उस्मान हादी की हत्या से किसे फायदा? BNP या अवामी लीग नहीं है नाम

Updated on 25-12-2025 01:02 PM
ढाका: भारत विरोधी कट्टरपंथी नेता और ढाका-8 के उम्मीदवार शरीफ उस्मान हादी की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या के बाद बांग्लादेश जल रहा है। पूरे देश में अराजकता, दंगा, आगजनी जैसी घटनाएं सामान्य हो गई हैं। पुलिस जांच का अब तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका है, ना ही किसी संदिग्ध को गिरफ्तार किया गया है। इस बीच बांग्लादेश में आम चुनावों की तारीख नजदीक आ रही है। ऐसे में लोग सवाल पूछ रहे हैं कि उस्मान हादी की हत्या से असल फायदा किसे होगा। हालांकि, फायदा उठाने वालों में शेख हसीना की अवामी लीग और खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) का नाम शामिल नहीं है।

उस्मान हादी के हत्यारे का जमात कनेक्शन


इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, BNP नेता और पूर्व सांसद नीलोफर चौधरी मोनी ने आरोप लगाया कि जमात-ए-इस्लामी के एक वरिष्ठ नेता और सुप्रीम कोर्ट के वकील मोहम्मद शिशिर मोनीर ने पिछले दो सालों में उस्मान हादी को गोली मारने के आरोपी फैसल करीम को दो बार जमानत दिलवाई थी। मोनीर जमात-ए-इस्लामी के छात्र संगठन इस्लामी छात्र शिबिर के पूर्व केंद्रीय सचिव हैं, और सुनामगंज-2 सीट से जमात के टिकट पर फरवरी के चुनाव लड़ रहे हैं।
कौन था उस्मान हादी
शरीफ उस्मान हादी भारत विरोधी एक कट्टरपंथी बांग्लादेशी नेता था। वह शेख हसीना विरोधी इंकलाब मंच का प्रवक्ता भी था। 12 दिसंबर को नकाबपोश, बाइक सवार बंदूकधारियों ने उसे गोली मार दी थी। इसके बाद, बांग्लादेश में कट्टरपंथी समूहों, इस्लामी नेताओं और भारत विरोधी नेताओं ने आरोप लगाना शुरू कर दिया कि शूटर फैसल करीम भारत भाग गया है, जबकि ढाका पुलिस ने कम से कम दो बार कहा कि उसके पास इस बात का कोई सबूत नहीं है कि वह भारत भाग गया है और उसके ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

कट्टरपंथी नेताओं ने बनाया भारत विरोधी माहौल


भारत विरोधी नेताओं और कट्टरपंथी इस्लामी समूहों ने फैसल करीम को अपदस्थ पीएम शेख हसीना की अब प्रतिबंधित अवामी लीग से भी जोड़ा। उन्होंने इसका इस्तेमाल भारत विरोधी भावनाओं को भड़काने के लिए एक और बहाने के रूप में किया। इसके बावजूद, मुहम्मद यूनुस प्रशासन ने औपचारिक रूप से भारत से संपर्क किया और अनुरोध किया कि अगर शूटर भारत में पाया जाता है तो सहयोग करने और उसे वापस भेजा जाए।

भारतीय राजनयिक मिशनों पर हुए हमले


जब कुछ दिनों बाद हादी की मौत की खबर आई, तो इन समूहों ने अपनी भारत विरोधी बयानबाजी तेज कर दी, नारे लगाए और ढाका सहित भारतीय राजनयिक मिशनों को निशाना बनाया। कुछ दिनों बाद रविवार को, बांग्लादेश की स्पेशल ब्रांच और डिटेक्टिव ब्रांच ने माना कि उनके पास संदिग्ध के आखिरी ठिकाने के बारे में कोई खास जानकारी नहीं है और न ही कोई पक्का सबूत है कि वह भारत में घुस गया था। इस बीच, इंकलाब मंच, जो हादी के हमलावरों के लिए न्याय की मांग कर रहा है, ने सोमवार को मुहम्मद यूनुस सरकार को चेतावनी दी, और बड़े पैमाने पर आंदोलन के ज़रिए सरकार को गिराने की धमकी दी।

हादी की मौत से कट्टरपंथियों को फायदा


पेरिस में रहने वाले बांग्लादेशी मूल के राजनीति एक्सपर्ट नाहिद हेलाल ने तर्क दिया है कि हादी की हत्या से "असली फायदे में जमात और उससे जुड़े कट्टरपंथी गुट दिख रहे हैं"। "इस हत्या ने उन्हें ठीक वही दिया जिसकी उन्हें ज़रूरत थी: अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने का बहाना, मीडिया आउटलेट्स पर हमला करने और डराने-धमकाने का बहाना, और अवामी लीग के और कार्यकर्ताओं की हत्या करने का मौका, और सबसे जरूरी बात, चुनाव को पूरी तरह से बाधित करने या पटरी से उतारने का एक तरीका।" हादी की हत्या पर अपने YouTube वीडियो में, हेलाल ने कहा कि न तो BNP और न ही अवामी लीग को फायदा होगा। उन्होंने बताया कि BNP के सीनियर नेता मिर्ज़ा अब्बास ढाका-8 सीट से चुनाव लड़ रहे थे, जबकि हादी एक आज़ाद उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे थे।

एनसीपी और छात्र शिबिर फायदे में


उन्होंने कहा, "राजनीतिक तौर पर, हादी और मिर्जा अब्बास का कोई मुकाबला नहीं था। वह अधिक लोकप्रिय और एक सीनियर राजनेता हैं, जबकि हादी राजनीतिक तौर पर अहम नहीं थे.... हालांकि, ढाका-8 सीट पर इस्लामी छात्र शिबिर के केंद्रीय नेता मोहम्मद अबू सादिक कायएम भी चुनाव लड़ रहे हैं। इसलिए, रणनीतिक तौर पर, हादी को हटाने से जमात शिबिर के लिए एक मौका बन गया है।" उन्होंने आगे कहा, "असली फायदे में NCP और जमात शिविर जैसे कट्टरपंथी हैं, जो असल में यूनुस के साथियों के साथ हैं जो अस्थिरता से फायदा उठाते हैं।

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