कम से कम ढाई हजार फिल्में की होंगी
बकौल आमिर, 'मैं गिनने बैठूं तो अब तक ढाई हजार से कम फिल्में नहीं की होंगी। छोटे-छोटे, पासिंग रोल, कहीं पार्टी में खड़ा हूं, कहीं गाने में। मुझे जहां पैसा मिला मैं खड़ा हो जाता था। तब एक दिन के आठ रुपये, दस रुपये मिलते थे, पर मेरे को आदत हो गई थी कि चलो, पैसा मिल रहा है न। मैं हर काम करता था। मुझे बस ये था कि रोज पैसा मिलना चाहिए। मैंने कभी बड़े रोल या एक्टर बनने का नहीं सोचा, क्योंकि उसमें किस्मत चमक भी सकती है, मगर उल्टा भी हो सकता है कि आपके पास कोई काम ही नहीं है। फिर, एक जूनियर आर्टिस्ट मुख्य कलाकारों से कई गुना ज्यादा फिल्में करता है। जहां बोला, सीन में खड़े हो गए, पैसे लेकर घर आ गए।'
'अक्षय, शाहरुख, अमिताभ का स्ट्रगल देखा है'
आमिर के पास फिल्म इंडस्ट्री और स्टार्स से जुड़े कई रोचक किस्से हैं। वो बताते हैं, 'अमिताभ बच्चन की पहली फिल्म 'सात हिंदुस्तानी' में भी मैंने काम किया है। तब वो बड़े ही दुबले पतले, लंबे, सांवले से दिखते थे। मैंने तब उनको लोकल ट्रेन में ट्रैवल करते देखा है। अक्षय कुमार और शाहरुख खान को भी मैंने हीरो बनने से पहले से देखा है। अक्षय कुमार को तो अक्षय कुमार एक जूनियर आर्टिस्ट ने ही बनाया, जिसका नाम है गणेश नागपाल। मैंने अपनी आंखों से नटराज स्टुडियो में गणेश नागपाल को निर्माता प्रमोद चक्रवर्ती से अक्षय कुमार की सिफारिश करते देखा है। गणेश के कहने पर ही प्रमोद चक्रवर्ती ने अक्षय कुमार को 'सौगंध' में लीड रोल दिया।
शाहरुख-सलमान पूछ लेते थे हाल-चाल
आमिर ने आगे कहा, 'ऐसे ही मैंने शाहरुख खान को पहली बार रिजवी कॉलेज के पास अजीज मिर्जा के यहां जाते हुए देखा था। तब अजीज मिर्जा के भाई सईद मिर्जा से मेरी अच्छी दुआ-सलाम थी। तब शाहरुख हीरो नहीं थे। बाद में अजीज मिर्जा ने उनको 'सर्कस' में काम दिया। मैंने भी शाहरुख की बहुत सी फिल्मों 'फिर भी दिल है हिंदुस्तानी', 'बाजीगर', 'बादशाह', 'हैप्पी न्यू ईयर' में काम किया। ये है कि शाहरुख पहचानते हैं और अब तो हीरो लोगों की बहुत सिक्योरिटी, गार्ड सब हो गए हैं, वरना शाहरुख हुए, सलमान खान हुए, हालचाल पूछ लेते थे।'
'एक्स्ट्रा या फालतू नहीं, कलाकार है हम'
क्या किसी निर्माता या कलाकार ने जूनियर आर्टिस्ट होने के नाम आमिर के साथ कमतर बर्ताव किया? इस पर वह कहते हैं, 'एक्टर्स ज्यादातर नेकदिल हैं, खास तौर पर पहले के जमाने के। शाहरुख खान, सलमान खान तो इतने बड़े स्टार हैं, पर जूनियर आर्टिस्ट से अपनेपन से ही पेश आते हैं। शाहरुख ने मेरे कहने पर मेरे दोस्त की मां का दिल का ऑपरेशन करवा दिया था।
कुछ सख्तदिल एक्टर्स भी होते थे!
वो बताते हैं, 'हां, कुछ एक्टर्स घमंड में भी रहते हैं, जूनियर आर्टिस्ट्स को इग्नोर करते हैं। जैसे, राजेंद्र कुमार इग्नोर करते थे। अभी एक बहुत सीनियर एक्टर है। एक दिन शूट पर एक जूनियर आर्टिस्ट की मौत हो गई तो सबने काम बंद कर दिया। वो एक्टर आया, कहने लगा- काम नहीं बंद होगा, द शो मस्ट गो ऑन। ऐसे सख्तदिल एक्टर भी हैं। फिर एक डायरेक्टर से मैंने एक्स्ट्रा कहने पर झगड़ा कर लिया था। ऐड फिल्म की शूट थी। वो डायरेक्टर बार-बार इंग्लिश में कॉल एक्स्ट्राज, कॉल एक्स्ट्रा कर रही थी। मुझे गुस्सा आया। मेरी इंग्लिश बहुत अच्छी है, तो मैंने कहा- मैम, वी आर नॉट एक्स्ट्रा। वी आर स्क्रीन एक्टर्स। एक्स्ट्रा मीन्स फालतू, वी आर नॉट फालतू। उन्हें तुरंत अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने मुझे सॉरी कहा।'
आमिर के परिवार का सिनेमा से जुड़ाव
आमिर की अगली पीढ़ी यानी उनका बेटा और बेटी भी एक्टिंग के पेशे में ही हैं। बेटा जावेद जहां जूनियर आर्टिस्ट के तौर पर 'धूम', 'धमाल', 'वन टू का फोर', 'बिल्लू' जैसी फिल्मों का हिस्सा रहे हैं, वहीं बेटी अलीजा 'घर की लक्ष्मी बेटियां', 'प्यार का दर्द है मीठा मीठा प्यारा प्यारा', 'मैडम सर' जैसे कई फेमस टीवी शोज में एक्टिंग कर चुकी है।
'हक के पैसे भी नहीं देना चाहते कई प्रोड्यूसर'
हालांकि, आमिर किसी को जूनियर आर्टिस्ट के पेशे में आने की सलाह नहीं देते। वह कहते हैं, 'इस लाइन में बहुत मुश्किलें हैं। हमारे कार्ड पर ही लिखा होता है- काम की कोई गारंटी नहीं। न कोई फंड है, न क्रेडिट। उम्र ढलने के बाद काम भी कम हो जाता है। आज इतना सीनियर होने के बावजूद मुझे चार-पांच दिन भी काम के लिए भी राह देखना पड़ता है। जब जवान थे तो लगभग हर फिल्म में होते थे। तब एक दिन का 20 रुपये पेमेंट होता था। आज फिल्म में आठ घंटे की शिफ्ट के 1250 रुपये मिलते हैं। लेकिन कई प्रड्यूसर वो भी नहीं देना चाहते, तो वो हमारे बजाय नॉन कार्ड वालों को ले लेते हैं। पहले मुंबई में शूटिंग होती थी, अब बाहर जाकर किसी के साथ भी शूटिंग कर लेते हैं। बोलते हैं वहां फ्री में भीड़ मिल जाती है, लेकिन हमारे पेट पर तो आप लात मार रहे हैं।'