न्यूयॉर्क डिक्लेरेशन का भारत ने क्यों किया सपोर्ट, इजरायल या फिलिस्तीन किसे होगा फायदा, यूं समझें

Updated on 13-09-2025 02:30 PM
न्यूयॉर्क: भारत ने बड़ा कदम उठाते हुए शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में उस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया है, जो फिलिस्तीन मुद्दे के शांतिपूर्ण हल और दो-राज्य समाधान के कार्यान्वयन पर 'न्यूयॉर्क घोषणापत्र' का समर्थन करता है। प्रस्ताव को फ्रांस ने पेश किया, जिसके समर्थन में 142 देशों ने मतदान किया था जबकि 10 ने विरोध में वोट डाला। 12 देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। भारत उन 142 देशों में शामिल था, जिन्होंने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया था।

सभी खाड़ी देशों ने इसका समर्थन किया, जबकि इजरायल, अमेरिका, अर्जेंटीना, हंगरी, माइक्रोनेशिया, नाउरू, पलाऊ, पापुआ न्यू गिनी, पैराग्वे और टोंगा ने इसके विरोध में मतदान किया। यह घोषणापत्र जुलाई में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बांटा गया था। इस सम्मेलन की सह-अध्यक्षता फ्रांस और सऊदी अरब ने की थी। इसका उद्देश्य दशकों पुराने संघर्ष को सुलझाने के लिए रुकी हुई वार्ता को फिर से शुरू करना था।

न्यूयॉर्क घोषणापत्र क्या है?

सात पेज के घोषणापत्र में, नेताओं ने 'गाजा में युद्ध को समाप्त करने, द्वि-राष्ट्र समाधान के प्रभावी कार्यान्वयन के आधार पर इजराइल-फलस्तीनी संघर्ष का न्यायसंगत, शांतिपूर्ण और स्थायी समाधान हासिल करने और फलस्तीनियों, इजराइलियों और क्षेत्र के सभी लोगों के लिए एक बेहतर भविष्य का निर्माण करने के लिए सामूहिक कार्रवाई करने पर सहमति व्यक्त की।’’
घोषणापत्र में इजराइली नेतृत्व से एक संप्रभु और व्यवहार्यपरक फलस्तीनी देश समेत द्वि-राष्ट्र समाधान के लिए स्पष्ट सार्वजनिक प्रतिबद्धता जारी करने का आह्वान किया गया। इसमें इजराइल से ‘‘फलस्तीनियों के खिलाफ हिंसा और उकसावे को तुरंत समाप्त करने, पूर्वी यरुशलम समेत कब्जे वाले फलस्तीनी क्षेत्र में सभी बस्तियों, भूमि हड़पने और विलय की गतिविधियों को तुरंत रोकने..’’ का भी आह्वान किया गया है

प्रस्ताव पर तिलमिलाया इजरायल

यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है, जब इजरायल ने वेस्ट बैंक पर कब्जे की योजना का खुलासा किया है। इजरायल प्रस्ताव से इतना तिलमिलाया है कि उसने इसे खारिज करते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा को राजनीतिक सर्कस बता दिया। इजरायली विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ओरेन मार्मोरस्टीन ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, एक बार फिर फिर यह साबित हो गया है कि महासभा वास्तविकता से दूर एक राजनीतिक सर्कस है। इस प्रस्ताव द्वारा समर्थित घोषणा के दर्जनों खंडों में एक भी उल्लेख नहीं है कि हमास एक आतंकवादी संगठन है।

अमेरिका ने कहा- हमास को गिफ्ट

संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी मिशन ने भी प्रस्ताव का विरोध किया है। अमेरिकी राजनयिक मॉर्गन ऑर्टागस ने इसे राजनीतिक दिखावा बताया है। उन्होंने कहा, इसमें कोई संदेह नहीं कि यह प्रस्ताव हमास को एक तोहफा है। अमेरिका ने जुलाई के सम्मेलन और उसके बाद उस प्रस्ताव का विरोध किया था, जिसमें इस घोषणा का समर्थन किया गया था।

भारत ने क्यों किया समर्थन?

यह प्रस्ताव फिलिस्तीन पर भारत की आधिकारिक नीति का समर्थन करता है, जिसमें शांतिपूर्ण तरीके से दो-राज्य समाधान की बात कही गई है। गौरतलब है कि भारत ने गाजा पर इजरायल के हमलों की निंदा समेत कई प्रस्तावों पर मतदान में भाग नहीं लिया था, लेकिन इस बार इसने वोटिंग की है। पिछले हफ्ते जब इजरायल ने कतर पर बमबारी की, तो प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी निंदा की थी। प्रधानमंत्री ने कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी से भी बात की और इजरायली हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त की।

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