बिलावल भुट्टो यूं ही नहीं आ रहे गोवा, एक मजबूरी के चलते पाकिस्‍तानी विदेश मंत्री ने भारत के सामने घुटने टेके

Updated on 04-05-2023 06:57 PM
इस्‍लामाबाद: पाकिस्‍तान (Pakistan) के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो (Bilawal Bhutto) जो कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) तो कभी कश्‍मीर (Kashmir) पर विवादित बयान देने के आदी रहे हैं, चार और पांच मई को भारत में हैं। 34 साल के बिलावल शंघाई को-ऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO Summit 2023) के विदेश मंत्रियों की एक मीटिंग में शिरकत करेंगे। साल 2001 में शुरू हुए एससीओ का मकसद एशिया में विकास और सुरक्षा सहयोग को आगे बढ़ाना था। इस सम्‍मेलन से कुछ खास निकलेगा, इस बात की गुंजाइश तो बहुत कम है। ले‍किन इसके बाद भी इस सम्‍मेलन पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं और बिलावल उसकी इकलौती वजह हैं। जुलाई में भारत की राजधानी नई दिल्‍ली में एससीओ सम्‍मेलन होना है जिसमें सभी सदस्‍य देशों के मुखिया शामिल होंगे।

पाकिस्‍तान की मजबूरियां
बिलावल साल 2011 के बाद से भारत आने वाले पाकिस्‍तान के पहले विदेश मंत्री हैं। विल्‍सन सेंटर में दक्षिण एशिया इंस्‍टीट्यूट के डायरेक्‍टर माइकल कुगलमैन ने फॉरेन पॉलिसी मैगजीन में लिखा है कि पाकिस्‍तान की सरकार बिलावल की भारत यात्रा को एसीसीओ के साथ संपर्क मजबूत करने और विदेश नीति को आग बढ़ाने वाले अवसर के तौर पर ही देख रही है न कि भारत के साथ संबंधों को सुधारने की कोशिश के तहत।

पाकिस्‍तान के लिए एससीओ के काफी फायदे हैं या यूं कहें मजबूरियां हैं। चीन जहां हमेशा से पाकिस्‍तान का करीबी सहयोगी और परममित्र रहा है तो वहीं रूस के साथ भी उसके रिश्‍ते अब आगे बढ़ रहे हैं। एससीओ की आधी सदस्यता मध्य एशिया के देशों के पास है। यह वह क्षेत्र है जहां पाकिस्तान हमेशा से व्यापार और संपर्क बढ़ाने के लिए आपसी जुड़ाव को गहरा करने की उम्मीद करता आया है।
पाकिस्‍तान की चाल
कुछ बहुपक्षीय संगठनों में जिनमें भारत और पाकिस्तान दोनों शामिल हैं, वहां वह नुकसान में है क्योंकि भारत इसमें सबसे शक्तिशाली सदस्य है जैसे कि सार्क। लेकिन एससीओ में भारत का दबदबा उसके रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी चीन की उपस्थिति के आगे कमजोर पड़ जाता है। यूक्रेन की जंग ने रूस को चीन के करीब ला दिया है। इसका मतलब यही है कि एससीओ के अंदर रूस का प्रभाव कम हो सकता है और चीन इसमें मजबूत सदस्‍य बन सकता है।

पाकिस्तान की तरह, भारत भी संसाधनों से अमीर मध्य एशियाई देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने और सहयोग को बढ़ाने की उम्‍मीद करता है। मध्‍य एशिया अब भारत पाकिस्‍तान के बीच जंग का नया अखाड़ा बन चुका है। भारत के पास मध्य एशिया के प्रमुख देश अफगानिस्तान में दाखिल होने के लिए डायरेक्‍ट एंट्री नहीं है। लेकिन इसने क्षेत्र में सरकारों के साथ बातचीत करके नया सिस्‍टम बनाकर इस कमी को पूरा किया गया। गोवा में पाकिस्तान की मौजूदगी का मकसद यह इशारा हो सकता है कि वह मध्य एशिया भारत को और हावी होने नहीं देगा। पाकिस्तान भी बिलावल की यात्रा को द्विपक्षीय दृष्टिकोण से नहीं देख रहा है।

