बेंच में कौन, याचिका किसकी? फ्री स्पीच पर फैसले का आधार कानून हो न कि जजों के निजी विचार

Updated on 08-04-2023 06:20 PM
आर जगन्नाथन
एक मीडिया चैनल के फ्री स्पीच के अधिकार को बरकरार रखते हुए सरकार की आलोचना करते सुप्रीम कोर्ट के फैसले से कुछ लोगों को असंतोष हो सकता है। मामला मध्यमम ब्रॉडकास्टिंग लिमिटेड के स्वामित्व वाले मलयालम चैनल मीडिया वन से जुड़ा हुआ है जिसमें चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली दो जजों की बेंच ने चैनल के ब्रॉडकास्टिंग लाइसेंस को 4 हफ्ते के भीतर बहाल करने का आदेश दिया है।

अलग-अलग परस्परविरोधी फैसले
फैसले का निश्चित तौर पर स्वागत किया जाएगा कि शीर्ष अदालत ने मीडिया की आजादी के पक्ष में साफ-साफ बयान रखा है। फैसले में कहा गया है, 'मीडिया चैनल को संविधान के तहत अपना विचार रखने का अधिकार है लेकिन उसके विचारों के आधार पर उसे सिक्यॉरिटी क्लियरेंस नहीं देने का अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और खासकर प्रेस फ्रीडम पर बुरा असर पड़ेगा...प्रेस की आजादी पर पाबंदी से नागरिक भी उसी तरह सोचने को मजबूर होंगे। एक ही तरह का विचार लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा पैदा करेगा।'
इस बारे में कोई संदेह नहीं है। लेकिन ऊपर कहे गए शब्दों पर ध्यान दीजिए जिसमें कहा गया है कि चैनल को 'संविधान के तहत विचार रखने का अधिकार है।' संविधान यह नहीं बताता कि कोई कैसा विचार रख सकताहै लेकिन इसने अभिव्यक्ति की आजादी पर कई तरह के अंकुश लगाए हैं खासकर उनपर जिनसे सामाजिक शांति और पब्लिक ऑर्डर को नुकसान पहुंचता हो। आर्टिकल 19 (2) में कई कारणों का जिक्र है जो फ्री स्पीच पर अंकुश लगाते हैं। मसलन, 'भारत की संप्रभुता और अखंडता के हित में, राज्य की सुरक्षा, विदेशी राज्यों के साथ मित्रतापूर्ण संबंध, पब्लिक ऑर्डर, नैतिकता या मर्यादा या कोर्ट की अवमानना, मानहानि या किसी अपराध के लिए उकसावा।'

चूंकि अंकुश का दायरा इतना विस्तृत है कि किसी के लिए समझना आसान नहीं है कि अदालतें किस आधार पर अभिव्यक्ति पर लगी किसी बंदिश को देखेंगी कि किस केस में यह वैध हैं, किस केस में नहीं। बंदिश चाहे आम नागरिक की अभिव्यक्ति पर हो या फिर मीडिया के। असल में फ्री स्पीच से जुड़े मामलों में अदालतों के फैसले अक्सर सनक भरे लगते हैं। यहां तक कि सीजेआई की बेंच जब यह फैसला सुना रही थी तब एक दूसरी बेंच 'हेट स्पीच' पर सुनवाई कर रही थी बिना इस शब्द को परिभाषित किए हुए।

एक अन्य बेंच (जो अभी गठित नहीं हुई है) को राजद्रोह से जुड़े कानूनों पर विचार करना है। और कुछ पिछले फैसले भी दो तरह के हैं। 2010 में सुप्रीम कोर्ट के दो जजों पी सदाशिवम और एचएल दत्तू की बेंच (दोनों बाद में चीफ जस्टिस बने) ने इस्लाम की आलोचना करने वाली किताब पर लगे प्रतिबंध को बरकरार रखा था। बेंच ने कहा, 'हम आपके अधिकार (फ्री स्पीच) के खिलाफ नहीं हैं। लेकिन हम सार्वजनिक हित और देश की सार्वजनिक शांति के पक्ष में ज्यादा हैं।'
2017 में, एक अन्य बेंच ने और उस बार एक और सीजेआई दीपक मिश्रा की अगुआई वाली बेंच ने एक किताब को प्रतिबंधित करने से इनकार किया। उस बेंच में मौजूद सीजेआई भी थे। कांचा इलैया की 'सामाजिका स्मगलरेलु कोमातुल्लु' शीर्षक वाली किताब पर फ्री स्पीच के आधार पर बैन लगाने से इनकार कर दिया जो कथित तौर पर समूचे वैश्य समुदाय का अपमान करती है। हाल में एक निचली अदालत ने राहुल गांधी के बयान के खिलाफ शिकायत को सही ठहराया था जिसमें उन्होंने कथित तौर पर मोदी उपनाम को लेकर टिप्पणी की थी। इसके लिए उन्हें मानहानि का दोषी ठहराते हुए 2 साल जेल की सजा सुनाई गई।

कानून मायने रखना चाहिए, न कि जज के विचार
पहला पॉइंट ये है कि अगर फ्री स्पीच के उच्च सिद्धातों को अदालतें सही ठहराती हैं तो उनके फैसलों में एकरुपता, स्थायित्व होना चाहिए। ऐसा नहीं होना चाहिए कि अदालत का कोई फैसला कोर सिद्धांतों के बजाय उसके बारे में किसी जज के विचारों पर आधारित हो।

