लाल सागर में जहाजों को हूतियों से बचा पाएगा अमेरिका? क्या भारत आ रहे शिप का अपहरण ईरान से कराएगा युद्ध

Updated on 21-11-2023 01:08 PM
तेल अवीव: रविवार को यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में एक जहाज को हाईजैक कर लिया। जहाज का नाम गैलेक्सी लीडर है, जो 189 मीटर लंबा है। इस जहाज में कारों का ट्रांसपोर्ट किया जाता है। जिस समय इसे हाईजैक किया गया तब यह तुर्की से भारत के लिए रवाना हुआ था। हूती विद्रोहियों की ओर से जारी किए गए वीडियो में दिख रहा है कि हेलीकॉप्टर के जरिए कई हथियारबंद लोग जहाज पर उतरते हैं। बाद में यह उसके कंट्रोल रूम में घुस जाते हैं। यहां से वह कप्तान को जहाज यमन के होदेइदा बंदरगाह ले जाने को कहते हैं। इस दौरान एक भी गोली नहीं चलाई गई। लेकिन जहाज के अपहरण से चिंता बढ़ गई है।

यह हाईजैक इजरायल और हमास के युद्ध को और भी आगे बढ़ा सकता है। वहीं, सबसे बड़ी चिंता है कि इस अपहरण से सीधे तौर पर ईरान और अमेरिका में संघर्ष बढ़ सकता है। हूती प्रवक्ता याह्या सारे ने पुष्टि की है कि जहाज इजरायली स्वामित्व वाला था, जिस कारण इसे जब्त किया गया। इस हाईजैक से पहले हूती विद्रोहियों ने धमकी देते हुए कहा था, 'लाल सागर या किसी भी जगह जहां हम पहुंच सकते हैं, वहां किसी भी इजरायली जहाज को निशाना बनाने से संकोच नहीं करेंगे।' हूतियों के दावे के बावजूद भी इजरायल ने इससे अपने संबंधों को लेकर इनकार किया है। हालांकि रिपोर्ट्स के मुताबिक इसका स्वामित्व इजरायल के सबसे अमीर व्यक्तियों में से एक के पास है।

इस रास्ते से गुजरते हैं 17000 जहाज

लाल सागर इस दुनिया का सबसे प्रमुख शिपिंग रूट है। ज्यादातर लाल सागर का हिस्सा 200 किमी चौड़ा है। लेकिन दक्षिण में बाब अल-मन्देब मार्ग के पास यह बेहद पतला हो जाता है। तब इसकी चौड़ाई सिर्फ 20 किमी रह जाती है। यह चोक पॉइंट यमन के टापू मय्यून से जिबूती और इरिट्रिया के बीच में है। हर साल लगभग 17000 से ज्यादा जहाज इसके जरिए गुजरते हैं। हर रोज लगभग 50 जहाज यहां से जाते हैं। गैलेक्सी लीडर जहाज पर बहामा का झंडा लगा था। वहीं जहाज को एक जापानी कंपनी चलाती है। क्रू मेंबर में लगभग पांच से ज्यादा देशों के लोग थे, लेकिन इनमें कोई भी इजरायली नहीं था।

शिपिंग इंडस्ट्री में जहाजों पर लगा झंडा देश के रजिस्ट्रेशन को दिखाता है न कि कंपनी के मालिकाना हक को। बहामा में कम टैक्स और लचीले श्रमिक कानून हैं। इस कारण कंपनियां जहाजों का रजिस्ट्रेशन यहां कराती हैं। जापान की निप्पॉन युसेन काबुशिकी कैशा इसी झंडे के जरिए 818 जहाजों को चलाती है। हर महीने यहां से गुजरने वाले 1,500 जहाजों में से कई ऐसे हो सकते हैं जो इजरायल से जुड़े हों। इस कारण हूतियों के अपहरण की चिंता बढ़ी हुई है।

कैसे रुकेगा हाईजैक?

हाईजैक को रोकने से जुड़े बेहद लिमिटेड विकल्प हैं। जिनमें पहला सैन्य जहाजों को वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा के लिए लगाना, दूसरा हूतियों को समुद्र में कमजोर करना और तीसरा हूतियों को अपहरण न करने के लिए मनाना है। अगर सैन्य जहाज की बात करें तो सबसे पहला सवाल है कि सेना कौन मुहैया कराएगा। लाल सागर से सऊदी और मिस्र की सीमा लगती है और दोनों के पास ही मजबूत नौसेना है। लेकिन सऊदी हूथियों के साथ संघर्ष नहीं करेगा। वहीं मिस्र भी तटस्थ रहने की कोशिश में है, जिस कारण वह भी पंगा नहीं लेगा। इजरायल क्योंकि युद्ध में फंसा है, ऐसे में वह भी अपनी नेवी नहीं उतार सकता। अंत में अमेरिकी नौसेना ही इस काम के लिए बचती है।

क्या विकल्प आ सकते हैं काम?

7 अक्टूबर के बाद अमेरिका ने एयरक्राफ्ट कैरियर के साथ-साथ कई युद्धपोत इस क्षेत्र में उतारे हैं। इजरायल , लेबनान, सीरिया और इराक तक यह बैलेंस बनाए हुए हैं, ऐसे में अमेरिका के पास भी विकल्प बेहद कम हैं। हालांकि स्वेज नहर के दक्षिण में मौजूद अमेरिका का एक जहाज वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा कर सकता है। लेकिन इसे भी गाजा की सुरक्षा के लिए यहां तैनात किया गया है। हूतियों पर हमले का भी विकल्प अच्छा नहीं होगा, क्योंकि इससे संघर्ष और भी बढ़ेगा। ऐसे में बातचीत का विकल्प भी है। लेकिन इसमें ईरान की भूमिका होगी। अगर गैलेक्सी लीडर को हूतियों ने स्वतंत्र रूप से हाईजैक किया है तो ईरान के साथ अमेरिका कूटनीतिक बातचीत से नए अपहरण न होने का हल निकाल सकता है।


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