दपूमरे:सिग्नल एवं दूरसंचार विभाग ने किया कवच (ट्रेन कुलीजन एवोइडेंस सिस्टम ) पर संरक्षा गोष्ठी

Updated on 19-10-2022 05:34 PM

बिलासपुर/रायपुर

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के सिग्नल एवं दूरसंचार विभाग द्वारा श्री एस. के. सोलंकी प्रधान मुख्य सिग्नल एवं दूरसंचार इंजीनियर की अध्यक्षता में तथा करीब 20 अधिकारी एवं 50 कर्मचारियों की उपस्थिति में कवच (ट्रेन कुलीजन एवोइडेंस सिस्टम) के बारे में संरक्षा गोष्ठी का आयोजन किया गया।

श्री के. पी. सारस्वत, उप मुख्य संकेत एवं दूरसंचार इंजीनियर/टेली मुख्यालय द्वारा कवच स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (एटीपी) प्रणाली पर एक प्रस्तुति दी गयी। यह प्रणाली रेलवे यात्रीयों की सुरक्षा के लिए मील का पत्थर साबित होगी। भारतीय रेलवे ने चलती हुई ट्रेनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कवच नामक एक स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (एटीपी) प्रणाली विकसित की है। यह पूर्ण रूप से स्वदेशी तकनीक है और ट्रेनों के संचालन की हर पल निगरानी करती है। यह प्रणाली सिग्नल एवं स्पीड से संबन्धित दुर्घटनाओं को रोकने में पूर्णतया सक्षम है।

ट्रेनों का संचालन मुख्यतया स्टेशन मास्टर एवं ट्रेन ड्राइवरों द्वारा किया जाता है। अत: ट्रेनों की सुरक्षा की सर्वाधिक जिम्मेदारी स्टेशन मास्टर एवं ट्रेन ड्राइवरों पर है। स्टेशन मास्टर से ट्रेनों के परिचालन में कोई गलती न हो यह सिग्नल एवं दूरसंचार विभाग द्वारा सिस्टम की इंटरलोकिंग द्वारा सुनिश्चित किया जाता है। किन्तु ट्रेन ड्राइवरों के पास अब तक कोई ऐसी विश्वसनीय मदद नहीं थी। यह कवच (ट्रेन कुलीजन एवोइडेंस सिस्टम) प्रणाली ट्रेन ड्राइवरों की मदद के लिए एक विश्वसनीय साथी है। यदि ड्राइवर कहीं स्पीड कंट्रोल करना या ब्रेक लगाना भूल जाता है तो कवच प्रणाली ब्रेक इंटरफेस यूनिट द्वारा ट्रेन को स्वचालित रूप से कंट्रोल कर लेती है।

यह प्रणाली ड्राइवर के केबिन में लाइन-साइड सिग्नल के आस्पेक्ट को दोहराती है। जिससे घने कोहरे, बरसात जैसे कठोर मौसम के दौरान भी ट्रेन संचालन की सुरक्षा और दक्षता सुनिश्चित होगी। यदि लोको पायलट ब्रेक लगाने में विफल रहता है, तो भी यह प्रणाली स्वचालित रूप से ब्रेक लगाकर ट्रेन की गति को नियंत्रित करने में मदद करती है। यह प्रणाली संचालन प्राधिकरण (मूविंग ओथोरिटी) के निरंतर अद्यतन के सिद्धांत पर काम करती है एवं लोको को सीधे टकराव से बचने में, लोको में स्थित संचार माध्यम द्वारा, सक्षम बनाती है।

कवच प्रणाली द्वारा प्रदान की जाने वाली अन्य विशेषताओं में समपार (एलसी) फाटकों पर आटो सीटी बजाना और विषमता की स्थिति में या जोखिम के मामले में अन्य ट्रेनों को नियंत्रित एवं सावधान करने के लिए आटो/मेनुअल एसओएस प्रणाली को तुरंत सक्रिय करना शामिल है जिससे कि आसपास के क्षेत्र में सभी ट्रेनों का संचालन तुरंत रुक जाता है।

इस प्रणाली में पूरे सेक्शन में विश्वसनीय वायरलेस कम्यूनिकेशन स्थापित किया जाता है तथा सभी स्टेशनों व सभी इंजिनों में डिवाइस लगाई जाती है जिससे ट्रेन का इंजिन सम्पूर्ण ट्रैक में लगे हुए रेडियो फ्रिक्वेन्सी टैग द्वारा ट्रैक व सिग्नल से संबन्धित विवरण प्राप्त करता है। इंजिन में स्थित डिवाइस (लोको यूनिट) स्टेशन के इंटर्लोकिंग सिस्टम , सिगनल के निर्देश और समपार फाटकों से विवरण लेती है और कंप्यूटरीक्रत प्रणाली के निदेर्शानुसार ट्रेन का संचालन सुरक्षित गति में करती है। इस कवच प्रणाली द्वारा ट्रेनों का संचालन सभी मानवीय भूलों से निरापद है।

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के 2164 किमी. के लिए कवच प्रणाली को रेलवे बोर्ड द्वारा स्वीकृत किया जा चुका है और सिग्नल एवं दूरसंचार विभाग द्वारा पहले चरण में नागपुर से झारसुगुड़ा (615 किमी.) खण्ड में सर्वे का कार्य आरंभ किया जा चुका है। इस प्रणाली को पूर्ण रूपेण तरीके से स्थापित करने में करीब 3 वर्ष लगेंगे।


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