सीनियर ऐडवोकेट सौरभ किरपाल जिनके नाम की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट जज के लिए की गई है, उन्होंने एक लिटरेचर फेस्टिवल में कहा, 'आपका केस कहां जाता है, किन दो जजों के पास जाता है, उस पर निर्भर करता है, अलग-अलग जजों के यहां नतीजा एकदम अलग हो सकता है। कुछ जजों के विचार बहुत रुढ़िवादी हैं तो कुछ के विचार लिबरल हैं। कुछ एकदम से सरकार-विरोधी हैं तो कुछ एकदम से सरकार-समर्थक हैं। सरकार सही है या गलत, ये उसके वैचारिक मान्यताओं पर निर्भर नहीं करता बल्कि ये सिर्फ उनके विचार हैं।'
हर किसी को ये सवाल क्यों पूछना चाहिए : अगर फैसले इस पर निर्भर करते हैं कि बेंच में कौन बैठा है या याचिका दाखिल करने वाला कौन है तो आम लोगों में यह भरोसा कैसे पैदा होगा कि न्याय निष्पक्ष तरीके से किया जा रहा है? हमने एक अन्य बेंच के मामले में देखा जो महाराष्ट्र के कुछ हिंदू संगठनों के खिलाफ हेट स्पीच मामले की सुनवाई कर रही थी। जस्टिस केएम जोसेफ की अगुआई वाली बेंच ने केरल के एक मुस्लिम याचिकाकर्ता के पिटिशन पर सुनवाई कर रही थी लेकिन जब सॉलिसिटर जनरल ने ध्यान दिलाया कि तमिलनाडु में ब्राह्मणों और केरल में हिंदुओं को निशाना बनाकर हेट स्पीच दिए जा रहे हैं तब जज कथित तौर पर मुस्कुराए थे।

फ्री स्पीच पर गाइडलाइंस जरूरी
अपने खिलाफ दर्ज सभी केसों को एक साथ क्लब करने की मांग करने वाली नूपुर शर्मा की याचिका पर सुनवाई करने वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने भी उनके मामले में पूर्वाग्रह से भरी टिप्पणियां की थीं और इन टिप्पणियों की कई रिटायर्ड जजों ने आलोचना की थी। नूपुर शर्मा का सिर कलम करने की मांग करने वाली भीड़ पर भारत में कही की भी कुछ बेंच कुछ भी नहीं कहती बल्कि सिर कलम की मांग कहीं से भी फ्री स्पीच के अधिकार के तहत बिल्कुल तार्किक नहीं मानी जानी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट को फ्री स्पीच से जुड़े मामलों को वैयक्तिक तौर पर जजों के ऊपर नहीं छोड़ना चाहिए। इससे फ्री स्पीच को लेकर विरोधाभासी फैसले ही आएंगे। यही समय है जब 7 या 9 जजों की फुल बेंच फ्री स्पीच से जुड़े सभी फैसलों की समीक्षा करे, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट दोनों लेवल पर।


यही इकलौता रास्ता जिससे एक आम नागरिक भी समझ पाएगा कि फ्री स्पीच की असली सीमा क्या है, क्या वैधानिक है और क्या नहीं। हेट स्पीच को भी साफ-साफ परिभाषित किया जाना चाहिए और पुलिस के लिए एक स्पष्ट गाइडलाइन बननी चाहिए जिससे वे तय कर सकें कि कौन सा भाषण पब्लिक ऑर्डर के लिए खतरा है जिससे चीजें नियंत्रण के बाहर तक हो सकती हैं।

मनमाना न्याय नहीं हो सकता।

अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 01 August 2026
अमरावती: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले के भोगापुरम में अल्लूरी सीताराम राजू अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के उद्घाटन किया। यह हवाई अड्‌डा सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी)…
 01 August 2026
जंतर-मंतर पर पीएम मोदी को गाली देने वाली लड़की ने माफी मांग ली है। उसने वीडियो मैसेज में कहा, ‘मैं सिर्फ 15 साल की हूं, यह मेरी पहली और आखिरी…
 01 August 2026
श्रीनगर, दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में शुक्रवार रात करीब 8:30 बजे पहलगाम जैसा हमला हुआ। आतंकवादियों ने ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे 2 हिंदू मजदूरों को नाम पूछकर गोली मार दी।…
 01 August 2026
बुलंदशहर: वही हुआ जिसका डर था। लोगों की दुआएं काम नहीं आईं। यूपी के बुलंदशहर में नाले में गिरी 11 साल की मासूम चारू कश्‍यप का शव शनिवार सुबह करीब…
 01 August 2026
अहमदाबाद : नीट परीक्षा पेपर लीक को लेकर दिल्ली के बाद देशभर में फैसले Gen Z प्रोटेस्ट के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद नई पीढ़ी से संवाद कर रहे हैं।…
 31 July 2026
नोएडा, जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन में पीएम मोदी को गाली देने वाली नोएडा की लड़की के खिलाफ जीरो FIR दर्ज हो गई है। यह कार्रवाई नोएडा के…
 31 July 2026
मुंबई : खाद्य एवं औषध प्रशासन एफडीए ने बॉम्बे हाई कोर्ट परिसर में संचालित हाई कोर्ट स्टाफ को-ऑपरेटिव कैंटीन को नोटिस जारी कर तत्काल खाद्य व्यवसाय बंद करने का निर्देश…
 31 July 2026
पटना: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में वोटिंग समाप्त होते ही दावों का संसार बसाया जाने लगा। जीत का दावा तो सभी प्रमुख पार्टियां कर रही हैं। पार्टियां अपने-अपने चुनावी समीकरण और…
 31 July 2026
मुंबई: महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई वाली महायुति सरकार ने राज्य की लाडली बहन योजना को लेकर स्थिति साफ कर दी है। सरकार ने योजना के लांच होने…
Advt.