कमजोर सरकार से बात नहीं
ऐसी खबरें आई थीं कि पाकिस्तान ने ब‍िलावल और उनके भारतीय समकक्ष एस जयशंकर के बीच एक मीटिंग की रिक्‍वेस्‍ट की थी। मगर पाकिस्तानी अधिकारियों ने इसे खारिज कर दिया। किसी भी तरह से, पाकिस्तानी विदेश मंत्री की यात्रा को सुलह प्रक्रिया शुरू करने के प्रयास के रूप में देखना गलत होगा। कुगलमैन मानते हैं कि भारत, पाकिस्‍तान में एक कमजोर और अलोकप्रिय प्रशासन के साथ बातचीत करने के लिए अपनी राजनीतिक पूंजी नहीं खर्च करना चाहेगा, खासकर तब जब भारत में बस एक साल बाद ही आम चुनाव होने हैं।

मजबूरी के चलते पहुंचेंगे गोवा
बिलावल की यात्रा पाकिस्तान के लिए एक मजबूरी है और द्विपक्षीय नहीं है। अगर वह गोवा नहीं आते तो पाकिस्‍तान संगठन में अपनी स्थिति कमजोर कर सकता था। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ दबदबा खोने का जोखिम नहीं उठाएंगे वह भी तब जब इसमें एक सहयोगी यानी चीन का प्रभाव काफी ज्‍यादा है। साथ ही इसमें वो सदस्य शामिल हैं जो पाकिस्‍तान के साथ गहरे संबंध बनाने के इच्छुक हैं। पाकिस्‍तान को लगता है कि ये देश भारत के प्रभाव को सीमित कर सकते हैं।

अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 24 September 2026
न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) सुधारों का भारत समेत G4 के सभी सदस्यों ने समर्थन किया है। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के दौरान G4…
 24 September 2026
वॉशिंगटन: भारत 'मिडिल पावर्स' (मध्यम दर्जे की ताकतों) के एक नए मल्टीलेटरल (बहुपक्षीय) ग्रुप में शामिल हुआ है। यह ग्रुप पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म (P4M) है। विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर ने…
 24 September 2026
इस्लामाबाद: पाकिस्तान ने मक्का समझौते के जरिए सऊदी अरब और तुर्की के साथ रक्षा संबंध मजबूत किए हैं। साथ ही खाड़ी देशों की सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाने की उसकी…
 24 September 2026
न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच से भारत के दोस्त ने साइप्रस ने तुर्की को करारा जवाब दिया है। तुर्की के राष्ट्रपति ने निकोस क्रिस्टोलाइट्स ने महासभा को संबोधित…
 24 September 2026
तेहरान: ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची की न्यूयॉर्क में ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के साथ सीधी बातचीत पर तेहरान में कट्टरपंथी भड़क गए हैं। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड…
 24 September 2026
इस्लामाबाद: पाकिस्तान की ओर से एक बार फिर दुनिया के सामने सिंधु जल संधि (IWT) का मामला उठाया गया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने OIC (ऑर्गनाइजेशन ऑफ…
 23 September 2026
न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के इतर 'ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन' (OIC) के जम्मू-कश्मीर कांटेक्ट ग्रुप की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। न्यूयॉर्क में हुई इस…
 23 September 2026
न्यूयॉर्क: तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की बैठक को संबोधित करते हुए कश्मीर का राग अलापा। उन्होंने कश्मीर पर बातचीत करने और…
 23 September 2026
न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच से भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे ने भारत के साथ अपनी अटूट दोस्ती को एक बार फिर दुनिया के सामने रखा है। पीएम…
Advt.