ट्रंप ने H1B वीजा पर लगाई भारी फीस, जॉब संकट... भारतीयों के लिए आज भी पहली पसंद है अमेरिका, ग्राउंड रिपोर्ट

Updated on 11-10-2025 01:51 PM
वॉशिंगटन: भारत और अमेरिका के बीच 50 फीसदी टैरिफ को लेकर चल रहा विवाद अभी भी बना हुआ है। दोनों देशों में कई दौर की बातचीत के बाद अभी तक इसका हल नहीं हो सका है। वहीं ट्रंप प्रशासन लगातार H1B वीजा को लेकर अपने नियम सख्‍त करता जा रहा है। डोनाल्‍ड ट्रंप सरकार की सख्त आव्रजन नीतियों के बावजूद 10 लाख से ज़्यादा अंतरराष्ट्रीय छात्रों के साथ, अमेरिका आज भी विदेश में पढ़ाई के लिए दुनिया का सबसे लोकप्रिय ठिकाना बना हुआ है। यह देश बड़ी आर्थिक और सैन्य शक्ति होने के साथ ही लंबे समय से शिक्षा का भी बड़ा केंद्र रहा है। दुनिया भर से छात्रों को अध्ययन, नवाचार और सामाजिक, आर्थिक तथा वैज्ञानिक अनुसंधान कार्यों के लिए आकर्षित करता रहा है। आइए अमेरिका में रह रहे भारतीय से जानते हैं कि क्‍यों यह देश उनकी पहली पसंद बना हुआ है।

अमेरिका हार्वर्ड विश्वविद्यालय, मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी , स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले, प्रिंस्टन और येल विश्वविद्यालय जैसे दुनिया के कई शीर्ष रैंकिंग वाले विश्वविद्यालयों का घर है जो नियमित रूप से क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग और टाइम्स हायर एजुकेशन जैसी वैश्विक रैंकिंग में शीर्ष पर आते हैं। इन विश्वविद्यालयों ने दुनिया को सौ से ज्यादा नोबेल पुरस्कार विजेता दिए हैं। विश्वविद्यालयों में पढ़ाई और शोध के लिए छात्रों को छात्रवृत्तियां दी जाती हैं। अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से विश्वविद्यालयों को करोड़ों डॉलर का अनुदान दिया जाता है।

वीजा संबंधी बाधाएं


राष्ट्रीय सुरक्षा और अमेरिकी लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने के नाम पर ट्रंप प्रशासन की अप्रवासन नीतियों में हालिया बदलावों ने यहां अध्ययन करने आने वाले छात्रों और अध्यापकों के लिए जांच प्रक्रियाओं और अमेरिका में बने रहने के उनके स्टेटस को कठिन जरूर बना दिया है लेकिन फिर भी ज्यादातर लोगों का यही मानना है कि उच्च शिक्षा के लिए वे अमेरिका को ही तरजीह देंगे।

