इजरायली विमानों से बरसती मौत के बावजूद क्‍यों घर नहीं छोड़ना चाहते उत्‍तरी गाजा के लोग? सता रहा बड़ा डर

Updated on 23-10-2023 02:19 PM
गाजा पट्टी: 7 अक्टूबर के बाद से गाजा पट्टी में लगातार इजरायल के हमले हो रहे हैं। इन हमलों में दो हजार से ज्यादा मौतों का दावा किया जा रहा है और भारी तबाही हो रही है। गाजा के लोगों के सामने इस समय किसी तरह से अपनी जान बचाने की चुनौती है। ऐसे में गाजा के निकलने के इकलौते जमीनी रास्ते राफा बॉर्डर क्रॉसिंग पर हजारों लोग जमा हो रहे हैं। इसके उलट उत्तरी गाजा के लोग घरों को छोड़ने पर उलझन में हैं। इजरायल ने उत्तरी गाजा के लोगों को यहां से चले जाने के लिए कह दिया है और हवाई हमलों से भी तबाही मचाई है। इस सबसे यहां लोगों में दहशत तो है लेकिन वो घरों को छोड़कर नहीं जाना चाहते हैं।

एनबीसी न्यूज ने उत्तरी गाजा में रहने वाले नोवार दायब से बात करते हुए एक रिपोर्ट की है। 20 साल की छात्रा दायब बताती हैं कि उनको और उनके परिवार को इजरायल की बमबारी के बाद पांच दिनों में तीन बार इधर-उधर भागना पड़ा है। अपनी सुरक्षा के लिए उन्होंने घर छोड़ने का फैसला लिया। जब वो जा रही थी तो उसे लगा कि वह एक बड़ी गलती दोहरा रही है। इससे उसके लिए वापसी के सभी रास्ते बंद हो जाएंगे। एक फिलिस्तीनी नागरिक ने एनबीसी न्यूज से कहा कि उसको उन्हें डर है कि हमास के 7 अक्टूबर के हमले का इस्तेमाल इजरायल गाजा पट्टी से फिलिस्तीनियों को स्थायी रूप से बाहर निकालने के लिए कर रहा है।

इजरायल पर यकीन नहीं कर रहे फिलीस्तीनी


इजरायल का कहना है कि उसकी ओर से फिलिस्तीन के लोगों की सुरक्षा के लिए उत्तरी गाजा छोड़ने के लिए कहा गया है। उनका लक्ष्य हमास को नष्ट करना है ना कि फिलीस्तीन के आम नागरिकों को नुकसान पहुंचाना। इजरायल के इस दावे पर फिलीस्तीनी यकीन नहीं कर रहे हैं। लंदन में रहने वाली 22 साल की फिलीस्तीन की लड़की लायल लुए ने कहा कि उसने हमास के हमले का वह समर्थन नहीं करती है लेकिन वो जानती है कि इस हमले का इस्तेमाल फिलीस्तीन के लोगों को उनके घरों से खदेड़ने में हो रहा है।

लुए और दायब का कहना है कि ये ऐसा ही होता लग रहा है, जैसा 1948 में इजरायल की स्थापना के समय हुआ। जब करीब 750,000 फिलिस्तीनियों को उनके घरों से जबरन हटा दिया गया। एक बार फिर फिलीस्तीनियों की मूल पहचान को खत्म करने की कोशिश हो रही है। एक बार उत्तरी गाजा को खाली करके जाने के बाद यहां वापसी संभव नहीं हो सकेगी। ऐसे में यहां बहुत से लोग बरसती मौत के बावजूद अपने घरों को छोड़ना नहीं चाहते हैं।


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