अगर यहां से (वहां) कोई जाता है और कहता है कि आप चुपचाप क्यों खड़े हैं और कुछ क्यों नहीं कह रहे हैं, तो जाहिर है कि वे टिप्पणी करेंगे। समस्या का हिस्सा वे हैं, समस्या का हिस्सा हम भी हैं। और मुझे लगता है कि दोनों को ठीक किये जाने की जरूरत है।
मुफ्त की रेबड़ियां बांटने की संस्कृति से जुड़े एक सवाल के जवाब में जयशंकर ने कहा कि दिल्ली में कुछ लोग इसके उस्ताद हैं। उन्होंने कहा, वे ऐसा कर रहे हैं, क्योंकि उनके पास संसाधन जुटाने की जिम्मेदारी नहीं है। उन्होंने कहा, आप मुफ्त उपहारों के आधार पर देश नहीं चला सकते। कहीं न कहीं, किसी को इसके लिए भुगतान करना ही पड़ता है। जो कोई यहां मुफ्त उपहार दे रहा है, वह कहीं और कुछ ले रहा है।उन्होंने कहा कि मुफ्त की रेबड़ियां बांटने की संस्कृति बेहद गैर-जिम्मेदार तरीके से तेजी से लोकप्रियता हासिल करने का एक माध्यम है और यह टिकाऊ नहीं है।
एस जयशंकर, विदेश मंत्री