भारतीय छात्रों की प्रतिक्रिया


सरकारी आंकड़ों के अनुसार वीजा संबंधी बाधाओं के कारण इस साल अगस्त में दुनिया भर से अमेरिका आने वाले छात्रों की संख्या में सबसे ज्यादा 45 फीसदी की कमी भारतीय छात्रों की रही। ऐसे में हमने अमेरिका में पहले से मौजूद भारतीय छात्रों से ही मौजूदा हालात के बारे में उनकी राय ली। न्यूजर्सी की प्रिंस्टन यूनिवर्सिटी के फिजिक्‍स विभाग में डार्क मैटर पर पोस्ट डाक्टरल रिसर्च कर रहे उदिपन ने एक सवाल के जवाब में कहा, 'यहां के विश्वविद्यालयों में अनुसंधान के लिए अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं हैं। फिर भी अगर आपको कुछ और चाहिए तो वह तुरंत उपलब्ध कराया जाता है। सेमिनार में कई बार नोबेल पुरस्कार विजेताओं को भी बुलाया जाता है जो छात्रों के साथ अपने अनुभव साझा करते हैं। बताइये इतना सब कहां मिलेगा। वीजा के नाम पर छात्रों को हो रही दिक्कत पर उन्होंने कहा यह सब राजनीति है। यह आती जाती रहती है। हालात हमेशा एक से नहीं रहते।
नोट्रेडेम यूनिवर्सिटी में लेक्चरर अनन्या ने कहा, 'विश्वविद्यालय का माहौल बहुत अच्छा है, हाल फिलहाल वीजा नियमों की वजह से थोड़ी दिक्कत हो रही है, पर विश्वविद्यालय की ओर से पूरा सहयोग मिल रहा है। वह हमें बताते रहते हैं कि कब क्या करना है।’ न्यूजर्सी के रडगर्स यूनिवर्सिटी से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातकोत्तर कर रहे यश कहते हैं,'अमेरिका में पढ़ने से बड़ी कंपनियों के विशाल नेटवर्क और उनके नियोक्ताओं तक पहुंचना आसान होता है। जितना एक्सपोजर यहां हैं, कहीं और शायद ही मिले। वैसे तो कैंपस में कोई दिक्कत नहीं है लेकिन सरकार अप्रवासी छात्रों की निगरानी कुछ ज्यादा कर रही है। वीजा की दिक्कत के कारण हमारे कई साथी इस बार अपने घर भी नहीं गए।

क्या कहते हैं सर्वेक्षण


रोज़गार आधारित गैर-आप्रवासी वीज़ा के लिए सलाहकार सेवा देने वाली कंपनी रेड्डी न्यूमैन ब्राउन पीसी में एसोसिएट अटॉर्नी करीम जिवानी ने भी अपनी राय रखी। करीम जिवानी ने कहा कि अमेरिका में सुरक्षा और निगरानी जरूरी है लेकिन इसके लिए ऐसी रणनीति की दरकार है जो केवल देश की सीमाओं और अप्रवासियों की निगरानी भर न करे बल्कि असीम संभावनाओं और अवसरों वाले देश के रूप में अमेरिका की छवि को भी बनाए रखे। अमेरिका पढ़ने आने के इच्छुक छात्रों को वीजा, एडमिशन प्रक्रिया और इससे संबधित सभी सलाहकार सेवाएं उपलब्ध कराने वाली गैर-लाभकारी संस्था अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा संस्थान-आईआईई की ओर से 14 मई और 6 जून, 2025 के बीच कराए गए एक सर्वेक्षण 'स्प्रिंग 2025 स्नैपशॉट' के नतीजे ये बताते हैं कि वीजा को लेकर तमाम बंदिशों के बावजूद अमेरिका के 89 प्रतिशत कॉलेज और विश्वविद्यालय विदेशी छात्रों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इनमें से 33 प्रतिशत ऐसे भी हैं जो इन्हें उच्च प्राथमिकता देते हैं।

हालांकि रिपोर्ट में अमेरिका आने के इच्छुक छात्रों की संख्या में गिरावट की बात भी कही गई है और यह माना गया है कि वीजा प्रोसेसिंग में हो रही देरी और अड़चनें इसकी सबसे बड़ी वजहें हैं। हालांकि रिपोर्ट यह भी कहती हैं कि छात्रों के लिए आज भी अमेरिका सबसे पसंदीदा गंतव्य है। सरकारी नीतियां चाहे जो भी हों अमेरिका के विश्वविद्यालयों ने विदेशी छात्रों के लिए अपने दरवाजे खोल रखे हैं। इनका मानना है कि जब शिक्षा सीमाओं से परे जाती है, तो यह लोगों के विचारों में और खुलापन लाती है, उन्हें समस्याओं का मिलकर समाधान करने में सक्षम बनाती है। अमेरिकी शिक्षा व्यवस्था का लक्ष्य एक ऐसे शांतिपूर्ण, समृद्ध विश्व का निर्माण करना है जो नवीन समाधानों और आपसी समझ से प्रेरित हो।


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