर किए जिसमें नए H-1B आवेदनों के लिए 100,000 डॉलर का शुल्क अनिवार्य कर दिया गया। 3 दिसम्बर को ट्रंप प्रशासन ने नई घोषणा में जिसमें H-1B वीजा और उनके आश्रितों के लिए विस्तारिक स्क्रीनिंग और जांच प्रक्रिया की बात कही। इसमें उनकी ऑनलाइट प्लेटफॉर्म पर समीक्षा भी शामिल है।

अचानक मेल पर कैंसल हुए अपॉइंटमेंट

अगले कुछ दिनों में दिसम्बर के मध्य से आखिर में रिन्यू होने वाले अपॉइंट को विदेश विभाग से मेल मिलने शुरू हो गए। इसमें कहा गया कि ऑपरेशनल दिक्कतों के कारण कांसुलेट को हर दिन लिए जाने वाले अपॉइंटमेंट की संख्या कम करनी पड़ी है। वकीलों ने कहा कि ज्यादातर अपॉइंटमेंट मार्च और जून के बीच रीशेड्यूल किए जा रहे हैं। एक आवेदक को तो 2027 की तारीख दी गई है।

भारतीय इंजीनियर ने बताया दर्द

डेट्रॉइट में रहने वाले एक भारतीय इंजीनियर ने बताया कि वह दिसम्बर की शुरुआत में एक शादी के लिए भारत गए थे। उन्होंने अपना H-1B वीजा रिन्यू कराने के लिए 17 और 23 दिसम्बर को काउंसलर अपॉइंटमेंट तय किया था, जो अब खत्म हो चुका है। उन्हें 8 दिसम्बर को कई ईमेल मिले जिसमें बताया गया कि उनका अपॉइंटमेंट कैंसल कर दिया गया है और 2 जुलाई के लिए रीशेड्यूल किया गया है- यानी छह महीने से भी ज्यादा समय बाद। उनकी पत्नी अमेरिका में अपने H-1B वीजा पर हैं।

इस इंजीनियर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनकी कंपनी ने यह दिखाने वाले दस्तावेज जमा किए कि वह जिन प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं, वे अगले साल तेजी से आगे बढ़ेंगे। इसके बाद उन्हें एक जल्द अपॉइंटमेंट मिल गया है। हालांकि, अभी भी उन्हें डर बना हुआ है। उन्होंने कहा, मुझे उम्मीद है कि वे इसे मानेंगे और अब आगे नहीं बढ़ाएंगे। इंजीनियर ने H-1B प्रोग्राम में बदलाव को गलत बताया और कहा कि अगर H-1B पर काम करने वाले लोगों को अचानक पलायन होता है तो बहुत सारी कंपनियां बर्बाद हो जाएंगी।

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