अमेरिकी नौसेना का सातवां बेड़ा, टैरिफ स्‍ट्राइक... अंकल सैम 54 साल से दे रहे धमकी फिर भी अटूट है भारत-रूस दोस्‍ती

Updated on 31-07-2025 02:38 PM
मास्‍को: डोनाल्‍ड ट्रंप के दोबारा अमेरिका की सत्‍ता में आने के बाद भारत और अमेरिका के रिश्‍तों में नई ऊंचाई छूने की उम्‍मीद थी। ट्रंप भारतीय प्रधानमंत्री को अपने पहले कार्यकाल में अपना दोस्‍त बताते थे। हालांकि ट्रंप के दोबारा सत्‍ता में आने के बाद से वह एक के बाद एक भारत विरोधी कदम उठा रहे हैं। ट्रंप ने भारत के खिलाफ 25 प्रतिशत टैरिफ का ऐलान कर दिया है। यही नहीं ट्रंप ने भारत और रूस के बीच दोस्‍ती पर वार किया है। ट्रंप ने भारत के खिलाफ भारी टैरिफ ऐलान करने के बाद कहा, 'मुझे परवाह नहीं है कि भारत, रूस के साथ क्या करता है। वे एक साथ अपनी मृत अर्थव्यवस्थाओं को गर्त में ले जा सकते हैं, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता है।' अमेरिका यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से ही भारत को धमकाने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका चाहता है कि भारत रूस से अपनी दोस्‍ती को तोड़े। वहीं भारत रूस से सबसे ज्‍यादा तेल खरीद रहा है। यही नहीं भारत रूस से हथियार खरीदना जारी रखे हुए है। आइए समझते हैं कि किस तरह से भारत और रूस की दोस्‍ती अटूट बनी हुई है...

ट्रंप ने सत्‍ता संभालने के बाद दुनिया के कई देशों को धमकी दी। जापान ट्रंप की धमकी के आगे झुक गया। वहीं भारत ट्रंप की टैरिफ धमकी के आगे अड़ा हुआ है। भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपने कृषि बाजार को खोलने नहीं जा रहा है। साथ ही रूस के साथ दोस्‍ती को भी बरकरार रखेगा। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सीजफायर कराने का कई बार दावा किया लेकिन हर बार भारत ने इसे खारिज कर दिया। भारत के इस सख्‍त रुख के बाद ट्रंप ने दशकों पुरानी नापाक चाल चल दी। ट्रंप ने पाकिस्‍तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर का वाइट हाउस के अंदर लंच पर स्‍वागत किया। पाकिस्‍तानी सेना प्रमुख ने अमेरिका को एक बार फिर से क्रिप्‍टो और तेल भंडार का चूरन देकर उन्‍हें लुभाने की कोशिश की।

अमेरिका ने बंगाल की खाड़ी में भेजा था यूएसएस इंटरप्राइजेट


ट्रंप जनरल मुनीर के इस लालच में फंस गए और अब पाकिस्‍तान के साथ ट्रेड डील का ऐलान किया है और कहा है कि पाकिस्‍तान के तेल भंडार को अमेरिका विकसित करेगा। अमेरिकी कंपनी इसको लेकर एक डील करने जा रही है। साल 1971 के बांग्‍लादेश युद्ध के बाद अमेरिका के बदनाम विदेश मंत्री हेनरी किसिंजर को डर सता रहा था कि भारत की तत्‍कालीन पीएम इंदिरा गांधी (पश्चिमी) पाकिस्‍तान पर हमला कर सकती हैं। इसके बाद अमेरिका ने अपनी नौसेना के सातवें बेड़े को हिंद महासागर में भेज दिया। अमेरिकी नौसेना का सबसे बडा एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस इंटरप्राइजेज बंगाल की खाड़ी में पहुंच गया था
इसके बाद सोवियत संघ तत्‍काल ऐक्‍शन में आ गया और उसने भी अपनी नौसेना को हिंद महासागर में भेज दिया। हेनरी किसिंजर की चाल फेल हो गई और अमेरिकी नौसेना को पीछे हटना पड़ा। भारत ने जब पोखरण में परमाणु परीक्षण किया था तब भी अमेरिका ने कड़े प्रतिबंध लगाए। इसके बाद भी रूस ने भारत के साथ दोस्‍ती निभाई और बाद में अमेरिका को झुकना पड़ा। भारत ने जब रूस से एस-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम लिया तब भी अमेरिका ने काट्सा प्रतिबंधों की धमकी दी। हालांकि भारत के अड़ जाने के बाद अमेरिका को भारत को छूट देनी पड़ी। इन्‍हीं रूसी एस-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अहम भूमिका निभाई।

भारत और रूस दोस्‍ती लगतार बढ़ रही


अब ट्रंप ने ऐलान किया है कि भारत के रूस से दोस्‍ती रखने पर वह पेनाल्‍टी भी लगाने जा रहे हैं। ट्रंप ने रूस से ऊर्जा के साथ-साथ बड़े पैमाने पर हथियार खरीदने के लिए भी भारत की आलोचना की। भारत और रूस के बीच ऊर्जा के अलावा बड़े पैमाने पर हथियारों के समझौते दशकों से हुए हैं। भारत रूस के हथियारों का सबसे बड़ा खरीदार है। भारत के पास रूसी मूल के फाइटर जेट, मिसाइल से लेकर सबमरीन तक हैं। हाल ही में ब्रह्मोस मिसाइल ने पाकिस्‍तान में तबाही मचाई थी। सिप्री की रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने पिछले 2 दशक में 65 फीसदी हथियार रूस से लिए हैं। यह करीब 60 अरब डॉलर का है।


व‍िश्‍लेषकों का कहना है कि भारत को हर संकट में रूसी हथियारों से काफी मदद मिली है, फिर वह चाहे कारगिल संकट हो या ऑपरेशन सिंदूर। हालांकि भारत ने अब रूस से हथियारों की खरीद में विव‍िधता को लाना शुरू किया है। साल 2017 से 2022 के बीच में हथियारों का आयात 36 फीसदी तक पहुंच गया है। इसके बाद भी भारत हथियारों की मरम्‍मत, कलपुर्जे और तकनीकी सपोर्ट के लिए मास्‍को पर बुरी तरह से निर्भर है। भारत अब पश्चिमी देशों से हथियारों का आयात बढ़ा रहा है। इसमें फ्रांस और अमेरिका प्रमुख देश हैं। इसके बाद भी रूसी हथियार भारत के लिए रीढ़ की हड्डी बने रहेंगे। भारत और रूस के बीच अब व्‍यापार 68.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। उन्‍होंने कहा कि आने वाले समय में हो सकता है कि भारत रूस से कम अमेरिका से ज्‍यादा तेल खरीदे लेकिन हथियारों की खरीद बंद नहीं होने जा रही है। भारत तेल के अलावा कोयला भी रूस से खरीद रहा है। भारत अब ईरान के रास्‍ते रूस से नॉर्थ साऊथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर से जुड़ रहा है। चेन्‍नई व्‍लादिवोस्‍तोक मेरिटाइम कॉरिडोर भी सक्रिय हो गया है।


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