पहले ट्रंप, अब सरकारी आदेश... फैक्‍ट्री होंगी बंद, नौकरी जाएंगी, थिंक टैंक की यह चेतावनी कैसी?

Updated on 13-03-2025 02:39 PM
नई दिल्‍ली: स्‍टील और एल्‍युमीनियम इंडस्‍ट्री की हालत नाजुक है। पहले डोनाल्‍ड ट्रंप के 25 फीसदी टैरिफ ने इसके होश फाख्‍ता कर दिए हैं। अब सरकार के क्‍वालिटी कंट्रोल ऑर्डर्स (क्‍यूसीओ) ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने इसे लेकर चेतावनी दी है। उसने कहा है कि अगले हफ्ते क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर्स लागू होने से स्टील फास्टनर्स (नट, बोल्ट, स्क्रू) के आयात में बाधा पैदा हो सकती है। इससे भारतीय कारखानों में तालाबंदी और नौकरियों के जाने का खतरा मंडरा रहा है। DPIIT ने पिछले साल सितंबर में QCO जारी किया था। इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। बड़ी कंपनियों के लिए 20 मार्च, छोटी कंपनियों के लिए 20 जून और बहुत छोटी कंपनियों के लिए 20 सितंबर से यह आदेश लागू होगा। भारत साधारण फास्टनर्स का उत्पादन करता है। लेकिन, हाई क्‍वालिटी वाले फास्टनर्स के लिए आयात पर निर्भर है। स्टील फास्टनर्स विभिन्न उद्योगों में स्थिरता, स्थायित्व और सुरक्षा के लिए जरूरी हैं।

ट्रंप के टैरिफ से बढ़ी हैं मुसीबतें

ट्रंप ने स्टील और एल्युमीनियम आयात पर 25% टैरिफ लगा दिया है। इसके अलावा, इन धातुओं से बने कई उत्पादों पर भी टैक्स बढ़ा दिया गया है। जैसे नट, बोल्ट, बुलडोजर ब्लेड और सोडा कैन। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इससे अमेरिकी कंपनियों और नौकरियों को फायदा होगा। लेकिन, आलोचकों का मानना है कि इससे कीमतें बढ़ेंगी और व्यापार युद्ध शुरू हो सकता है। यह टैरिफ भारत के स्टील निर्यातकों के लिए चिंता का विषय है। भारतीय स्टील अब अमेरिकी बाजार में महंगा हो जाएगा। इससे भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता कम हो जाएगी। उन्हें दूसरे बाजारों की तलाश करनी पड़ सकती है।
इस बीच ईटी की खबर के मुताब‍िक, भारत में क्‍वालिटी कंट्रोल ऑर्डर्स के कारण स्टील फास्टनरों का आयात बंद हो सकता है। इससे उद्योग बंद हो सकते हैं। नौकरी जा सकती हैं। बड़े उद्योगों के लिए आदेश 20 मार्च से लागू होगा और छोटे उद्योगों के लिए 20 जून और 20 सितंबर से। जीटीआरआई का कहना है कि बीआईएस की जटिल अनुमोदन प्रक्रिया, कठिन प्रक्रियाओं और कम व्यापार की वजह से विदेशी निर्माताओं को रजिस्‍ट्रेशन से हतोत्साहित करती है। इससे सप्‍लाई में कमी आ सकती है।

छोटी मैन्‍यूफैक्‍चर‍िंंग फर्मों पर पड़ेगा ज्‍यादा असर

जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, 'HS कोड वर्गीकरण को लेकर भ्रम की वजह से सीमा शुल्क निकासी में देरी से लागत और अक्षमता बढ़ेगी। यह उन व्यवसायों को प्रभावित करेगा जो पहले से ही सप्‍लाई श्रृंखला व्यवधानों से जूझ रहे हैं।'
उन्होंने आगे कहा कि क्‍यूसीओ के कारण छोटी निर्माण फर्मों, जिन्हें प्रमाणन प्राप्त करने में कठिनाई हो सकती है, के बंद होने का खतरा है। इससे नौकरियों का नुकसान और औद्योगिक ठहराव आ सकता है। जीटीआरआई ने सरकार को क्‍यूसीओ पर पुनर्विचार करने और इसके बजाय एक अधिक व्यावहारिक नजरिया अपनाने का सुझाव दिया है। जैसे अंतरराष्ट्रीय प्रमाणपत्रों की पारस्परिक मान्यता या चरणबद्ध नियामक समायोजन ताकि गुणवत्ता नियंत्रण और उद्योग की जरूरतों के बीच संतुलन बना रहे।
2024 में भारत का ग्‍लोबल स्टील फास्टनर्स आयात 1.1 अरब डॉलर था। इसमें चीन से 30.6 करोड़ डॉलर, जापान से 12.7 करोड़ डॉलर, दक्षिण कोरिया से 11.1 करोड़ डॉलर, जर्मनी से 10.7 करोड़ डॉलर और अमेरिका से 10.4 करोड़ डॉलर का आयात शामिल है। क्‍यूसीओ लागू होने के बाद भारतीय कंपनियों को हाई-क्‍वालिटी फास्टनर्स की कमी का सामना करना पड़ सकता है। यह कई उद्योगों जैसे ऑटोमोबाइल, मैन्‍यूफैक्‍चरिंग और इंजीनियरिंग को प्रभावित कर सकता है। छोटे उत्पादक, जो BIS प्रमाणन प्राप्त करने में असमर्थ हैं, बाजार से बाहर हो सकते हैं। इससे बेरोजगारी बढ़ सकती है।

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